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शिव-पार्वती विवाह:भक्ति, तप और प्रेम की मिसाल
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बघौचघाट। पथरदेवा क्षेत्र के देवरिया धूस स्थित मां हिरमती भवानी मंदिर में चल रहे 23वें श्री सहस्त्र चंडी महायज्ञ में भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। महायज्ञ के दौरान श्रद्धालु मंदिर की परिक्रमा कर सुख-समृद्धि एवं मंगलकामना कर रहे हैं,जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है।
शनिवार को कथा के दूसरे दिन भोजपुरी प्रवचनकर्ता पंडित वीरेंद्र तिवारी ने भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने शिव विवाह की कथा के माध्यम से त्याग, तपस्या और सच्चे प्रेम का संदेश देते हुए बताया कि किस प्रकार माता पार्वती ने कठोर साधना कर भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया।
उन्होंने कहा कि शिवजी के गण शिवजी का श्रृंगार करने लगे। जटाओं का मुकुट बनाकर उस पर साँपों का मौर सजाया गया। शिव बारात में अपने प्रिय वाहन नंदी (बैल) पर सवार होकर गए थे। नंदी धर्म और शक्ति के प्रतीक हैं, जिन पर बैठकर महादेव बारात में शामिल हुए। बारात में उनके गण (भृंगी, श्रृंगी आदि) भी साथ थे।
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कथा सुनने के लिए क्षेत्र के हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे। पूरा मंदिर परिसर भक्ति रस में सराबोर नजर आया और जय श्रीराम तथा हर-हर महादेव के उद्घोष से वातावरण गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालु भावविभोर होकर कथा का रसपान करते दिखे।
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शनिवार को कथा के दूसरे दिन भोजपुरी प्रवचनकर्ता पंडित वीरेंद्र तिवारी ने भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने शिव विवाह की कथा के माध्यम से त्याग, तपस्या और सच्चे प्रेम का संदेश देते हुए बताया कि किस प्रकार माता पार्वती ने कठोर साधना कर भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया।
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उन्होंने कहा कि शिवजी के गण शिवजी का श्रृंगार करने लगे। जटाओं का मुकुट बनाकर उस पर साँपों का मौर सजाया गया। शिव बारात में अपने प्रिय वाहन नंदी (बैल) पर सवार होकर गए थे। नंदी धर्म और शक्ति के प्रतीक हैं, जिन पर बैठकर महादेव बारात में शामिल हुए। बारात में उनके गण (भृंगी, श्रृंगी आदि) भी साथ थे।
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कथा सुनने के लिए क्षेत्र के हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे। पूरा मंदिर परिसर भक्ति रस में सराबोर नजर आया और जय श्रीराम तथा हर-हर महादेव के उद्घोष से वातावरण गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालु भावविभोर होकर कथा का रसपान करते दिखे।