Deoria: रजनी हॉस्पिटल को अपर मुख्य चिकित्साधिकारी ने किया सील, दो महिलाओं की हो गई थी मौत
मानक की अनदेखी कर निजी अस्पताल चल रहे हैं। इनके खिलाफ स्वास्थ्य महकमा कार्रवाई के नाम खानापूर्ति कर रहा है। शिकायत मिलने और निरीक्षण के दौरान कार्रवाई की जाती है। पर कुछ ही दिन बाद मनमाफिक रिपोर्ट लगाकर मामले को निपटा दिया जाता है। जिसके चलते इनका मनोबल बढ़ता जा रहा है।
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नगर के रजनी हॉस्पिटल को अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने मंगलवार दोपहर में कोतवाली पुलिस व स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ पहुंचकर सील कर दिया। आरोप था कि ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर की लापरवाही के चलते दो प्रसूताओं की जान चली गई थी। इसके बाद परिजनों ने शव को कोतवाली गेट पर रखकर कार्रवाई की मांग की। मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने यह कार्रवाई की।
मईल थाना क्षेत्र के करौता गांव निवासी सर्वजीत उर्फ राणा की पत्नी रिंकू देवी (24) और लार थाना क्षेत्र के धकपुरा गांव निवासी छोटू की पत्नी संध्या (25) को प्रसव पीड़ा होने पर रविवार को परिजनों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सलेमपुर पहुंचाया, जहां से डॉक्टर ने उन्हें रेफर कर दिया।
आरोप है कि एक आशा कार्यकर्ता ने नगर के रजनी हॉस्पिटल में भर्ती कराया, जहां ऑपरेशन के दौरान रात करीब दस बजे रिंकू ने लड़के को जन्म दिया और संध्या देवी को ऑपरेशन से लड़की पैदा हुई। सोमवार की सुबह दोनों की अचानक तबीयत बिगड़ने लगी तो अस्पताल के कर्मचारियों ने उसे अपने वाहन से गोरखपुर के एक निजी अस्पताल में पहुंचा दिया। जहां इलाज के दौरान दोनों महिलाओं की मौत हो गई।
परिजन कोतवाली गेट के सामने शव को रख कर कार्रवाई की मांग करने लगे। कोतवाल के आश्वासन के बाद शांत हुए। परिजनों का आरोप था कि डॉक्टर ने गुमराह कर महिलाओं को अस्पताल में भर्ती रखा, जब हालत बिगड़ी तो गोरखपुर के एक निजी अस्पताल में भेज दिया।
मंगलवार की दोपहर अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेंद्र प्रसाद पहुंचे। उन्होंने रजनी हॉस्पिटल को सील करा दिया। इस दौरान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्साधिकारी डॉ. अतुल कुमार समेत अन्य कर्मचारी व पुलिस मौजूद रही।
कोतवाल कपिल देव चौधरी ने बताया कि रजनी हॉस्पिटल को सील कर दिया गया है। अन्य कार्रवाई की जा रही है। अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि अस्पताल में निरीक्षण के दौरान वहां कोई कर्मचारी नहीं मिला। दो मरीज मौजूद थे, जिन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भिजवा दिया गया है। हॉस्पिटल को को सील कर दिया गया है।
रजनी हॉस्पिटल का पंजीकरण निलंबित
देवरिया जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के निर्देश पर सलेमपुर स्थित रजनी हॉस्पिटल को सील करने के साथ ही पंजीकरण भी निलंबित कर दिया गया है। जिलाधिकारी ने विशेषज्ञ चिकित्सकों की समिति गठित कर पूरे प्रकरण पर विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब की है। जिलाधिकारी ने कहा कि जांच रिपोर्ट आधार पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सरकारी से निजी अस्पतालों को बेचे जा रहे मरीज
प्रसूताओं को सरकारी से निजी अस्पताल तक पहुंचाने के लिए बाकायदा सौदा होता है। अगर मामला गंभीर हुआ तो यह नेटवर्क गोरखपुर तक मरीजों की बोली लगा कर भेजने का काम कर रहा है। पूरी रकम के 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा के लालच में दलाल और कुछ आशा कार्यकर्ता निजी अस्पतालों में भेज दे रही हैं। इसके चलते इलाज में लापरवाही से गर्भवती असमय ही काल के गाल में समा जा रही हैं। वहीं सरकारी अस्पतालों में प्रसव दर भी घटने की बात सामने आ रही है, क्योंकि कुछ सप्ताह पहले प्रसव दर घटने पर 119 आशाओं को नोटिस सीएमओ ने दिया था।
सलेमपुर के रजनी अस्पताल के इलाज के बाद दो प्रसूताओं की मौत के बाद परिजनों ने आरोप लगाया है कि आशा कार्यकर्ता उनको निजी अस्पताल पहुंचाई थी, जहां पर इलाज के दौरान मौत हो गई। करीब छह माह पहले शहर के भटवलिया मोहल्ले के अस्पताल में प्रसूता की मौत हो गई थी। इस मामले में भटनी निवासी व्यक्ति ने मुकदमा दर्ज कराया था कि जिला अस्पताल आने के बाद एक आशा ने उसे बेहतर इलाज का झांसा देकर निजी अस्पताल पहुंचाया था।
शहर के गोरखपुर रोड स्थित एक निजी अस्पताल में प्रसूता की मौत के मामले में आशा का नाम प्रकाश में आया था। इन घटनाओं से साफ जाहिर हो रहा है कि निजी अस्पताल पहुंचाने वालों ने नेटवर्क खड़ा कर लिया है, क्योंकि सीएमओ ने जिन 119 आशाओं को नोटिस जारी किया है। इसमें स्पष्ट रूप से बताया गया कि प्रसव कम कराना है।
अब सवाल खड़ा होता है कि इन आशाओं ने निजी अस्पतालों से साठगांठ कर ली है। कमीशन के चक्कर में प्रसूताओं को शहर से लगायत, जिले के विभिन्न जगहों पर चलने वाले निजी अस्पतालों तक प्रसूताओं को भेजने का खेल किया जा रहा है।
मानकों की अनदेखी
एंबुलेंस चालकों की भी मिलीभगत
विभिन्न जगहों से जिला अस्पताल के लिए रवाना होने वाले एंबुलेंस चालक की साठगांठ आशाओं के जरिए ही निजी अस्पताल से है। इनके जरिए निजी अस्पतालों को मरीज भेजे जा रहे हैं। यहां तक अस्पताल के मौजूद रहे निजी एंबुलेंस चालकों की नजर मरीजों पर रहती है। झांसे में लेकर मनमाफिक निजी अस्पताल में मरीजों को भेज दिया जाता है।
कार्रवाई साबित हो रही है खानापूर्ति
मानक की अनदेखी कर निजी अस्पताल चल रहे हैं। इनके खिलाफ स्वास्थ्य महकमा कार्रवाई के नाम खानापूर्ति कर रहा है। शिकायत मिलने और निरीक्षण के दौरान कार्रवाई की जाती है। पर कुछ ही दिन बाद मनमाफिक रिपोर्ट लगाकर मामले को निपटा दिया जाता है। जिसके चलते इनका मनोबल बढ़ता जा रहा है।
निजी अस्पतालों की शिकायत मिलती है तो टीम भेजकर जांच कराई जाती है। अगर किसी आशा की संलिप्तता पाई जाती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाती है। कुछ दिन पहले नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया था। -डॉ. राजेश झा, सीएमओ