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Deoria News: निजी स्कूलों की भारी फीस अभिभावकों पर पड़ रही भारी
Mon, 06 Apr 2026 12:45 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Mon, 06 Apr 2026 12:45 AM IST
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देवरिया। नए शिक्षा सत्र की शुरुआत के साथ ही अभिभावकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। निजी स्कूलों की फीस अभिभावकों पर भारी पड़ रही है। स्कूलों में दाखिले के नाम पर 30 से 50 हजार रुपये तक की वसूली की जा रही है। इससे अभिभावक खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं।
जिले के प्रतिष्ठित निजी स्कूलों में प्रवेश शुल्क आसमान छू रहे हैं। प्रति बच्चा 30 हजार से लेकर 50 हजार रुपये तक सिर्फ दाखिले के समय लिए जा रहे हैं। इसमें तीन महीने की फीस शामिल है। अभिभावकों का कहना है कि यह फीस अलग-अलग मदों में जोड़कर ली जा रही है, जिससे शिक्षा अब आम आदमी की पहुंच से दूर होती जा रही है। इसके अलावा कुछ स्कूलों द्वारा कापी, पुस्तकें और यूनिफॉर्म चुनिंदा दुकानों से खरीदने को भी कहा जा रहा है। इन्हें खरीदने में अभिभावकों के पसीने छूट रहे हैं।
हालांकि, कई स्कूलों ने पुस्तकें और स्कूल ड्रेस कहीं से भी खरीदने की छूट दे रखी है। सब मिलाकर अभिभावकों पर हर साल एक बच्चे पर 40 से 60 हजार रुपये तक का बोझ पड़ जाता है। इससे अभिभावक बेहद दुखी हैं। उमानगर के विजय प्रकाश ने बताया कि उनके नाती का प्रवेश एक निजी विद्यालय में कराया है। कक्षा एक में बच्चे के प्रवेश के समय 43700 रुपये ले लिए गए।
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यहां पुराने बच्चे के प्रवेश के लिए 36700 रुपये लिए जा रहे थे। इसके अलावा किट के 5,130 रुपये ले लिए गए। उन्होंने बताया कि अगर कक्षा एक में इतनी फीस है तो बच्चा बड़ा होगा तो हम कहां से फीस भर पाएंगे।
शहर के उमानगर निवासी अमित सिंह ने बताया दो बच्चों का निजी स्कूल में दाखिला कराना अब बजट से बाहर हो गया है। आय का बड़ा हिस्सा सिर्फ फीस भरने में जा रहा है। उन्होंने बताया कि नवीं कक्षा में एडमिशन के लिए 61,900 रुपये फीस लिया जा रहा है। पुराने छात्रों को थोड़ी राहत स्कूल ने दिया है। उनसे 56400 रुपये लिए जा रहे हैं। अमित ने शासन-प्रशासन से स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने की अपील की है।
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जिले के प्रतिष्ठित निजी स्कूलों में प्रवेश शुल्क आसमान छू रहे हैं। प्रति बच्चा 30 हजार से लेकर 50 हजार रुपये तक सिर्फ दाखिले के समय लिए जा रहे हैं। इसमें तीन महीने की फीस शामिल है। अभिभावकों का कहना है कि यह फीस अलग-अलग मदों में जोड़कर ली जा रही है, जिससे शिक्षा अब आम आदमी की पहुंच से दूर होती जा रही है। इसके अलावा कुछ स्कूलों द्वारा कापी, पुस्तकें और यूनिफॉर्म चुनिंदा दुकानों से खरीदने को भी कहा जा रहा है। इन्हें खरीदने में अभिभावकों के पसीने छूट रहे हैं।
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हालांकि, कई स्कूलों ने पुस्तकें और स्कूल ड्रेस कहीं से भी खरीदने की छूट दे रखी है। सब मिलाकर अभिभावकों पर हर साल एक बच्चे पर 40 से 60 हजार रुपये तक का बोझ पड़ जाता है। इससे अभिभावक बेहद दुखी हैं। उमानगर के विजय प्रकाश ने बताया कि उनके नाती का प्रवेश एक निजी विद्यालय में कराया है। कक्षा एक में बच्चे के प्रवेश के समय 43700 रुपये ले लिए गए।
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यहां पुराने बच्चे के प्रवेश के लिए 36700 रुपये लिए जा रहे थे। इसके अलावा किट के 5,130 रुपये ले लिए गए। उन्होंने बताया कि अगर कक्षा एक में इतनी फीस है तो बच्चा बड़ा होगा तो हम कहां से फीस भर पाएंगे।
शहर के उमानगर निवासी अमित सिंह ने बताया दो बच्चों का निजी स्कूल में दाखिला कराना अब बजट से बाहर हो गया है। आय का बड़ा हिस्सा सिर्फ फीस भरने में जा रहा है। उन्होंने बताया कि नवीं कक्षा में एडमिशन के लिए 61,900 रुपये फीस लिया जा रहा है। पुराने छात्रों को थोड़ी राहत स्कूल ने दिया है। उनसे 56400 रुपये लिए जा रहे हैं। अमित ने शासन-प्रशासन से स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने की अपील की है।