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Deoria News: देवरिया से वाराणसी पहुंचना हुआ आसान, समय भी बचेगा
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देवरिया। वाराणसी मंडल के मऊ-दुल्लहपुर 21 किमी लंबे रेलखंड पर दोहरीकरण एवं विद्युतीकरण कार्य के पूरा होने के बाद बृहस्पतिवार को रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) ने संरक्षा निरीक्षण और स्पीड ट्रॉयल को सफलतापूवर्क पूरा किया। निरीक्षण के दौरान सीआरएस स्पेशल ट्रेन को 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलाकर ट्रैक, सिग्नलिंग और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं की जांच की गई। स्पीड ट्रॉयल सफल रहने के बाद इस रेलखंड पर अब सामान्य ट्रेनों का संचालन सुचारु रूप से शुरू हो जाएगा। इससे वाराणसी पहुंचना काफी आसाना हो जाएगा। इसके अलावा समय भी कम लगेगा।
रेल संरक्षा आयुक्त, उत्तर पूर्व सर्किल प्रणजीव सक्सेना ने बुधवार को मऊ-दुल्लहपुर रेलखंड का विस्तृत निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान ट्रैक की गुणवत्ता, ओएचई, ब्रिज, लेवल क्रॉसिंग, सिग्नलिंग प्रणाली और सुरक्षा मानकों का बारीकी से परीक्षण किया। इसके बाद बृहस्पतिवार को मऊ–दुल्लहपुर खंड में स्पीड ट्रॉयल की अनुमति दी। इसमें सीआरएस स्पेशल ट्रेन को अधिकतम अनुमेय गति पर चलाया गया। सभी मानक तय मापदंडों पर खरे पाए गए, जिसके बाद इस खंड को यात्री और मालगाड़ियों के नियमित संचालन के लिए सुरक्षित घोषित किया गया।
गोरखपुर-वाराणसी के बीच 230 किमी लंबे इस रेल पथ का भटनी जंक्शन से लेकर औड़ियार जंक्शन के बीच करीब 117 किमी लंबा हिस्सा अभी सिंगल ट्रैक है, जिसको डबल बनाने का कार्य हो रहा है। मार्च 2026 में इसे पूरा होना है। अब इस रेलखंड पर बेल्थरा रोड और पिवकोल के बीच डबलिंग का काम बाकी है। इसी खंड में सरयू नदी पर तुर्तिपार का पुल भी निर्माणाधीन है। यह दोनों काम मार्च तक पूरा हो जाएगा। नया ट्रैक 150 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार से ट्रेन संचालन को ध्यान में रखकर अपग्रेड किया जा रहा है।
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उल्लेखनीय है कि मऊ-दुल्लहपुर और मऊ–खुरहट रेलखंड के दोहरीकरण का काम चल रहा था। मऊ-खुरहट खंड के चालू होने से नवनिर्मित लाइन को अप मेन लाइन के रूप में नामित किया गया है। दोहरीकरण और विद्युतीकरण से इस रेलखंड की क्षमता में वृद्धि होगी। इससे ट्रेनों की गति और आवृत्ति बढ़ेगी, यात्रा समय में कमी आएगी और यात्रियों को अधिक सुविधाजनक एवं सुरक्षित सफर मिलेगा। माल ढुलाई को भी गति मिलेगी।
इस निरीक्षण व स्पीड ट्रॉयल के दौरान पूर्वोत्तर रेलवे के प्रमुख मुख्य इंजीनियर नीलमणि, वाराणसी मंडल के मंडल रेल प्रबंधक आशीष जैन, रेल विकास निगम लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक विकास चंद्रा, मुख्य परियोजना प्रबंधक आशुतोष शुक्ला सहित मुख्यालय, मंडल और आरवीएनएल के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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रेल संरक्षा आयुक्त, उत्तर पूर्व सर्किल प्रणजीव सक्सेना ने बुधवार को मऊ-दुल्लहपुर रेलखंड का विस्तृत निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान ट्रैक की गुणवत्ता, ओएचई, ब्रिज, लेवल क्रॉसिंग, सिग्नलिंग प्रणाली और सुरक्षा मानकों का बारीकी से परीक्षण किया। इसके बाद बृहस्पतिवार को मऊ–दुल्लहपुर खंड में स्पीड ट्रॉयल की अनुमति दी। इसमें सीआरएस स्पेशल ट्रेन को अधिकतम अनुमेय गति पर चलाया गया। सभी मानक तय मापदंडों पर खरे पाए गए, जिसके बाद इस खंड को यात्री और मालगाड़ियों के नियमित संचालन के लिए सुरक्षित घोषित किया गया।
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गोरखपुर-वाराणसी के बीच 230 किमी लंबे इस रेल पथ का भटनी जंक्शन से लेकर औड़ियार जंक्शन के बीच करीब 117 किमी लंबा हिस्सा अभी सिंगल ट्रैक है, जिसको डबल बनाने का कार्य हो रहा है। मार्च 2026 में इसे पूरा होना है। अब इस रेलखंड पर बेल्थरा रोड और पिवकोल के बीच डबलिंग का काम बाकी है। इसी खंड में सरयू नदी पर तुर्तिपार का पुल भी निर्माणाधीन है। यह दोनों काम मार्च तक पूरा हो जाएगा। नया ट्रैक 150 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार से ट्रेन संचालन को ध्यान में रखकर अपग्रेड किया जा रहा है।
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उल्लेखनीय है कि मऊ-दुल्लहपुर और मऊ–खुरहट रेलखंड के दोहरीकरण का काम चल रहा था। मऊ-खुरहट खंड के चालू होने से नवनिर्मित लाइन को अप मेन लाइन के रूप में नामित किया गया है। दोहरीकरण और विद्युतीकरण से इस रेलखंड की क्षमता में वृद्धि होगी। इससे ट्रेनों की गति और आवृत्ति बढ़ेगी, यात्रा समय में कमी आएगी और यात्रियों को अधिक सुविधाजनक एवं सुरक्षित सफर मिलेगा। माल ढुलाई को भी गति मिलेगी।
इस निरीक्षण व स्पीड ट्रॉयल के दौरान पूर्वोत्तर रेलवे के प्रमुख मुख्य इंजीनियर नीलमणि, वाराणसी मंडल के मंडल रेल प्रबंधक आशीष जैन, रेल विकास निगम लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक विकास चंद्रा, मुख्य परियोजना प्रबंधक आशुतोष शुक्ला सहित मुख्यालय, मंडल और आरवीएनएल के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।