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कुटुंब रजिस्टर में सचिव ने अजहर को मार दिया

Wed, 20 Jul 2022 12:03 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 20 Jul 2022 12:03 AM IST
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sachiv killed azahar in papers
96- मिर्जा अजहर वेग - फोटो : DEORIA
कुटुंब रजिस्टर में सचिव ने अजहर को मार दिया
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खुद के जिंदा होने का सबूत लेकर ब्लॉक में घूम रहे अजहर
एक माह पहले ही जारी हुआ था जिंदा होने का प्रमाणपत्र
मामला खुलने पर ब्लॉक दफ्तर में मचा हड़कंप
तीन बीघा जमीन पर वरासत को लेकर साजिश का आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। जिंदा शख्स को कागज में मृत घोषित करने को लेकर रुद्रपुर के सरकारी दफ्तर के कर्मचारी एक बार फिर चर्चा में हैं। गाजीपुर भैंसही गांव के एक व्यक्ति को ब्लॉक के सचिव ने कागज में मुर्दा घोषित कर दिया है। उसी सचिव ने एक माह पहले ही जिंदा होने का प्रमाणपत्र भी जारी किया है। अब मामला खुलने पर दफ्तर में हड़कंप मच गया है। अधिकारी जांच करने में जुट गए हैं।
गाजीपुर भैंसही गांव के रहने वाले मिर्जा अजहर बेग ने मंगलवार को खंड विकास अधिकारी को शपथ पत्र देकर बताया कि जुलाई माह में ग्राम सचिव ने परिवार रजिस्टर की नकल दी थी। इसमें वह जिंदा हैं। उनके पट्टीदारों ने तीन बीघा जमीन हड़पने की साजिश के तहत उन्हें ब्लॉक के रिकॉर्ड में मृत घोषित करा दिया है। पट्टीदारों की ओर से दाखिल न्यायालय के वाद में जवाब देने के लिए जब वह दोबारा ब्लॉक पर परिवार रजिस्टर की नकल लेने गए, तो खुद को कागज में मुर्दा देख दंग रह गए।
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उन्होंने बताया कि ग्राम सचिव से जब इस मामले में पूछताछ की तो उन्होंने कुछ बोलने से इनकार कर दिए। जबकि रजिस्टर में मृत्यु की सूचना देने वाले और मृत्यु का दिनांक भी अंकित नहीं है। जुलाई में ही ग्राम सचिव की ओर से जारी उनके जिंदा होने का प्रमाणपत्र है। वही अब कागज में मार दिए। ग्राम सचिव बलबीर यादव ने कहा कि कुटुंब रजिस्टर में गाजीपुर भैंसही गांव के मिर्जा अजहर वेग की मृत्यु दर्ज है। किस परिस्थिति में सूचना गलत दर्ज हुई है, अथवा सही किस दशा में है। जांच की जा रही है। खंड विकास अधिकारी विवेकानंद मिश्र ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है। सचिव को तलब किया गया है। जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
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इनसेट में
नया नहीं है जिंदा को मुर्दा घोषित करने का कारनामा
रुद्रपुर। रुद्रपुर के सरकारी दफ्तरों में जिंदा को मुर्दा घोषित करने का मामला कोई नया नहीं है। इसके पहले डाला गांव के रामअवध को सरकारी अभिलेख में मार दिया गया। वह तहसीलदार न्यायालय में जिंदा होने का मुकदमा लड़ रहे हैं। रोजी-रोटी की तलाश में ललितपुर गए रामअवध को अभिलेख में मार दिया गया। हालांकि, अब न्यायालय में उनके मुकदमे की तारीख पांच अगस्त तय है।
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