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Deoria News: अल्ट्रासाउंड जांच ठप, मरीज परेशान
Sat, 19 Apr 2025 12:12 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sat, 19 Apr 2025 12:12 AM IST
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ब्लड कलेक्शन सेंटर पर रजिस्ट्रेशन के लिए लगी कतार
मेडिकल कॉलेज में रेडियोलॉजिस्ट के नहीं रहने से ठप रही जांच
मरीजों को ज्यादा रुपये देकर करानी पड़ रही बाहर से जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मेडिकल कॉलेज में रेडियोलाॅजिस्ट के न रहने से अल्ट्रासाउंड जांच ठप है। मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शुक्रवार को दूर-दराज से आए पीड़ितों को निराश होकर लौटना पड़ा। जांच के लिए कुछ को निजी सेंटरों का सहारा लेना पड़ रहा है, जहां उन्हें कीमत चुकानी पड़ रही है।
मेडिकल कॉलेज अल्ट्रासाउंड की सुविधा है, मगर रेडियोलाॅजिस्ट की कमी का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। यहां पुरुष अस्पताल के लिए मात्र एक रेडियोलाॅजिस्ट की तैनाती है। उनके अवकाश पर जाने से मरीजों को दिक्कत होती है। अस्पताल में शहर से लेकर ग्रामीणांचल के अलावा बिहार के सीमावर्ती इलाके के मरीज आते हैं। मेडिसिन, सर्जरी, बाल रोग विभाग सहित विभिन्न ओपीडी में आने वाले मरीजों को जरूरत पड़ने पर डॉक्टर अल्ट्रासाउंड जांच लिखते हैं।
ओपीडी से रोजाना 70 से 75 मरीज जांच के लिए पहुंचते हैं। इसके अलावा वार्ड में भर्ती मरीजों की भी जांच हाेती है। यहां हर ओपीडी के पहले नंबर लगाए 15 से 20 मरीजों के अलावा इमरजेंसी व वार्ड के मरीजों की ही जांच हो पाती है। ओपीडी के अन्य मरीजों को लौटना पड़ता है। उन्हें जांच के लिए अगले दिन फिर आना पड़ता है। शुक्रवार को रेडियोलाॅजिस्ट के न्यायालय कार्य से जाने की वजह से जांच ठप रही।
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रुद्रपुर क्षेत्र के रामकेवल, बैतालपुर क्षेत्र के राजीव कुमार, भलुअनी के जितेंद्र ने बताया कि डॉक्टर के लिखने पर जांच के लिए पहुंचा तो जांच न होने की जानकारी दी गई। जांच हो गई होती तो डॉक्टर को रिपोर्ट दिखा दिया होता। अब जांच के लिए फिर आना पड़ेगा। आने-जाने में परेशानी होती है। समय के साथ धन भी खर्च होता है।
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एक रेडियोलाॅजिस्ट पर कई है जिम्मेदारी
मेडिकल कॉलेज के पुरुष अस्पताल में मात्र एक रेडियोलाॅजिस्ट की तैनाती है। वह अल्ट्रासाउंड करते हैं। इसके अलावा उन पर रोजाना करीब 15 से 20 पुलिस मेडिकोलीगल, सीटी स्कैन रिपोर्ट के काउंटर साइन की जिम्मेदारी है। साथ ही, न्यायालय कार्य से गैर जिले में जाना पड़ता है। एक दिन न्यायालय कार्य से जाने के बाद अगले दिन उन पर कार्य का दबाव बढ़ जाता है। दोनों दिन का कार्य निपटाना पड़ता है।
..
मेडिकल कॉलेज में रेडियोलाॅजिस्ट की कमी है। पुरुष अस्पताल में एक रेडियोलाॅजिस्ट हैं। उनके न्यायालय कार्य से जाने के कारण दिक्कत होती है। उरेडियोलाॅजिस्ट की तैनाती के लिए शासन से मांग की गई है।
-डॉ. एचके मिश्रा, सीएमएस
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मरीजों को ज्यादा रुपये देकर करानी पड़ रही बाहर से जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मेडिकल कॉलेज में रेडियोलाॅजिस्ट के न रहने से अल्ट्रासाउंड जांच ठप है। मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शुक्रवार को दूर-दराज से आए पीड़ितों को निराश होकर लौटना पड़ा। जांच के लिए कुछ को निजी सेंटरों का सहारा लेना पड़ रहा है, जहां उन्हें कीमत चुकानी पड़ रही है।
मेडिकल कॉलेज अल्ट्रासाउंड की सुविधा है, मगर रेडियोलाॅजिस्ट की कमी का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। यहां पुरुष अस्पताल के लिए मात्र एक रेडियोलाॅजिस्ट की तैनाती है। उनके अवकाश पर जाने से मरीजों को दिक्कत होती है। अस्पताल में शहर से लेकर ग्रामीणांचल के अलावा बिहार के सीमावर्ती इलाके के मरीज आते हैं। मेडिसिन, सर्जरी, बाल रोग विभाग सहित विभिन्न ओपीडी में आने वाले मरीजों को जरूरत पड़ने पर डॉक्टर अल्ट्रासाउंड जांच लिखते हैं।
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ओपीडी से रोजाना 70 से 75 मरीज जांच के लिए पहुंचते हैं। इसके अलावा वार्ड में भर्ती मरीजों की भी जांच हाेती है। यहां हर ओपीडी के पहले नंबर लगाए 15 से 20 मरीजों के अलावा इमरजेंसी व वार्ड के मरीजों की ही जांच हो पाती है। ओपीडी के अन्य मरीजों को लौटना पड़ता है। उन्हें जांच के लिए अगले दिन फिर आना पड़ता है। शुक्रवार को रेडियोलाॅजिस्ट के न्यायालय कार्य से जाने की वजह से जांच ठप रही।
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रुद्रपुर क्षेत्र के रामकेवल, बैतालपुर क्षेत्र के राजीव कुमार, भलुअनी के जितेंद्र ने बताया कि डॉक्टर के लिखने पर जांच के लिए पहुंचा तो जांच न होने की जानकारी दी गई। जांच हो गई होती तो डॉक्टर को रिपोर्ट दिखा दिया होता। अब जांच के लिए फिर आना पड़ेगा। आने-जाने में परेशानी होती है। समय के साथ धन भी खर्च होता है।
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एक रेडियोलाॅजिस्ट पर कई है जिम्मेदारी
मेडिकल कॉलेज के पुरुष अस्पताल में मात्र एक रेडियोलाॅजिस्ट की तैनाती है। वह अल्ट्रासाउंड करते हैं। इसके अलावा उन पर रोजाना करीब 15 से 20 पुलिस मेडिकोलीगल, सीटी स्कैन रिपोर्ट के काउंटर साइन की जिम्मेदारी है। साथ ही, न्यायालय कार्य से गैर जिले में जाना पड़ता है। एक दिन न्यायालय कार्य से जाने के बाद अगले दिन उन पर कार्य का दबाव बढ़ जाता है। दोनों दिन का कार्य निपटाना पड़ता है।
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मेडिकल कॉलेज में रेडियोलाॅजिस्ट की कमी है। पुरुष अस्पताल में एक रेडियोलाॅजिस्ट हैं। उनके न्यायालय कार्य से जाने के कारण दिक्कत होती है। उरेडियोलाॅजिस्ट की तैनाती के लिए शासन से मांग की गई है।
-डॉ. एचके मिश्रा, सीएमएस