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पांच मोहल्लों की एक कहानी, कमर भर लगता है पानी
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रामगुलाम टोला उत्तरी में लगे पानी के बीच ट्यूब के सहारे स्कूल जाता विद्वार्थी।संवाद, अनूप तिवार?
- फोटो : DEORIA
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पांच मोहल्लों की एक कहानी, कमर भर लगता है पानी
बाढ़ग्रस्त के रूप में चिह्नित हैं महायोजना के लिए घोषित आवासीय क्षेत्र
25 वार्ड हैं नगर पालिका परिषद में
33 वार्ड हो जाएंगे विस्तार होने पर
23 गांव शामिल किए गए हैं विस्तार में
05 किमी हो जाएगा नगर पालिका क्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। दो किलोमीटर दायरे वाली नगर पालिका का क्षेत्र अब पांच किलोमीटर से अधिक हो जाएगा। महायोजना तैयार हो रही है। लेकिन, शहर के पांच मोहल्ले ऐसे हैं, जहां बरसात के दिनों में हर साल कमर भर पानी लग जाता है। इससे मोहल्ले के लोग ट्यूब की नाव और अन्य तरीकों से घर आ-जा रहे हैं। यहां जलनिकासी की व्यवस्था नहीं है। कच्चे मार्ग हैं। गंभीर बात तो यह कि महायोजना में घोषित ये आवासीय क्षेत्र बाढ़ग्रस्त के रूप में चिह्नित हैं।
नगर पालिका परिषद में 25 वार्ड हैं। आने वाले समय में 33 वार्ड हो जाएंगे। कारण यह कि 23 गांव सीमा विस्तार के तहत शामिल किए गए हैं। शहर की हालत यह है कि मूसलाधार बारिश में पांच मोहल्लों में हर साल कमर भर पानी लोगों के घर के सामने लग जाता है। इंतजाम के नाम पर कुछ नहीं होता है। बरसात के दिनों में लोगों को घर से बाहर निकलने में दुश्वारियों का सामना करना पड़ता है।
शहर का रामगुलाम टोला मोहल्ला वार्ड नंबर आठ और पांच है। यह काफी पुराना मोहल्ला है। वोटरों की संख्या अन्य जगहों से अधिक है। यहां आधे से अधिक क्षेत्र में जलभराव है। कई दिनों से हुई बारिश के रुकने के बाद अब जलभराव के बीच से आना-जाना लोगों की मजबूरी है। छात्र ट्यूब की नाव के सहारे पढ़ने जाते हैं। स्कूल से लौटते वक्त कपड़े और बैग दूसरे के घर रख देते हैं। ट्यूब की नाव से आने-जाने में भीगना पड़ता है। रामगुलाम टोला, पिड़रा से सटे है। यहां भी करीब तीन सौ से अधिक घर हैं। यहां तक पहुंचने के लिए लोगों को पानी के रास्ते जाना पड़ता है।
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महुआबारी के पास शांति नगर मोहल्ला है। यहां करीब सौ घरों तक जाने वाले रास्ते को देखने से पता चलता है कि लोगों को कितनी दुश्वारियां झेलनी पड़ रही हैं। कुछ लोग तो इन दिनों रिश्तेदारी आदि जगहों पर रहकर घर लौटने के लिए बरसात के खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं। उनके दरवाजे पर कमर भर पानी लगा हुआ है।
दानोपुर गांव के पास कुछ घर जलभराव के कारण घिरे हुए हैं। बरसात में लोगों को लगता है कि इससे अच्छा तो गांव ही है, जहां यह समस्या नहीं है। सबसे गंभीर हालत शहीद नगर मोहल्ले की है। यहां 85 घरों के बाहर एक सप्ताह से अधिक समय से पानी भरा हुआ है। महिलाएं घरों में कैद हैं। इन जगहों पर जलनिकासी की व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं।
कोट
करीब बीस साल से यह समस्या देखने को मिल रही है। कई बार जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई, लेकिन हर बार आश्वासन मिला। बारिश होने के बाद घर से निकलना मुश्किल हो जाता है।
-मनु वर्मा, दो फेड़वा, रामगुलाम टोला वार्ड आठ
कोट---
हर बारिश में यहां का हाल यह है कि करीब दो माह तक पानी घर के पास जमा रहता है। किसी तरह जुगाड़ से आने-जाने का कार्य किया जा रहा है। सबसे अधिक परेशानी विद्यार्थियों को है।
- धीरेंद्र यादव, पिड़रा
कोट
मोहल्ले में चारों तरफ पानी भरा है। कोई जिम्मेदार अभी तक देखने तक नहीं आया है। अब पानी से कम से एक माह तक दिक्कत रहेगी। इसके लिए नगर पालिका को ठोस उपाय करने चाहिए।
-सुशील कुमार, वार्ड नंबर पांच
वर्जन---
1996 से जलभराव की स्थिति चली आ रही है। करीब तीन माह तक जलभराव की समस्या रहती है। जलभराव से निजात दिलाने के लिए प्रस्ताव दिया गया है। कार्ययोजना बनाई गई है। अगर बजट मिल जाए तो समस्या का निदान हो जाएगा।
-अजय कुमार सिंह, सभासद
वर्जन
पानी की निकासी के लिए पंपिंग सेट लगाए गए हैं। जल्द ही पानी इन मोहल्लों से निकल जाएगा। इसके लिए कार्य किया जा रहा है। जलनिकासी के लिए प्रस्ताव पास हो चुका है। बरसात बीतने के बाद कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
- रोहित सिंह, ईओ
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बाढ़ग्रस्त के रूप में चिह्नित हैं महायोजना के लिए घोषित आवासीय क्षेत्र
25 वार्ड हैं नगर पालिका परिषद में
33 वार्ड हो जाएंगे विस्तार होने पर
23 गांव शामिल किए गए हैं विस्तार में
05 किमी हो जाएगा नगर पालिका क्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। दो किलोमीटर दायरे वाली नगर पालिका का क्षेत्र अब पांच किलोमीटर से अधिक हो जाएगा। महायोजना तैयार हो रही है। लेकिन, शहर के पांच मोहल्ले ऐसे हैं, जहां बरसात के दिनों में हर साल कमर भर पानी लग जाता है। इससे मोहल्ले के लोग ट्यूब की नाव और अन्य तरीकों से घर आ-जा रहे हैं। यहां जलनिकासी की व्यवस्था नहीं है। कच्चे मार्ग हैं। गंभीर बात तो यह कि महायोजना में घोषित ये आवासीय क्षेत्र बाढ़ग्रस्त के रूप में चिह्नित हैं।
नगर पालिका परिषद में 25 वार्ड हैं। आने वाले समय में 33 वार्ड हो जाएंगे। कारण यह कि 23 गांव सीमा विस्तार के तहत शामिल किए गए हैं। शहर की हालत यह है कि मूसलाधार बारिश में पांच मोहल्लों में हर साल कमर भर पानी लोगों के घर के सामने लग जाता है। इंतजाम के नाम पर कुछ नहीं होता है। बरसात के दिनों में लोगों को घर से बाहर निकलने में दुश्वारियों का सामना करना पड़ता है।
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शहर का रामगुलाम टोला मोहल्ला वार्ड नंबर आठ और पांच है। यह काफी पुराना मोहल्ला है। वोटरों की संख्या अन्य जगहों से अधिक है। यहां आधे से अधिक क्षेत्र में जलभराव है। कई दिनों से हुई बारिश के रुकने के बाद अब जलभराव के बीच से आना-जाना लोगों की मजबूरी है। छात्र ट्यूब की नाव के सहारे पढ़ने जाते हैं। स्कूल से लौटते वक्त कपड़े और बैग दूसरे के घर रख देते हैं। ट्यूब की नाव से आने-जाने में भीगना पड़ता है। रामगुलाम टोला, पिड़रा से सटे है। यहां भी करीब तीन सौ से अधिक घर हैं। यहां तक पहुंचने के लिए लोगों को पानी के रास्ते जाना पड़ता है।
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महुआबारी के पास शांति नगर मोहल्ला है। यहां करीब सौ घरों तक जाने वाले रास्ते को देखने से पता चलता है कि लोगों को कितनी दुश्वारियां झेलनी पड़ रही हैं। कुछ लोग तो इन दिनों रिश्तेदारी आदि जगहों पर रहकर घर लौटने के लिए बरसात के खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं। उनके दरवाजे पर कमर भर पानी लगा हुआ है।
दानोपुर गांव के पास कुछ घर जलभराव के कारण घिरे हुए हैं। बरसात में लोगों को लगता है कि इससे अच्छा तो गांव ही है, जहां यह समस्या नहीं है। सबसे गंभीर हालत शहीद नगर मोहल्ले की है। यहां 85 घरों के बाहर एक सप्ताह से अधिक समय से पानी भरा हुआ है। महिलाएं घरों में कैद हैं। इन जगहों पर जलनिकासी की व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं।
कोट
करीब बीस साल से यह समस्या देखने को मिल रही है। कई बार जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई, लेकिन हर बार आश्वासन मिला। बारिश होने के बाद घर से निकलना मुश्किल हो जाता है।
-मनु वर्मा, दो फेड़वा, रामगुलाम टोला वार्ड आठ
कोट---
हर बारिश में यहां का हाल यह है कि करीब दो माह तक पानी घर के पास जमा रहता है। किसी तरह जुगाड़ से आने-जाने का कार्य किया जा रहा है। सबसे अधिक परेशानी विद्यार्थियों को है।
- धीरेंद्र यादव, पिड़रा
कोट
मोहल्ले में चारों तरफ पानी भरा है। कोई जिम्मेदार अभी तक देखने तक नहीं आया है। अब पानी से कम से एक माह तक दिक्कत रहेगी। इसके लिए नगर पालिका को ठोस उपाय करने चाहिए।
-सुशील कुमार, वार्ड नंबर पांच
वर्जन---
1996 से जलभराव की स्थिति चली आ रही है। करीब तीन माह तक जलभराव की समस्या रहती है। जलभराव से निजात दिलाने के लिए प्रस्ताव दिया गया है। कार्ययोजना बनाई गई है। अगर बजट मिल जाए तो समस्या का निदान हो जाएगा।
-अजय कुमार सिंह, सभासद
वर्जन
पानी की निकासी के लिए पंपिंग सेट लगाए गए हैं। जल्द ही पानी इन मोहल्लों से निकल जाएगा। इसके लिए कार्य किया जा रहा है। जलनिकासी के लिए प्रस्ताव पास हो चुका है। बरसात बीतने के बाद कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
- रोहित सिंह, ईओ