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Deoria News: यहां भी मंदिरों और शवदाह गृहों पर ट्रैैक्टर-ट्राॅली से पहुंचते हैं श्रद्धालु
Sun, 25 Feb 2024 11:58 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sun, 25 Feb 2024 11:58 PM IST
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बरहज राम जानकी मार्ग से ट्रैक्टर ट्राली से जाते लोग।संवाद
कासगंज में ट्रैक्टर-ट्राॅली पलटने की घटना के बाद भी नहीं चेत रहे जिम्मेदार
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। इसे जिम्मेदारों की लापरवाही कहें, चालकों की मनमानी या ग्रामीणों की नासमझी। जिले में भी मंदिरों में, शवदाह गृहों में पहुंचने के लिए धड़ल्ले से ट्रैक्टर-ट्राॅली का उपयोग किया जा रहा है।
मकान का लेंटर लगवाने के लिए मजदूरों को भी ठेकेदार इसी से ले जाते और लाते हैं।
कासगंज में शनिवार को माघ पूर्णिमा पर बच्चे का मुंडन संस्कार कराने जा रहे लोगों की टैक्टर-ट्राॅली की बेयरिंग टूटने से तालाब में पलटने से आठ बच्चों समेत 23 लोगों की मौत ने पूरे प्रदेश को ऐसे वाहनों के प्रति सोचने पर विवश कर दिया है। जिले में सुबह में या रात में सड़क पर निकल जाए ट्रैक्टर-ट्राॅली, ईंट-मिट्टी, गिट्टी, बालू आदि लेकर दौड़ते नजर आ जाएंगे।
इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में लोग गोरखपुर जनपद के तरकुलहा देवी स्थान सहित अन्य मंदिरों में समूह में जाने के लिए इन वाहनों का प्रयोग करते हैं। इसके अलावा भागलपुर, बरहज, कपरवार घाट, पैना, महुआपाटन आदि जगहों पर शवदाह करने के लिए भी लोग इन वाहनों का प्रयोग करते हैं।
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शादी समारोह में परछावन व द्वारपूजा के दौरान ऑर्केस्ट्रा पार्टी को अक्सर इन्हीं वाहनों में सवार कर भेज दिया जाता है। ऐसे में कभी भी हादसा होने की आशंका बरकरार रहती है। इन वाहनों की जांच करने में जिम्मेदार भी लापरवाही बरतते हैं। ऐसे में यह लापरवाही जिले में भी कभी कासगंज जैसी घटना करा सकती है।
परिवहन विभाग में दर्ज हैं 3236 ट्रैक्टर-ट्राॅली
वर्तमान में जनवरी माह तक 3236 ट्रैक्टर-ट्राॅली विभागीय आंकड़ों में दर्ज है। इनमें से अधिकांश का पंजीकरण कृषि कार्य के लिए हुआ है। हालांकि, जिले में इन वाहनों का व्यावसायिक उपयोग भी खूब हो रहा है। लोग कृषि कार्य के नाम पर पंजीकृत ट्रैक्टर-ट्रॉली का व्यावसायिक प्रयोग कर रहे हैं। राजस्व को भी क्षति पहुंचा रहे हैं।
ट्राॅली के साथ ट्रैक्टर का व्यावसायिक पंजीकरण होने पर उन्हें भी ट्रक के हिसाब से टैक्स देना होता है। प्रति तीन माह पर प्रति टन 230 रुपये, लेकिन टैक्स बचाने के चक्कर में लोग कृषि कार्य के लिए पंजीकृत कराने के बाद ट्रैक्टर का व्यावसायिक उपयोग शुरू कर देते हैं।
सड़क सुरक्षा अभियान को लगा रहे पलीता
कृषि कार्य के नाम पर वाहन मालिक को टैक्स व फिटनेस के नाम पर एक पैसा नहीं देना पड़ता, ऊपर से कमाई बढ़ जाती है। यही नहीं, खेतों में चलने वाले अनफिट ट्रैक्टर-ट्राॅलियां सड़कों पर फर्राटा भर सड़क सुरक्षा अभियान को मुंह चिढ़ाते हैं। यह स्थिति तब है जब सरकार मार्ग दुर्घटनाओं को लेकर अधिक सतर्क और गंभीर है।
ट्रैक्टर-ट्राॅली पर सवारी बैठाकर ले जाना नियम के विपरीत है। अभियान चलाकर ऐसे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। मौके पर इनके संकेतक, रिफ्लेक्टर, चालक का डीएल, फिटनेस, इंश्योरेंस की जांच की जाती है। कमी पाए जाने पर इन पर जुर्माना लगाया जाता है। कासगंज की घटना के बाद ऐसे वाहनों की जांच में तेजी लाई जाएगी। ऐसे वाहनों का पंजीकरण कृषि कार्य व व्यावसायिक उपयोग दोनों के लिए होता है। हालांकि, जिले में कृषि कार्य वाले ही वाहन ज्यादा पंजीकृत हैं।
-आशुतोष शुक्ला, एआरटीओ
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। इसे जिम्मेदारों की लापरवाही कहें, चालकों की मनमानी या ग्रामीणों की नासमझी। जिले में भी मंदिरों में, शवदाह गृहों में पहुंचने के लिए धड़ल्ले से ट्रैक्टर-ट्राॅली का उपयोग किया जा रहा है।
मकान का लेंटर लगवाने के लिए मजदूरों को भी ठेकेदार इसी से ले जाते और लाते हैं।
कासगंज में शनिवार को माघ पूर्णिमा पर बच्चे का मुंडन संस्कार कराने जा रहे लोगों की टैक्टर-ट्राॅली की बेयरिंग टूटने से तालाब में पलटने से आठ बच्चों समेत 23 लोगों की मौत ने पूरे प्रदेश को ऐसे वाहनों के प्रति सोचने पर विवश कर दिया है। जिले में सुबह में या रात में सड़क पर निकल जाए ट्रैक्टर-ट्राॅली, ईंट-मिट्टी, गिट्टी, बालू आदि लेकर दौड़ते नजर आ जाएंगे।
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इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में लोग गोरखपुर जनपद के तरकुलहा देवी स्थान सहित अन्य मंदिरों में समूह में जाने के लिए इन वाहनों का प्रयोग करते हैं। इसके अलावा भागलपुर, बरहज, कपरवार घाट, पैना, महुआपाटन आदि जगहों पर शवदाह करने के लिए भी लोग इन वाहनों का प्रयोग करते हैं।
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शादी समारोह में परछावन व द्वारपूजा के दौरान ऑर्केस्ट्रा पार्टी को अक्सर इन्हीं वाहनों में सवार कर भेज दिया जाता है। ऐसे में कभी भी हादसा होने की आशंका बरकरार रहती है। इन वाहनों की जांच करने में जिम्मेदार भी लापरवाही बरतते हैं। ऐसे में यह लापरवाही जिले में भी कभी कासगंज जैसी घटना करा सकती है।
परिवहन विभाग में दर्ज हैं 3236 ट्रैक्टर-ट्राॅली
वर्तमान में जनवरी माह तक 3236 ट्रैक्टर-ट्राॅली विभागीय आंकड़ों में दर्ज है। इनमें से अधिकांश का पंजीकरण कृषि कार्य के लिए हुआ है। हालांकि, जिले में इन वाहनों का व्यावसायिक उपयोग भी खूब हो रहा है। लोग कृषि कार्य के नाम पर पंजीकृत ट्रैक्टर-ट्रॉली का व्यावसायिक प्रयोग कर रहे हैं। राजस्व को भी क्षति पहुंचा रहे हैं।
ट्राॅली के साथ ट्रैक्टर का व्यावसायिक पंजीकरण होने पर उन्हें भी ट्रक के हिसाब से टैक्स देना होता है। प्रति तीन माह पर प्रति टन 230 रुपये, लेकिन टैक्स बचाने के चक्कर में लोग कृषि कार्य के लिए पंजीकृत कराने के बाद ट्रैक्टर का व्यावसायिक उपयोग शुरू कर देते हैं।
सड़क सुरक्षा अभियान को लगा रहे पलीता
कृषि कार्य के नाम पर वाहन मालिक को टैक्स व फिटनेस के नाम पर एक पैसा नहीं देना पड़ता, ऊपर से कमाई बढ़ जाती है। यही नहीं, खेतों में चलने वाले अनफिट ट्रैक्टर-ट्राॅलियां सड़कों पर फर्राटा भर सड़क सुरक्षा अभियान को मुंह चिढ़ाते हैं। यह स्थिति तब है जब सरकार मार्ग दुर्घटनाओं को लेकर अधिक सतर्क और गंभीर है।
ट्रैक्टर-ट्राॅली पर सवारी बैठाकर ले जाना नियम के विपरीत है। अभियान चलाकर ऐसे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। मौके पर इनके संकेतक, रिफ्लेक्टर, चालक का डीएल, फिटनेस, इंश्योरेंस की जांच की जाती है। कमी पाए जाने पर इन पर जुर्माना लगाया जाता है। कासगंज की घटना के बाद ऐसे वाहनों की जांच में तेजी लाई जाएगी। ऐसे वाहनों का पंजीकरण कृषि कार्य व व्यावसायिक उपयोग दोनों के लिए होता है। हालांकि, जिले में कृषि कार्य वाले ही वाहन ज्यादा पंजीकृत हैं।
-आशुतोष शुक्ला, एआरटीओ