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Deoria News: ठेका लेने और बैंकों में उपयोग होने वाले स्टांप में फर्जीवाड़े की बू
Thu, 18 Jan 2024 01:36 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Thu, 18 Jan 2024 01:36 AM IST
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10 से 500 तक के ई स्टांप नहीं किए जा रहे लॉक, एक स्टांप का कई जगह हो रहा इस्तेमाल
जमीन बैनामा को छोड़ कोई विभाग स्टांप एआईजी कार्यालय में लॉक नहीं कराता है स्टांप
देवरिया। ठेका लेने और बैंकों में इस्तेमाल होने वाले दस से 500 रुपये तक के स्टांप पेपर में बड़े पैमाने पर खेल की आशंका है। अफसरों के नाक के नीचे हो रहे फर्जीवाड़े की भनक तक नहीं किसी को है, क्योंकि जमीन बैनामा में उपयोग होने वाले स्टांप को छोड़कर कोई भी विभाग स्टांप को लॉक नहीं कराता है। ऐसे में एक स्टांप से दोहरा लाभ लिए जाने की चर्चा है। जानकारों का कहना है कि निष्पक्ष तरीके से जांच हो तो कई वेंडरों की गर्दन फंस सकती है और राजस्व के करोड़ों रुपये के नुकसान पर अंकुश लग सकता है।
देवरिया जिले में जाली स्टांप तैयार कर रेलवे समेत कई विभागों में ठेका लेने का मामला उजागर हो चुका है। बावजूद इसके जिम्मेदार इसको लेकर गंभीर नहीं हैं। सूत्रों के मुताबिक, ठेका लेने या बैंकों से जुड़े समेत अन्य कार्यों में इस्तेमाल होने वाले दस से 500 रुपये तक के स्टांप में खेल किया जा रहा है। एक स्टांप लेकर वेंडर की मदद से उसका उपयोग कई फाइलों में किया जा रहा है।
जमीन के होने वाले बैनामा में लगने वाले स्टांप को एआईजी कार्यालय पहुंचने तक लॉक कर दिया जाता है। उस कोड के स्टांप का इस्तेमाल दोबारा नहीं किया जा सकता है। जबकि दस से 500 रुपये के बेचे गए स्टांप की फोटो कॉपी का दुरूपयोग दूसरे विभाग के कार्यों में किए जाने की आशंका है।
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ऐसा इसलिए संभव है , क्योंकि बैंक, ठेकेदारी और भुगतान के लिए पीडब्लूडी, नगर पंचायत, नगर पालिका, जिला पंचायत, जल निगम, सांसद, विधायक निधि समेत अन्य विभागों में लगने वाले स्टांप को लॉक नहीं कराया जाता है। उसी तरह फाइल में रख दिया जाता है। गोरखपुर में फर्जी स्टांप का मामला पकड़े जाने के बाद जिम्मेदार अफसर सतर्क तो हुए हैं। लेकिन अभी तक विभागीय स्तर पर किसी तरह की जांच शुरू नहीं हो सकी है। हालांकि एक स्टांप लेकर दो अलग-अलग कार्यों में उपयोग करने वालों में खलबली मची है।
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यह था फर्जी स्टांप का मामला
आरोपी ठेकेदार हरिशंकर प्रसाद की ओर से फर्जी स्टांप का प्रयोग अनुबंध पत्र तैयार कर सरकारी विभागों में ठेकेदारी प्राप्त करने में किया गया था। इस कृत्य से करीब 50 लाख के राजस्व का नुकसान हुआ था। देवरिया कोतवाली पर वर्ष 2003 में ठेकेदारों और अन्य के विरुद्ध फर्जी स्टांप तैयार कर धोखाधड़ी और साजिश करने का केस दर्ज है।
दो दशक बाद गिरफ्तार हुआ था ठेकेदार
फर्जी स्टांप पेपर तैयार कर रेलवे समेत कई विभागों में ठेका लेने के मामले में ठेकेदार हरिशंकर प्रसाद, वेंडर समेत नौ लोगों पर सदर कोतवाली पुलिस ने वर्ष 2003 में केस दर्ज किया था। विवेचना के दौरान आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा को मुकदमा स्थानांतरण हो गया था। ईओडब्ल्यू की वाराणसी इकाई ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। फरार आरोपी ठेकेदार हरिशंकर शहर के गरूणपार मोहल्ले में छिपकर रहता था। जिसे दो दशक बाद मार्च 2023 को गिरफ्तार किया जा सका था।
ईओडब्ल्यू वाराणसी की टीम अब भी कर रही जांच
कोतवाली पुलिस के अनुसार वर्ष 1999 से वर्ष 2001 के मध्य गोरखपुर मंडल के विभिन्न जिले में निर्माण खण्ड प्रथम पीडब्ल्यूडी, प्रांतीय खण्ड लोक निर्माण विभाग देवरिया, जिला पंचायत देवरिया, नगर पंचायत देवरिया आदि सरकारी विभागों में ठेकेदारी प्राप्त करने में ठेकेदारों ने जाली एवं कूटरचित स्टांप पेपर पर अनुबंध पत्र तैयार कर प्रयोग करने का मामला प्रकाश में आया था। ईओडब्ल्यू वाराणसी की टीम मामले की जांच कर रही है।
वेंडर, बैंककर्मियों को बुलाकर लॉक कराएंगे स्टांप : एआईजी
देवरिया के एआईजी स्टांप पंकज कुमार ने बताया कि जमीन बैनामा में इस्तेमाल होने वाले स्टांप तो लॉक करा दिए जाते हैं। बाकी विभागों में 10 से 500 के लगने वाले स्टांपों की लॉक कराने की जिम्मेदारी उन विभाग के अफसरों की है। लेकिन कोई स्टॉप लॉक करने के लिए नहीं भेजता है। एक स्टांप का इस्तेमाल दो कार्यों के लिए नहीं किया जा सकता है। यह गंभीर मामला है। इसके लिए सभी विभागों को पत्र लिखा जाएगा और वेंडर, बैंककर्मियों को बुलाकर 500 तक के उपयोग किए गए स्टांपों को लॉक कराया जाएगा। फर्जीवाड़ा सामने आने पर दोषियों पर कार्रवाई होगी। 2003 में जो स्टांप फर्जीवाड़ा पकड़ा गया था। उस समय मैनुअल व्यवस्था थी। इसलिए धांधली हुई थी।
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जमीन बैनामा को छोड़ कोई विभाग स्टांप एआईजी कार्यालय में लॉक नहीं कराता है स्टांप
देवरिया। ठेका लेने और बैंकों में इस्तेमाल होने वाले दस से 500 रुपये तक के स्टांप पेपर में बड़े पैमाने पर खेल की आशंका है। अफसरों के नाक के नीचे हो रहे फर्जीवाड़े की भनक तक नहीं किसी को है, क्योंकि जमीन बैनामा में उपयोग होने वाले स्टांप को छोड़कर कोई भी विभाग स्टांप को लॉक नहीं कराता है। ऐसे में एक स्टांप से दोहरा लाभ लिए जाने की चर्चा है। जानकारों का कहना है कि निष्पक्ष तरीके से जांच हो तो कई वेंडरों की गर्दन फंस सकती है और राजस्व के करोड़ों रुपये के नुकसान पर अंकुश लग सकता है।
देवरिया जिले में जाली स्टांप तैयार कर रेलवे समेत कई विभागों में ठेका लेने का मामला उजागर हो चुका है। बावजूद इसके जिम्मेदार इसको लेकर गंभीर नहीं हैं। सूत्रों के मुताबिक, ठेका लेने या बैंकों से जुड़े समेत अन्य कार्यों में इस्तेमाल होने वाले दस से 500 रुपये तक के स्टांप में खेल किया जा रहा है। एक स्टांप लेकर वेंडर की मदद से उसका उपयोग कई फाइलों में किया जा रहा है।
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जमीन के होने वाले बैनामा में लगने वाले स्टांप को एआईजी कार्यालय पहुंचने तक लॉक कर दिया जाता है। उस कोड के स्टांप का इस्तेमाल दोबारा नहीं किया जा सकता है। जबकि दस से 500 रुपये के बेचे गए स्टांप की फोटो कॉपी का दुरूपयोग दूसरे विभाग के कार्यों में किए जाने की आशंका है।
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ऐसा इसलिए संभव है , क्योंकि बैंक, ठेकेदारी और भुगतान के लिए पीडब्लूडी, नगर पंचायत, नगर पालिका, जिला पंचायत, जल निगम, सांसद, विधायक निधि समेत अन्य विभागों में लगने वाले स्टांप को लॉक नहीं कराया जाता है। उसी तरह फाइल में रख दिया जाता है। गोरखपुर में फर्जी स्टांप का मामला पकड़े जाने के बाद जिम्मेदार अफसर सतर्क तो हुए हैं। लेकिन अभी तक विभागीय स्तर पर किसी तरह की जांच शुरू नहीं हो सकी है। हालांकि एक स्टांप लेकर दो अलग-अलग कार्यों में उपयोग करने वालों में खलबली मची है।
यह था फर्जी स्टांप का मामला
आरोपी ठेकेदार हरिशंकर प्रसाद की ओर से फर्जी स्टांप का प्रयोग अनुबंध पत्र तैयार कर सरकारी विभागों में ठेकेदारी प्राप्त करने में किया गया था। इस कृत्य से करीब 50 लाख के राजस्व का नुकसान हुआ था। देवरिया कोतवाली पर वर्ष 2003 में ठेकेदारों और अन्य के विरुद्ध फर्जी स्टांप तैयार कर धोखाधड़ी और साजिश करने का केस दर्ज है।
दो दशक बाद गिरफ्तार हुआ था ठेकेदार
फर्जी स्टांप पेपर तैयार कर रेलवे समेत कई विभागों में ठेका लेने के मामले में ठेकेदार हरिशंकर प्रसाद, वेंडर समेत नौ लोगों पर सदर कोतवाली पुलिस ने वर्ष 2003 में केस दर्ज किया था। विवेचना के दौरान आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा को मुकदमा स्थानांतरण हो गया था। ईओडब्ल्यू की वाराणसी इकाई ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। फरार आरोपी ठेकेदार हरिशंकर शहर के गरूणपार मोहल्ले में छिपकर रहता था। जिसे दो दशक बाद मार्च 2023 को गिरफ्तार किया जा सका था।
ईओडब्ल्यू वाराणसी की टीम अब भी कर रही जांच
कोतवाली पुलिस के अनुसार वर्ष 1999 से वर्ष 2001 के मध्य गोरखपुर मंडल के विभिन्न जिले में निर्माण खण्ड प्रथम पीडब्ल्यूडी, प्रांतीय खण्ड लोक निर्माण विभाग देवरिया, जिला पंचायत देवरिया, नगर पंचायत देवरिया आदि सरकारी विभागों में ठेकेदारी प्राप्त करने में ठेकेदारों ने जाली एवं कूटरचित स्टांप पेपर पर अनुबंध पत्र तैयार कर प्रयोग करने का मामला प्रकाश में आया था। ईओडब्ल्यू वाराणसी की टीम मामले की जांच कर रही है।
वेंडर, बैंककर्मियों को बुलाकर लॉक कराएंगे स्टांप : एआईजी
देवरिया के एआईजी स्टांप पंकज कुमार ने बताया कि जमीन बैनामा में इस्तेमाल होने वाले स्टांप तो लॉक करा दिए जाते हैं। बाकी विभागों में 10 से 500 के लगने वाले स्टांपों की लॉक कराने की जिम्मेदारी उन विभाग के अफसरों की है। लेकिन कोई स्टॉप लॉक करने के लिए नहीं भेजता है। एक स्टांप का इस्तेमाल दो कार्यों के लिए नहीं किया जा सकता है। यह गंभीर मामला है। इसके लिए सभी विभागों को पत्र लिखा जाएगा और वेंडर, बैंककर्मियों को बुलाकर 500 तक के उपयोग किए गए स्टांपों को लॉक कराया जाएगा। फर्जीवाड़ा सामने आने पर दोषियों पर कार्रवाई होगी। 2003 में जो स्टांप फर्जीवाड़ा पकड़ा गया था। उस समय मैनुअल व्यवस्था थी। इसलिए धांधली हुई थी।