{"_id":"64515f10e2d5c608820eedb4","slug":"there-are-280-villages-like-this-where-the-map-is-not-found-deoria-news-c-7-1-gkp1010-149603-2023-05-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Deoria News: ऐसे हैं 280 गांव, जहां का नक्शा ढूंढे नहीं मिल रहा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Deoria News: ऐसे हैं 280 गांव, जहां का नक्शा ढूंढे नहीं मिल रहा
विज्ञापन
जिले के राजस्व अभिलेखागार से मानचित्र रखरखाव के अभाव में फटकर हो गए नष्ट, गांवों में भूमि विवाद के बढ़ रहे मामले
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। जिले के राजस्व अभिलेखागार से 280 गांवों के मानचित्र रख-रखाव के अभाव में फट कर नष्ट हो गए हैं, जबकि 35 गांवों के नक्शे गायब हो गए हैं। इसके चलते गांवों में भूमि विवाद के मामले बढ़ रहे हैं। वहीं इन गांवों का डिजिटिलाइजेशन का कार्य भी नहीं हो पा रहा है। नक्शा के लिए पहुंचने वाले लोगों को निराश लौटना पड़ रहा है।
जिले के 2178 ग्रामों में 2258 भू नक्शे हैं। शासन ने भू-नक्शों को डिजिटिलाइजेशन करने का कार्य चार साल पहले शुरू किया था, जो जनपद में अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। 1898 गांवों के 1965 भू नक्शे राजस्व अभिलेखागार में उपलब्ध हैं, जिनका डिजिटिलाइजेशन किया जा चुका है। तहसील के माध्यम से 1570 का आरओआर लिंकिंग का सत्यापन भी हो चुका है। दो गांव चकबंदी सर्वे की प्रक्रिया में हैं तो 11 गांवों में चकबंदी का कार्य किया जा रहा है। इसमें आठ गांव गैर आबाद हैं। रुद्रपुर तहसील के 136 गांवों का सत्यापन किया जाना बाकी है, जबकि भाटपाररानी के 238 और बरहज के 239 गांव हैं। विभागीय सूत्रों की बातों पर गौर किया जाए तो डिजिटिलाइजेशन के दौरान नक्शा स्पष्ट न होने के कारण काफी दिक्कत आ रही है। कई गांवों में सड़क, आबादी की भूमि से गायब है तो कहीं गाटा संख्या की जानकारी नहीं मिल पा रही है। 293 गांवों के मानचित्र गंदे हैं तो कुछ को दीमक चाट चुके हैं, जिससे काम प्रभावित हो रहे हैं। 35 गांव का नक्शा ढूंढे नहीं मिल पा रहा है। इससे ग्रामीण परेशान हैं।
-- -- -- -
दर्ज हो चुका है मुकदमा
काफी समय पहले अभिलेखागार में बाहरी लोगों का दखल होने के कारण विभागीय मिलीभगत से कुछ नक्शे गायब हो गए हैं। इसके पीछे बड़ा खेल बताया जा रहा है। जिसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। उन्हें अपने गांव की भूमि का सत्यापन कराने में दिक्कतें आ रही हैं। इस मामले में करीब दो साल पहले कुछ कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हुआ था, लेकिन नक्शा ढूंढने में पुलिस असफल रही और विवेचना के दौरान पुलिस ने कुछ आरोपियों के नाम भी निकाल दिए।
विज्ञापन
-- -- -- --
रूड़की से नक्शा आने की आस में ग्रामीण
जनपद के अभिलेखागार से गायब नक्शा और नष्ट हुए नक्शे की शिकायत आला अफसरों ने राजस्व परिषद से की थी, लेकिन एक साल का समय बीत जाने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ है। अब एक बार फिर से राजस्व विभाग रूड़की से नक्शा मंगवाने के प्रयास में जुट गया है। अब देेखना है कि आने वाले समय में प्रशासन का यह प्रयास कितना कारगर हो रहा है।
-- -- -- -
कोट
- जिन गांवों के नक्शे गायब हैं, वहां का डिजिटिलाइजेशन कराने का प्रयास किया जा रहा है। राजस्व परिषद को पत्राचार किया गया है। रुड़की आईआईटी से नक्शा मंगवाया जाएगा।
रजनीश राय, मुख्य राजस्व अधिकारी
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। जिले के राजस्व अभिलेखागार से 280 गांवों के मानचित्र रख-रखाव के अभाव में फट कर नष्ट हो गए हैं, जबकि 35 गांवों के नक्शे गायब हो गए हैं। इसके चलते गांवों में भूमि विवाद के मामले बढ़ रहे हैं। वहीं इन गांवों का डिजिटिलाइजेशन का कार्य भी नहीं हो पा रहा है। नक्शा के लिए पहुंचने वाले लोगों को निराश लौटना पड़ रहा है।
जिले के 2178 ग्रामों में 2258 भू नक्शे हैं। शासन ने भू-नक्शों को डिजिटिलाइजेशन करने का कार्य चार साल पहले शुरू किया था, जो जनपद में अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। 1898 गांवों के 1965 भू नक्शे राजस्व अभिलेखागार में उपलब्ध हैं, जिनका डिजिटिलाइजेशन किया जा चुका है। तहसील के माध्यम से 1570 का आरओआर लिंकिंग का सत्यापन भी हो चुका है। दो गांव चकबंदी सर्वे की प्रक्रिया में हैं तो 11 गांवों में चकबंदी का कार्य किया जा रहा है। इसमें आठ गांव गैर आबाद हैं। रुद्रपुर तहसील के 136 गांवों का सत्यापन किया जाना बाकी है, जबकि भाटपाररानी के 238 और बरहज के 239 गांव हैं। विभागीय सूत्रों की बातों पर गौर किया जाए तो डिजिटिलाइजेशन के दौरान नक्शा स्पष्ट न होने के कारण काफी दिक्कत आ रही है। कई गांवों में सड़क, आबादी की भूमि से गायब है तो कहीं गाटा संख्या की जानकारी नहीं मिल पा रही है। 293 गांवों के मानचित्र गंदे हैं तो कुछ को दीमक चाट चुके हैं, जिससे काम प्रभावित हो रहे हैं। 35 गांव का नक्शा ढूंढे नहीं मिल पा रहा है। इससे ग्रामीण परेशान हैं।
विज्ञापन
दर्ज हो चुका है मुकदमा
काफी समय पहले अभिलेखागार में बाहरी लोगों का दखल होने के कारण विभागीय मिलीभगत से कुछ नक्शे गायब हो गए हैं। इसके पीछे बड़ा खेल बताया जा रहा है। जिसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। उन्हें अपने गांव की भूमि का सत्यापन कराने में दिक्कतें आ रही हैं। इस मामले में करीब दो साल पहले कुछ कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हुआ था, लेकिन नक्शा ढूंढने में पुलिस असफल रही और विवेचना के दौरान पुलिस ने कुछ आरोपियों के नाम भी निकाल दिए।
विज्ञापन
रूड़की से नक्शा आने की आस में ग्रामीण
जनपद के अभिलेखागार से गायब नक्शा और नष्ट हुए नक्शे की शिकायत आला अफसरों ने राजस्व परिषद से की थी, लेकिन एक साल का समय बीत जाने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ है। अब एक बार फिर से राजस्व विभाग रूड़की से नक्शा मंगवाने के प्रयास में जुट गया है। अब देेखना है कि आने वाले समय में प्रशासन का यह प्रयास कितना कारगर हो रहा है।
कोट
- जिन गांवों के नक्शे गायब हैं, वहां का डिजिटिलाइजेशन कराने का प्रयास किया जा रहा है। राजस्व परिषद को पत्राचार किया गया है। रुड़की आईआईटी से नक्शा मंगवाया जाएगा।
रजनीश राय, मुख्य राजस्व अधिकारी