तमाशबीन कई, सिर्फ एक ने समझी जिम्मेदारी
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उन सबकी रगों में भी आम इंसान वाला रक्त था, समझ भी आम लोगों जैसी थी। कमी थी तो समझदारी की या जिम्मेदारी के अहसास की। सड़क के किनारे जिस वक्त एक महिला बेसहारा स्थिति में छटपटा रही तो आसपास जुटे लोगों की प्रतिक्रिया कुछ ऐसी ही थी। करीब पहुंचकर यह तो जान गए कि वो गर्भवती है और उसे फौरन उपचार की जरूरत है लेकिन मदद की पहल की जगह उसके अतीत और भविष्य पर कसायबाजी में मशगूल रहे। समझ और इंसानी जज्बे की मिसाल बने हाटा गांव के रहने वाले श्रवण। टेंपो चालक श्रवण ने न सिर्फ सवारियों से खुद की कमाई का मोह पीछे छोड़ा बल्कि छटपटाती गर्भवती को बिना देरी टेंपो से लार सीएचसी पर पहुंचाया, जहां उसने बेटी को जन्म दिया है।
वाकया मेहरौना पुलिस चौकी से कुछ दूरी का है। चौकी नजदीक होते हुए भी असहाय महिला तक पुलिस की मदद तो नहीं पहुंची, उसके करीब जुटे राहगीर और आसपास के लोग भी मदद के लिए कदम नहीं बढ़ा सके। एंबुलेंस की तत्काल सेवा वाले फोन नंबर 108 या 102 की डायलिंग तक भी किसी की उंगली नहीं बढ़ी। इशारों में अपनी बात कहने की कोशिश करती महिला के हालात और मन को समझा टेंपो से गुजरते श्रवण ने। भीड़ देख टेंपो रोककर पास पहुंचे और उसे अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने गंभीरता दिखाते हुए लेबर रूम में शिफ्ट किया और कुछ देर बाद बेटी के जन्म की जानकारी दी। बताया कि मानसिक तौर पर कमजोर होने के कारण महिला अपना नाम या पहचान बताने में असमर्थ है। यह भी माना कि उसे अस्पताल लाने में थोड़ी सी भी देरी मां-बच्ची के लिए घातक हो सकती थी। खुद के काम को पीछे छोड़कर इंसानी फर्ज को मुकाम देने के बाद श्रवण ने टेंपो के साथ रोजमर्रा की तरह रास्ता पकड़ लिया लेकिन आगे बढ़ते टेंपो के पीछे साइलेंसर से निकलते धुएं के साथ एक संदेश भी माहौल में घुल रहा था।