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Deoria News: 600 गांवों में बढ़ सकता है पानी का संकट
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देवरिया। जिले के करीब 600 गांवों में इस गर्मी पेयजल संकट गहराने की आशंका है। वजह यह कि हर घर नल योजना के तहत जिन गांवों में पाइप लाइन बिछाने और पानी की टंकी निर्माण का काम चल रहा था, वहां बजट के अभाव में काम रुक गया है।
इन गांवों में पाइप लाइन से पानी आपूर्ति शुरू नहीं हो पाएगी। ग्रामीणों को साधारण हैंडपंप और निजी साधनों पर ही निर्भर रहना पड़ेगा।
जिले में कुल 1068 गांवों को हर घर नल योजना से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके तहत पाइपलाइन बिछाने, ओवरहेड टैंक बनाने और घर-घर कनेक्शन देने का कार्य शुरू हुआ। शुरुआती चरण में काम तेजी से चला लेकिन केंद्रीय बजट रुकने के बाद फंड का प्रवाह थम गया। अब प्रदेश सरकार को अपने संसाधनों से काम पूरा कराना है, जिससे परियोजना की रफ्तार प्रभावित हो गई है।
जल निगम के अधिकारियों के अनुसार वर्तमान वित्तीय स्थिति को देखते हुए इस वित्तीय वर्ष में करीब 100 गांवों में ही काम पूरा हो पाने की संभावना है। शेष गांवों में निर्माण कार्य अधूरा है। कहीं पाइपलाइन बिछी है तो टंकी अधूरी है, तो कहीं टंकी बनकर तैयार है लेकिन विद्युत कनेक्शन और मोटर की व्यवस्था नहीं हो सकी है। काम पूरा कराने के लिए करीब 150 करोड़ रुपये की जरूरत है जो फिलहाल मार्च से पहले मिलना मुश्किल है।
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जल निगम ग्रामीण के अधिशासी अभियंता अखिल आनंद के अनुसार शासन स्तर पर बजट की व्यवस्था के प्रयास किए जा रहे हैं। प्राथमिकता उन गांवों को दी जा रही है जहां काम अंतिम चरण में है।
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इन गांवों में पाइप लाइन से पानी आपूर्ति शुरू नहीं हो पाएगी। ग्रामीणों को साधारण हैंडपंप और निजी साधनों पर ही निर्भर रहना पड़ेगा।
जिले में कुल 1068 गांवों को हर घर नल योजना से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके तहत पाइपलाइन बिछाने, ओवरहेड टैंक बनाने और घर-घर कनेक्शन देने का कार्य शुरू हुआ। शुरुआती चरण में काम तेजी से चला लेकिन केंद्रीय बजट रुकने के बाद फंड का प्रवाह थम गया। अब प्रदेश सरकार को अपने संसाधनों से काम पूरा कराना है, जिससे परियोजना की रफ्तार प्रभावित हो गई है।
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जल निगम के अधिकारियों के अनुसार वर्तमान वित्तीय स्थिति को देखते हुए इस वित्तीय वर्ष में करीब 100 गांवों में ही काम पूरा हो पाने की संभावना है। शेष गांवों में निर्माण कार्य अधूरा है। कहीं पाइपलाइन बिछी है तो टंकी अधूरी है, तो कहीं टंकी बनकर तैयार है लेकिन विद्युत कनेक्शन और मोटर की व्यवस्था नहीं हो सकी है। काम पूरा कराने के लिए करीब 150 करोड़ रुपये की जरूरत है जो फिलहाल मार्च से पहले मिलना मुश्किल है।
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जल निगम ग्रामीण के अधिशासी अभियंता अखिल आनंद के अनुसार शासन स्तर पर बजट की व्यवस्था के प्रयास किए जा रहे हैं। प्राथमिकता उन गांवों को दी जा रही है जहां काम अंतिम चरण में है।