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Deoria News: मेडिकल कॉलेज में ठप रही अल्ट्रासाउंड जांच
Wed, 04 Jun 2025 12:17 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Wed, 04 Jun 2025 12:17 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मेडिकल कॉलेज में अल्ट्रासाउंड जांच मंगलवार को ठप रही। इससे मरीजों को दिक्कत हुई। दूरदराज से आए मरीजों को लौटना पड़ा। कुछ लोगों को मजबूरी में निजी सेंटर पर जांच करानी पड़ी। यह समस्या रेडियोलाॅजिस्ट के न्यायालय कार्य से जाने के कारण आई।
मेडिकल कॉलेज में पुरुष और महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा है, मगर रेडियोलाॅजिस्ट की कमी है। अस्पताल में मात्र दो रेडियोलाॅजिस्ट हैं। इसमें एक पुरुष व महिला अस्पताल में तैनात हैं। किसी एक के न रहने से परेशानी होती है। पुरुष अस्पताल के अल्ट्रासाउंड जांच केंद्र पर ओपीडी के विभिन्न विभागों से डॉक्टर जरूरत पड़ने पर जांच के लिए भेजते हैं।
डॉक्टर रोजाना करीब 60 से 70 मरीजों को जांच लिखते हैं। इसके अलावा वार्ड के मरीजों की भी जांच होती है। मंगलवार को शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के मरीज जांच के लिए आए थे। रेडियोलॉजिस्ट के न होने की जानकारी मिलते ही उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा।
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जांच न होने से रिपोर्ट डॉक्टर को नहीं दिखाने से उनका समुचित इलाज नहीं हो पाया। जरूरी होने पर कुछ लोगों को निजी सेंटरों का सहारा लेना पड़ा, जहां उन्हें 600 से 800 रुपये कीमत चुकानी पड़ी। इससे उन पर आर्थिक बोझ पड़ा।
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देवरिया। मेडिकल कॉलेज में अल्ट्रासाउंड जांच मंगलवार को ठप रही। इससे मरीजों को दिक्कत हुई। दूरदराज से आए मरीजों को लौटना पड़ा। कुछ लोगों को मजबूरी में निजी सेंटर पर जांच करानी पड़ी। यह समस्या रेडियोलाॅजिस्ट के न्यायालय कार्य से जाने के कारण आई।
मेडिकल कॉलेज में पुरुष और महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा है, मगर रेडियोलाॅजिस्ट की कमी है। अस्पताल में मात्र दो रेडियोलाॅजिस्ट हैं। इसमें एक पुरुष व महिला अस्पताल में तैनात हैं। किसी एक के न रहने से परेशानी होती है। पुरुष अस्पताल के अल्ट्रासाउंड जांच केंद्र पर ओपीडी के विभिन्न विभागों से डॉक्टर जरूरत पड़ने पर जांच के लिए भेजते हैं।
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डॉक्टर रोजाना करीब 60 से 70 मरीजों को जांच लिखते हैं। इसके अलावा वार्ड के मरीजों की भी जांच होती है। मंगलवार को शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के मरीज जांच के लिए आए थे। रेडियोलॉजिस्ट के न होने की जानकारी मिलते ही उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा।
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जांच न होने से रिपोर्ट डॉक्टर को नहीं दिखाने से उनका समुचित इलाज नहीं हो पाया। जरूरी होने पर कुछ लोगों को निजी सेंटरों का सहारा लेना पड़ा, जहां उन्हें 600 से 800 रुपये कीमत चुकानी पड़ी। इससे उन पर आर्थिक बोझ पड़ा।