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फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे नौकरी कर रहे संदिग्ध शिक्षकों का मांगा व्योरा
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फिर बीएसए आफिस पहुंची एसटीएफ
वर्ष 1990 के बाद की नियुक्तियों का मांगा रिकार्ड
बीएसए से मिलकर एक सप्ताह के अंदर संपूर्ण विवरण देने का सौंपा पत्र
मंगलवार को भी नहीं खुला वेरीफिकेशन एवं नियुक्ति पटल कक्ष का ताला
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे नौकरी कर रहे शिक्षकों की कुंडली खंगाल रही एसटीएफ टीम मंगलवार को फिर बीएसए कार्यालय पहुंची। वर्ष 1990 से अब तक हुई भर्तियों से संबंधित सभी अभिलेख और उससे जुड़े पटल प्रभारियों का ब्योरा एक सप्ताह में उपलब्ध कराने का पत्र बीएसए को सौंपा। टीम करीब 20 मिनट तक कार्यालय में रही। बीएसए से चर्चा के बाद लौट गई। इस दौरान उन्होंने पहले चरण में चिह्नित 44 संदिग्ध शिक्षकों से जुड़े कागजात मांगे, लेकिन नियुक्ति व वेरीफिकेशन पटल के दोनों बाबुओं के मंगलवार को भी अवकाश पर रहने से टीम खाली हाथ लौट गई।
एसटीएफ को देवरिया में 700 से अधिक शिक्षकों के प्रमाण पत्रों पर संदेह है। यह नियुक्तियां वर्ष 1990 से लेकर अब तक की हैं। इसमें वर्ष 2010 के बाद हुई नियुक्तियों पर सबसे अधिक गड़बड़ी का अंदेशा जताया जा रहा है। इस मामले में एसटीएफ के चंगुल में आए दोनों सरगना ने पूछताछ में कार्यालय के दो बाबुओं का भी नाम बताया है। यह वही बाबू हैं, जिनके पास नियुक्ति व वेरीफिकेशन पटल का चार्ज रहा है। कार्यालय के सबसे चर्चित बाबू अपना नाम सामने आने के बाद से ही लगातार अवकाश पर हैं। लिहाजा एसटीएफ को रिकॉर्ड पाने में परेशानी हो रही है। मंगलवार को फिर से बीएसए कार्यालय पहुंची एसटीएफ ने 44 शिक्षकों से जुड़े रिकार्ड के बारे में पूछा तो बाबुओं के अवकाश पर होने का हवाला दिया गया। कुछ देर रुकने के बाद टीम ने बीएसए को वर्ष 1990 के बाद से अब तक हुई भर्तियों से संबंधित सभी पत्रावलियां व पटल प्रभारियों का ब्योरा एक सप्ताह में उपलब्ध कराने को कहा। इस बाबत बीएसए ओमप्रकाश यादव ने बताया कि एसटीएफ टीम मंगलवार को आई थी। जांच एजेंसी ने जो भी ब्योरा मांगा है, उसे उपलब्ध कराया जाएगा।
बीएसए ने ब्लॉकों से मांगा संदिग्ध शिक्षकों का ब्योरा
देवरिया। नियुक्ति व वेरीफिकेशन पटल से जुड़े दोनों चर्चित बाबुओं के अचानक अवकाश पर जाने से 44 शिक्षकों के रिकॉर्ड मिलने में हो रही देरी के मद्देनजर बीएसए ने सभी बीईओ पत्र जारी किया है। इनसे संबंधित शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों का ब्योरा फोटो सहित दो प्रतियों में तत्काल उपलब्ध कराने को कहा है। फिलहाल 34 शिक्षकों की जानकारी मांगी गई है। दस अन्य शिक्षक वह हैं, जिन्होंने फर्जी नियुक्ति कराने में अहम रोल निभाया है। चिह्नित 34 शिक्षकों में सर्वाधिक सात शिक्षक रुद्रपुर ब्लॉक में तैनात हैं। इनके अलावा सलेमपुर में छह, देवरिया में पांच, रामपुर कारखाना में छह, भलुअनी में तीन, भागलपुर में तीन, गौरीबाजार व बैतालपुर ब्लॉक में दो-दो शिक्षक तैनात हैं। भलुअनी ब्लॉक के जिन शिक्षकों का रिकॉर्ड मांगा गया है, उनमें प्राथमिक विद्यालय शेरवा बभनौली में तैनात सहायक अध्यापक संतोष यादव, प्राथमिक विद्यालय होवड़ा के प्रभुनाथ चौधरी, पूर्व माध्यमिक विद्यालय पुरुषोतिया के सहायक अध्यापक अखिलेश कुमार, गौरीबाजार क्षेत्र के जूनियर विद्यालय मदैना के राजकुमार, सेखुई की बसुंधरा, अशोक यादव तथा देसही देवरिया के भरथापट्टी में तैनात जाहिदा खातून शामिल हैं। इनके समस्त शैक्षिक प्रमाण पत्र, निवास, पहचान पत्र व इनके मोबाइल नंबर सहित अन्य दस्तावेज दो प्रतियों में जांच के लिए अविलंब उपलब्ध कराने को कहा गया है। विभागीय लोगों की मानें तो यह सभी शिक्षक वर्तमान में अपने स्कूलों पर आ रहे हैं।
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रविवार को देवरिया में दिखे पूर्व बीएसए
वर्ष 2014 से 2016 तक जिले में नियुक्त रहे एक चर्चित बीएसए को विभाग से जुड़े कई लोगों ने बीते रविवार को शहर में देखा। उनके देवरिया आने को लोग इस मुद्दे से भी जोड़कर देख रहे हैं। चर्चा है कि अधिकांश फर्जी नियुक्तियां उन्हीं के समय में हुई हैं। लिहाजा एसटीएफ के शिकंजा कसने पर उनकी बेचैनी बढ़ी है। अपने कार्यकाल के चहेते कर्मचारियों से यहां आकर गोपनीय ढंग से मुलाकात की। विभागीय लोगों के मुताबिक इन्हीं बीएसए के बाद आए नए बीएसए रामकरन यादव ने जिले में फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे नौकरी पाए संदिग्ध शिक्षकों की जांच कराई तो हड़कंप मच गया था। शासन में ऊंची पहुंच होने के कारण जालसाजों ने महज 25 दिन में ही उनका तबादला करा दिया।
जांच में लगेगा वक्त
एसटीएफ गोरखपुर के प्रभारी सत्यप्रकाश सिंह मंगलवार को टीम के कुछ सदस्य बीएसए कार्यालय गए थे। उन्होंने बीएसए को नियुक्ति से जुड़ी सारी प्रक्रिया से संबंधित कागजात व अन्य सारे अभिलेख देने का मांगपत्र सौंपा गया। इसमें वर्ष 2014 से हुई नियुक्तियों के अलावा वर्ष 1990 के बाद हुई कुछ नियुक्तियां का पूरा डाटा एक सप्ताह के अंदर उपलब्ध कराने को कहा गया है। संदिग्ध मिले शिक्षकों से संबंधित मामला होने के चलते जांच में छह माह से अधिक का समय लग सकता है।
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वर्ष 1990 के बाद की नियुक्तियों का मांगा रिकार्ड
बीएसए से मिलकर एक सप्ताह के अंदर संपूर्ण विवरण देने का सौंपा पत्र
मंगलवार को भी नहीं खुला वेरीफिकेशन एवं नियुक्ति पटल कक्ष का ताला
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे नौकरी कर रहे शिक्षकों की कुंडली खंगाल रही एसटीएफ टीम मंगलवार को फिर बीएसए कार्यालय पहुंची। वर्ष 1990 से अब तक हुई भर्तियों से संबंधित सभी अभिलेख और उससे जुड़े पटल प्रभारियों का ब्योरा एक सप्ताह में उपलब्ध कराने का पत्र बीएसए को सौंपा। टीम करीब 20 मिनट तक कार्यालय में रही। बीएसए से चर्चा के बाद लौट गई। इस दौरान उन्होंने पहले चरण में चिह्नित 44 संदिग्ध शिक्षकों से जुड़े कागजात मांगे, लेकिन नियुक्ति व वेरीफिकेशन पटल के दोनों बाबुओं के मंगलवार को भी अवकाश पर रहने से टीम खाली हाथ लौट गई।
एसटीएफ को देवरिया में 700 से अधिक शिक्षकों के प्रमाण पत्रों पर संदेह है। यह नियुक्तियां वर्ष 1990 से लेकर अब तक की हैं। इसमें वर्ष 2010 के बाद हुई नियुक्तियों पर सबसे अधिक गड़बड़ी का अंदेशा जताया जा रहा है। इस मामले में एसटीएफ के चंगुल में आए दोनों सरगना ने पूछताछ में कार्यालय के दो बाबुओं का भी नाम बताया है। यह वही बाबू हैं, जिनके पास नियुक्ति व वेरीफिकेशन पटल का चार्ज रहा है। कार्यालय के सबसे चर्चित बाबू अपना नाम सामने आने के बाद से ही लगातार अवकाश पर हैं। लिहाजा एसटीएफ को रिकॉर्ड पाने में परेशानी हो रही है। मंगलवार को फिर से बीएसए कार्यालय पहुंची एसटीएफ ने 44 शिक्षकों से जुड़े रिकार्ड के बारे में पूछा तो बाबुओं के अवकाश पर होने का हवाला दिया गया। कुछ देर रुकने के बाद टीम ने बीएसए को वर्ष 1990 के बाद से अब तक हुई भर्तियों से संबंधित सभी पत्रावलियां व पटल प्रभारियों का ब्योरा एक सप्ताह में उपलब्ध कराने को कहा। इस बाबत बीएसए ओमप्रकाश यादव ने बताया कि एसटीएफ टीम मंगलवार को आई थी। जांच एजेंसी ने जो भी ब्योरा मांगा है, उसे उपलब्ध कराया जाएगा।
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बीएसए ने ब्लॉकों से मांगा संदिग्ध शिक्षकों का ब्योरा
देवरिया। नियुक्ति व वेरीफिकेशन पटल से जुड़े दोनों चर्चित बाबुओं के अचानक अवकाश पर जाने से 44 शिक्षकों के रिकॉर्ड मिलने में हो रही देरी के मद्देनजर बीएसए ने सभी बीईओ पत्र जारी किया है। इनसे संबंधित शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों का ब्योरा फोटो सहित दो प्रतियों में तत्काल उपलब्ध कराने को कहा है। फिलहाल 34 शिक्षकों की जानकारी मांगी गई है। दस अन्य शिक्षक वह हैं, जिन्होंने फर्जी नियुक्ति कराने में अहम रोल निभाया है। चिह्नित 34 शिक्षकों में सर्वाधिक सात शिक्षक रुद्रपुर ब्लॉक में तैनात हैं। इनके अलावा सलेमपुर में छह, देवरिया में पांच, रामपुर कारखाना में छह, भलुअनी में तीन, भागलपुर में तीन, गौरीबाजार व बैतालपुर ब्लॉक में दो-दो शिक्षक तैनात हैं। भलुअनी ब्लॉक के जिन शिक्षकों का रिकॉर्ड मांगा गया है, उनमें प्राथमिक विद्यालय शेरवा बभनौली में तैनात सहायक अध्यापक संतोष यादव, प्राथमिक विद्यालय होवड़ा के प्रभुनाथ चौधरी, पूर्व माध्यमिक विद्यालय पुरुषोतिया के सहायक अध्यापक अखिलेश कुमार, गौरीबाजार क्षेत्र के जूनियर विद्यालय मदैना के राजकुमार, सेखुई की बसुंधरा, अशोक यादव तथा देसही देवरिया के भरथापट्टी में तैनात जाहिदा खातून शामिल हैं। इनके समस्त शैक्षिक प्रमाण पत्र, निवास, पहचान पत्र व इनके मोबाइल नंबर सहित अन्य दस्तावेज दो प्रतियों में जांच के लिए अविलंब उपलब्ध कराने को कहा गया है। विभागीय लोगों की मानें तो यह सभी शिक्षक वर्तमान में अपने स्कूलों पर आ रहे हैं।
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रविवार को देवरिया में दिखे पूर्व बीएसए
वर्ष 2014 से 2016 तक जिले में नियुक्त रहे एक चर्चित बीएसए को विभाग से जुड़े कई लोगों ने बीते रविवार को शहर में देखा। उनके देवरिया आने को लोग इस मुद्दे से भी जोड़कर देख रहे हैं। चर्चा है कि अधिकांश फर्जी नियुक्तियां उन्हीं के समय में हुई हैं। लिहाजा एसटीएफ के शिकंजा कसने पर उनकी बेचैनी बढ़ी है। अपने कार्यकाल के चहेते कर्मचारियों से यहां आकर गोपनीय ढंग से मुलाकात की। विभागीय लोगों के मुताबिक इन्हीं बीएसए के बाद आए नए बीएसए रामकरन यादव ने जिले में फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे नौकरी पाए संदिग्ध शिक्षकों की जांच कराई तो हड़कंप मच गया था। शासन में ऊंची पहुंच होने के कारण जालसाजों ने महज 25 दिन में ही उनका तबादला करा दिया।
जांच में लगेगा वक्त
एसटीएफ गोरखपुर के प्रभारी सत्यप्रकाश सिंह मंगलवार को टीम के कुछ सदस्य बीएसए कार्यालय गए थे। उन्होंने बीएसए को नियुक्ति से जुड़ी सारी प्रक्रिया से संबंधित कागजात व अन्य सारे अभिलेख देने का मांगपत्र सौंपा गया। इसमें वर्ष 2014 से हुई नियुक्तियों के अलावा वर्ष 1990 के बाद हुई कुछ नियुक्तियां का पूरा डाटा एक सप्ताह के अंदर उपलब्ध कराने को कहा गया है। संदिग्ध मिले शिक्षकों से संबंधित मामला होने के चलते जांच में छह माह से अधिक का समय लग सकता है।