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147 मरीजों के पर्चा बनवाने के बाद पौने नौ बजे पहुंचे चिकित्सक
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पौने नौ बजे तक डॉक्टर का इंतजार ही करते रहे मरीज
- 147 मरीज बनवा चुके थे पर्चा, नहीं पहुंचे चिकित्सक
- बायोमैट्रिक मशीन लगने के बाद भी नहीं आया कोई सुधार
अमर उजाला ब्यूरो
एटा। सुबह के सवा आठ बज चुके थे, मरीजों की लाइन पर्चा बनवाने के लिए लगी थी। पौने नौ बजे तक करीब 147 मरीजों ने अपने पर्चे बनवा लिए थे, लेकिन चिकित्सक अब तक नहीं आए थे। यहां मरीज करीब एक घंटे तक चिकित्सकों का इंतजार करते रहे। मरीज व तीमारदार चिकित्सकों की लेटलतीफी को कोस रहे थे। पौने नौ बजे एक चिकित्सक आए तो मरीजों की भीड़ उनके कमरे की तरफ टूट पड़ी। जिला अस्पताल में चिकित्सकों का देरी से आना आम हो चला है। गुरुवार को पड़ताल करती हुई अमर उजाला की लाइव की रिपोर्ट...
-------
समय सुबह 8:26 मिनट
स्थान : फिजीशियन कक्ष
फिजीशियन कक्ष के सामने मरीजों की लंबी कतार लगी थी। करीब 20 से 30 लोग चिकित्सक को दिखाने के लिए खड़े थे। कमरा खुला हुआ था, लेकिन चिकित्सक अभी तक नहीं आए थे। कोई आसपुर से तो कोई जैथरा से बच्चों को दिखाने आया था। तीमारदार बोले, चिकित्सक समय पर बैठने लगें तो राहत मिले। लेकिन उनका लेट आने का सिलसिला रोजान का है। उच्चाधिकारियों को इस पर ध्यान देना चाहिए। चिकित्सक करीब पौने नौ बजे पहुंचे।
समय सुबह 8:30 मिनट
स्थान : डॉ. एस चंद्रा का कक्ष
मरीज यहां भी चिकित्सक का इंतजार कर रहे थे। डॉ. एस चंद्र का कक्ष खुला था, लेकिन वह नहीं थे। यहां एक कर्मचारी ने बताया कि डाक्टर साहब तो नौ बजे तक ही आएंगे। यह सुनकर वहां काफी देर से खड़े मरीज बैंचों पर जाकर बैठ गए, लेकिन उन्हें अपना नंबर कटने का डर था तो साथ आए किसी व्यक्ति को लाइन में लगा दिया। करीब आधे घंटे इंतजार के बाद भी डा. चंद्रा जिला अस्पताल नहीं पहुंचे थे।
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समय सुबह 8:38 मिनट
स्थान : सीएमएस कक्ष
सीएमएस खुद ही समय से नहीं पहुंचे थे। उनका कमरा भी खाली पड़ा था। रजिस्टर खुला रखा था, जो चिकित्सक आते जा रहे थे, वे अपने दस्तखत करते हुए अपने कक्ष की ओर बढ़ रहे थे। यहां मरीजों की लाइन तो नहीं थी, लेकिन बताया कि सीएमएस साहब भी कभी-कभी मरीज देख लेते हैं।
इनके कमरे भी रहे खाली
सुबह नौ बजे तक डॉ. अनंत व्यास और डॉ. आरके दयाल के अलावा दंत चिकित्सक, नेत्र चिकित्सक, हड्डी रोग विशेषज्ञ, होम्योपैथिक विभाग सहित अन्य कई कक्ष भी खाली पड़े थे। यहां बैठने वाले चिकित्सक भी सुबह नौ बजे तक नदारद ही रहे। गुरुवार को 500 से ऊपर मरीजों ने पंजीकरण कराया था।
मरीजों की बात
लंबी लाइन के चलते सुबह सब काम छोड़कर डाक्टर को दिखाने आए थे, लेकिन यहां डाक्टर ही नहीं है, काफी देर से इंतजार कर रहे हैं।
- किरण, मरीज
पिछली बार जब आए थे उस बार भी चिकित्सक लेट ही थे। सुबह से लंबी लाइन लग जाती है। चिकित्सकों को भी समय में सुधार करना चाहिए।
- रश्मी, तीमारदार
पेट दर्द से तीन-चार दिन से परेशान है। सुबह आसानी से चिकित्सक मिल जाएंगे, यह सोच कर आए थे, लेकिन यहां भीड़ होने के बाद भी डॉक्टर नहीं आए।
- कृृष्णकांत चतुर्वेदी
कई दिनों से दर्द से परेशान हूं। जैथरा से सुबह ही चल दिया था। लेकिन आधे घंटे से ज्यादा हो गया, पर्चा तो बन गया, लेकिन डाक्टर नहीं है।
- मंगल सिंह
चिकित्सकों को समय से ड्यूटी पर पहुंचने की हिदायत दी गई है। अगर वह समय से नहीं पहुंच रहे हैं तो इसकी जांच कराई जाएगी। समय पर न पहुंचने वाले चिकित्सकों पर कार्रवाई की जाएगी।
- डा. अजय अग्रवाल, सीएमओ।
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- 147 मरीज बनवा चुके थे पर्चा, नहीं पहुंचे चिकित्सक
- बायोमैट्रिक मशीन लगने के बाद भी नहीं आया कोई सुधार
अमर उजाला ब्यूरो
एटा। सुबह के सवा आठ बज चुके थे, मरीजों की लाइन पर्चा बनवाने के लिए लगी थी। पौने नौ बजे तक करीब 147 मरीजों ने अपने पर्चे बनवा लिए थे, लेकिन चिकित्सक अब तक नहीं आए थे। यहां मरीज करीब एक घंटे तक चिकित्सकों का इंतजार करते रहे। मरीज व तीमारदार चिकित्सकों की लेटलतीफी को कोस रहे थे। पौने नौ बजे एक चिकित्सक आए तो मरीजों की भीड़ उनके कमरे की तरफ टूट पड़ी। जिला अस्पताल में चिकित्सकों का देरी से आना आम हो चला है। गुरुवार को पड़ताल करती हुई अमर उजाला की लाइव की रिपोर्ट...
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समय सुबह 8:26 मिनट
स्थान : फिजीशियन कक्ष
फिजीशियन कक्ष के सामने मरीजों की लंबी कतार लगी थी। करीब 20 से 30 लोग चिकित्सक को दिखाने के लिए खड़े थे। कमरा खुला हुआ था, लेकिन चिकित्सक अभी तक नहीं आए थे। कोई आसपुर से तो कोई जैथरा से बच्चों को दिखाने आया था। तीमारदार बोले, चिकित्सक समय पर बैठने लगें तो राहत मिले। लेकिन उनका लेट आने का सिलसिला रोजान का है। उच्चाधिकारियों को इस पर ध्यान देना चाहिए। चिकित्सक करीब पौने नौ बजे पहुंचे।
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समय सुबह 8:30 मिनट
स्थान : डॉ. एस चंद्रा का कक्ष
मरीज यहां भी चिकित्सक का इंतजार कर रहे थे। डॉ. एस चंद्र का कक्ष खुला था, लेकिन वह नहीं थे। यहां एक कर्मचारी ने बताया कि डाक्टर साहब तो नौ बजे तक ही आएंगे। यह सुनकर वहां काफी देर से खड़े मरीज बैंचों पर जाकर बैठ गए, लेकिन उन्हें अपना नंबर कटने का डर था तो साथ आए किसी व्यक्ति को लाइन में लगा दिया। करीब आधे घंटे इंतजार के बाद भी डा. चंद्रा जिला अस्पताल नहीं पहुंचे थे।
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समय सुबह 8:38 मिनट
स्थान : सीएमएस कक्ष
सीएमएस खुद ही समय से नहीं पहुंचे थे। उनका कमरा भी खाली पड़ा था। रजिस्टर खुला रखा था, जो चिकित्सक आते जा रहे थे, वे अपने दस्तखत करते हुए अपने कक्ष की ओर बढ़ रहे थे। यहां मरीजों की लाइन तो नहीं थी, लेकिन बताया कि सीएमएस साहब भी कभी-कभी मरीज देख लेते हैं।
इनके कमरे भी रहे खाली
सुबह नौ बजे तक डॉ. अनंत व्यास और डॉ. आरके दयाल के अलावा दंत चिकित्सक, नेत्र चिकित्सक, हड्डी रोग विशेषज्ञ, होम्योपैथिक विभाग सहित अन्य कई कक्ष भी खाली पड़े थे। यहां बैठने वाले चिकित्सक भी सुबह नौ बजे तक नदारद ही रहे। गुरुवार को 500 से ऊपर मरीजों ने पंजीकरण कराया था।
मरीजों की बात
लंबी लाइन के चलते सुबह सब काम छोड़कर डाक्टर को दिखाने आए थे, लेकिन यहां डाक्टर ही नहीं है, काफी देर से इंतजार कर रहे हैं।
- किरण, मरीज
पिछली बार जब आए थे उस बार भी चिकित्सक लेट ही थे। सुबह से लंबी लाइन लग जाती है। चिकित्सकों को भी समय में सुधार करना चाहिए।
- रश्मी, तीमारदार
पेट दर्द से तीन-चार दिन से परेशान है। सुबह आसानी से चिकित्सक मिल जाएंगे, यह सोच कर आए थे, लेकिन यहां भीड़ होने के बाद भी डॉक्टर नहीं आए।
- कृृष्णकांत चतुर्वेदी
कई दिनों से दर्द से परेशान हूं। जैथरा से सुबह ही चल दिया था। लेकिन आधे घंटे से ज्यादा हो गया, पर्चा तो बन गया, लेकिन डाक्टर नहीं है।
- मंगल सिंह
चिकित्सकों को समय से ड्यूटी पर पहुंचने की हिदायत दी गई है। अगर वह समय से नहीं पहुंच रहे हैं तो इसकी जांच कराई जाएगी। समय पर न पहुंचने वाले चिकित्सकों पर कार्रवाई की जाएगी।
- डा. अजय अग्रवाल, सीएमओ।