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श्रीमती बनेंगी प्रधान, श्रीमान करेंगे प्रधानी
अमर उजाला ब्यूरो/देवरिया
Updated Sat, 21 Nov 2015 12:06 AM IST
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पंचायत चुनाव में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलने के बाद भी वे अभी घूंघट और चूल्हे -चौके से उबर नहीं पा रही हैं। महिलाओं के अधिकार क्षेत्र में अतिक्रमण का सिलसिला इस चुनाव में भी जारी रहने की उम्मीद है। शुक्र को आरक्षण वाले पदों पर नामांकन पत्र दाखिल करने आईं महिलाओं का घूंघट नहीं उठा।
लोकसभा और विधानसभा जैसी बड़ी पंचायत में जाने वाली महिलाओं को छोड़कर पंचायत में चुनी जाने वाली अधिकतर महिलाएं रबर स्टांप बनकर रह जाती हैं।
ग्राम पंचायत, जिला पंचायत से लेकर नगर पंचायत में चुनी हुई महिलाओं का काम या तो उनके पति या घर का कोई सदस्य संभालता है। रुद्रपुर ब्लाक की 86 ग्राम पंचायतों में से 27 को महिलाओं के लिए आरक्षित किया गया है।
इन ग्राम पंचायतों से करीब 110 महिला प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। रुद्रपुर ब्लाक पर नामांकन पत्र दाखिल करने के दौरान महिला प्रत्याशियों में से अधिकांश महिलाएं प्रधान पद की डमी प्रत्याशी प्रतीत हो रही थीं।
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आरओ संजीव सिंह ने कहा कि पंचायत राज व्यवस्था के अनुसार चुना हुआ प्रतिनिधि ग्राम सभा का कार्यभार देख सकता है। पंचायत स्तर पर भी महिलाएं जागरूक हो रही हैं।
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लोकसभा और विधानसभा जैसी बड़ी पंचायत में जाने वाली महिलाओं को छोड़कर पंचायत में चुनी जाने वाली अधिकतर महिलाएं रबर स्टांप बनकर रह जाती हैं।
ग्राम पंचायत, जिला पंचायत से लेकर नगर पंचायत में चुनी हुई महिलाओं का काम या तो उनके पति या घर का कोई सदस्य संभालता है। रुद्रपुर ब्लाक की 86 ग्राम पंचायतों में से 27 को महिलाओं के लिए आरक्षित किया गया है।
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इन ग्राम पंचायतों से करीब 110 महिला प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। रुद्रपुर ब्लाक पर नामांकन पत्र दाखिल करने के दौरान महिला प्रत्याशियों में से अधिकांश महिलाएं प्रधान पद की डमी प्रत्याशी प्रतीत हो रही थीं।
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आरओ संजीव सिंह ने कहा कि पंचायत राज व्यवस्था के अनुसार चुना हुआ प्रतिनिधि ग्राम सभा का कार्यभार देख सकता है। पंचायत स्तर पर भी महिलाएं जागरूक हो रही हैं।