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रुद्रपुर में टलने लगा बाढ़ का संकट, दो दिन में 40 सेमी घटीं राप्ती और गोर्रा नदियां

Thu, 09 Sep 2021 12:21 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 09 Sep 2021 12:21 AM IST
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water level decreasd of rapti and gorra rivers
रुद्रपुर में टलने लगा बाढ़ का संकट, दो दिन में 40 सेमी घटीं राप्ती और गोर्रा नदियां
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रुद्रपुर। बाढ़ आपदा के हाई एलर्ट जोन रुद्रपुर में तेजी से हालात सुधर रहे हैं। राप्ती और गोर्रा का जलस्तर हाई फ्लड लेवल को छू कर तेजी से नीचे उतरने लगा है। बुधवार को राप्ती और गोर्रा का जलस्तर 20 सेमी कम हुआ। दो दिन में दोनो नदियों के जलस्तर में 40 सेमी की कमी आई है। बावजूद इसके दोनों नदियां अभी खतरे के निशान 70.50 मीटर से 30 से 25 सेमी ऊपर बह रही हैं।
बुधवार की शाम राप्ती का जलस्तर 71.75 मीटर और गोर्रा नदी 72.20 मीटर से घट कर 71.80 पर पहुंच गई। नदियों का जलस्तर हाई फ्लड लेवल से तेजी से नीचे जाने के बाद दोआबा और कछार के 116 गांवों के लोग राहत महसूस कर रहे हैं। जलस्तर घटने पर तिघरा मराछी बांध पर करीब एक दर्जन जगहों पर हो रहा रिसाव रुक गया है। वहीं गोर्रा नदी पर बने तटबंधों पर 27 जगहों पर रिसाव रुक गया है। नदी का जलस्तर नीचे जाने के साथ बंधो पर कटान तेज हो गया है। गायघाट में नदी तेजी से कटान कर रही है। माझा भीमसेन में भी कटान जारी है। दोनो जगहों पर करीब पांच मीटर बांध को नुकसान पहुंचा है। सिंचाई विभाग कटान स्थलों पर मुस्तैदी से बचाव कार्य में लगा है। बचाव कार्य में ग्रामीण भी भरपूर सहयोग दे रहें है। अधिशासी अभियंता नरेंद्र जाड़िया ने कहा कि कटान स्थलों पर निरंतर काम हो रहा है। कटान को काबू में कर लिया जाएगा। गायघाट में थोड़ी दिक्कत है लेकिन बांध को बचा लिया जाएगा।
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फसल के नुकसान के मुआवजे की मांग
रुद्रपुर। कांग्रेस के पूर्व विधायक अखिलेश प्रताप सिंह ने बुधवार को बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा किया। उन्होंने दोआबा और कछार में जाकर बाढ़ पीड़ितो का हाल जाना। पूर्व विधायक भुसवल, जिगिनिहवा, गायघाट, छपरा, गाजन डहरौली गांव का दौरा करने के बाद पत्रकार वार्ता में कहे कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में हालात काफी दयनीय है। बाढ़ पीड़ितों को प्रशासन उनके हाल पर छोड़ दिया है। प्रशासन बाढ़ पीड़ितों की अनदेखी कर रहा है। कही भी राहत और बचाव का कार्य ठीक से नहीं हो रहा है। चारों ओर से पानी से घिरे गांवों में प्रशासन का इमदाद नहीं पहुंच रहा है। करीब 15 दिनों से बेहाल बाढ़ पीड़ित नमक, तेल और माचिस को तरस रहे हैं। बरसात के पानी से करीब दो हजार एकड़ फसल चौपट हो गई है। उन्होंने शासन प्रशासन से बर्बाद फसलों के मुआवजे और बाढ़ ग्रस्त इलाके में राहत सामग्री पहुंचाने की मांग की। इस बाबत एसडीएम संजीव कुमार उपाध्याय ने कहा कि नुकसान फसलों का मुआवजा दिलाने के लिए क्षति का आंकलन किया जा रहा है। लेखपालों को किसानों की सूची बनाने का निर्देश दे दिया गया है। बाढ़ पीड़ितों को राहत दी जा रही है। फसलों के नुकसान की रिपोर्ट शासन को भेज दी जाएगी।
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