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राम बरात पर पुष्प वर्षा कर किया गया स्वागत
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ामलीला समिति के ओर से निकली राम बरात में शामिल लोग।संवाद
- फोटो : DEORIA
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राम बरात पर पुष्प वर्षा कर किया गया स्वागत
दिन में निकली बरात, रात को वनगमन का मंचन देख श्रद्धालुओं की आंखों से छलके आंसू
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। श्रीरामलीला समिति के तत्वावधान में बुधवार को रामलीला के चौथे दिन शाम श्रीराम की बरात रामलीला मैदान से निकली। शहर में विभिन्न स्थानों पर बरात का पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया। वहीं, रात में कलाकारों ने राम के वनगमन का मंचन किया। इसे देख श्रद्धालु भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू छलक गए।
बुुधवार की शाम तीन बजे रामलीला मैदान से श्रीराम सहित तीनों भाई लक्ष्मण, भरत व शत्रुघ्न की बरात निकली। इसमें हाथी, घोड़े, बैंडबाजा व झांकियां आदि आकर्षण के केंद्र में रहीं। बरात कोऑपरेटिव चौक से नगर पालिका रोड, तहसील चौक, अबूबकर नगर, स्टेशन रोड, मोतीलाल रोड, मालवीय रोड से होते हुए रामलीला मैदान पहुंची।
बरात में आज मेरे राम की शादी है, तथा रामजी की निकली सवारी के गानों पर थिरकते हुए बरात में शामिल लोग हर्षोल्लास के साथ झूमते हुए नजर आए। लोगों ने जगह-जगह श्रीराम बरात का पुष्प वर्षा कर स्वागत किया।
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वहीं, रात में कलाकारों ने राम वनगमन का मंचन किया। मंचन में राजा दशरथ कानों के पास अपने सफेद बाल को देखकर श्रीराम को राजा बनाने का निर्णय लेते हैं। दासी मंथरा माता कैकेयी को बताती है कि राम के राजा बन जाने के बाद उनको दासी और उनके पुत्र भरत को कारागार में डाल देेंगे। उसके बाद देवासुर संग्राम में मिले दो वरदानों को याद दिलाती है।
माता कैकेयी ने राजा दशरथ से भरत को राजगद्दी और दूसरे में राम को वनवास भेजने के लिए दो वरदानों की इच्छा जाहिर करती हैं। उसके बाद श्रीराम वन को प्रस्थान करने वाले होते हैं, उसी समय पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण भी साथ जाने की जिद करते हैं।
श्रीराम को वन जाते देख पूरे अयोध्यावासी रोने लगते हैं। फिर गंगा तट पर पहुंचने के बाद केवट से मिलते हैं और राम व केवट संवाद होता है। इसके बाद केवट श्रीराम के चरण को धोकर नाव से नदी को पार कराते हैं। इधर, मंत्री सुमंत द्वारा श्रीराम के वन जाने का पता चलते ही राजा दशरथ उनके वियोग में प्राण त्याग देते हैं।
इस दौरान दशरथ के रूप में रामजीत शर्मा, माता कैकेयी के हरिदास बृजवासी, केवट के सौरभ द्विवेदी और मंथरा के रूप में रसिक बिहारी नजर आए। इस दौरान समिति के अध्यक्ष अरुण कुुमार, मंत्री निखिल सोनी, कमलेश मित्तल, हीरा प्तलाल वर्मा, डॉ. सौरभ श्रीवास्तव, कपिल सोनी, राजेंद्र जायसवाल, गुड्डू बाबा, श्याम मनोहर, कृष्ण मोहन गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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दिन में निकली बरात, रात को वनगमन का मंचन देख श्रद्धालुओं की आंखों से छलके आंसू
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। श्रीरामलीला समिति के तत्वावधान में बुधवार को रामलीला के चौथे दिन शाम श्रीराम की बरात रामलीला मैदान से निकली। शहर में विभिन्न स्थानों पर बरात का पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया। वहीं, रात में कलाकारों ने राम के वनगमन का मंचन किया। इसे देख श्रद्धालु भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू छलक गए।
बुुधवार की शाम तीन बजे रामलीला मैदान से श्रीराम सहित तीनों भाई लक्ष्मण, भरत व शत्रुघ्न की बरात निकली। इसमें हाथी, घोड़े, बैंडबाजा व झांकियां आदि आकर्षण के केंद्र में रहीं। बरात कोऑपरेटिव चौक से नगर पालिका रोड, तहसील चौक, अबूबकर नगर, स्टेशन रोड, मोतीलाल रोड, मालवीय रोड से होते हुए रामलीला मैदान पहुंची।
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बरात में आज मेरे राम की शादी है, तथा रामजी की निकली सवारी के गानों पर थिरकते हुए बरात में शामिल लोग हर्षोल्लास के साथ झूमते हुए नजर आए। लोगों ने जगह-जगह श्रीराम बरात का पुष्प वर्षा कर स्वागत किया।
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वहीं, रात में कलाकारों ने राम वनगमन का मंचन किया। मंचन में राजा दशरथ कानों के पास अपने सफेद बाल को देखकर श्रीराम को राजा बनाने का निर्णय लेते हैं। दासी मंथरा माता कैकेयी को बताती है कि राम के राजा बन जाने के बाद उनको दासी और उनके पुत्र भरत को कारागार में डाल देेंगे। उसके बाद देवासुर संग्राम में मिले दो वरदानों को याद दिलाती है।
माता कैकेयी ने राजा दशरथ से भरत को राजगद्दी और दूसरे में राम को वनवास भेजने के लिए दो वरदानों की इच्छा जाहिर करती हैं। उसके बाद श्रीराम वन को प्रस्थान करने वाले होते हैं, उसी समय पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण भी साथ जाने की जिद करते हैं।
श्रीराम को वन जाते देख पूरे अयोध्यावासी रोने लगते हैं। फिर गंगा तट पर पहुंचने के बाद केवट से मिलते हैं और राम व केवट संवाद होता है। इसके बाद केवट श्रीराम के चरण को धोकर नाव से नदी को पार कराते हैं। इधर, मंत्री सुमंत द्वारा श्रीराम के वन जाने का पता चलते ही राजा दशरथ उनके वियोग में प्राण त्याग देते हैं।
इस दौरान दशरथ के रूप में रामजीत शर्मा, माता कैकेयी के हरिदास बृजवासी, केवट के सौरभ द्विवेदी और मंथरा के रूप में रसिक बिहारी नजर आए। इस दौरान समिति के अध्यक्ष अरुण कुुमार, मंत्री निखिल सोनी, कमलेश मित्तल, हीरा प्तलाल वर्मा, डॉ. सौरभ श्रीवास्तव, कपिल सोनी, राजेंद्र जायसवाल, गुड्डू बाबा, श्याम मनोहर, कृष्ण मोहन गुप्ता आदि मौजूद रहे।