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फोरलेन के लिए प्रशासन ने तोड़वाई 39 दुकानें
deoria
Updated Sun, 28 Oct 2018 11:20 PM IST
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दुकान तोड़ती जेसीबी।
- फोटो : amar ujala
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देवरिया। फोरलेन निर्माण को लेकर जिला प्रशासन सख्त है। रविवार को एसडीएम रामकेश यादव ने सुभाष चौक से कोऑपरेटिव चौराहे तक 39 दुकानों को तोड़वा दिया। प्रशासन के मुताबिक सभी दुकानें अवैध रूप से पीडब्लूडी की जमीन में बनीं थीं। इसमें अकेले नगरपालिका की 30 दुकानें शामिल हैं, जबकि नौ दुकानें रामजानकी मंदिर व मलेरिया विभाग की थीं। अतिक्रमण के चलते ही यहां फोरलेन का काम ठप था। अवैध निर्माण हटाने के तत्काल बाद सड़क निर्माण का काम भी शुरू कर दिया गया।
सिविल लाइंस रोड की चौड़ाई पीडब्लूडी के नक्शे में 120 फुट है, लेकिन धरातल पर इसकी तस्वीर कुछ और ही है। कई जगहों पर सड़क की चौड़ाई घटकर 60 फुट हो गई है। सड़क कब्जाने में आम लोगों से ज्यादा सरकारी विभाग शामिल हैं। कोऑपरेटिव चौराहे पर अवैध निर्माण की सघनता के चलते फोरलेन बनाने के लिए पीडब्लूडी को 61 फुट तक जमीन नहीं मिल पा रही थी। लोक निर्माण विभाग की जमीन पर नगरपालिका ने 30 दुकानें बना ली थी। वहीं, मलेरिया विभाग व रामजानकी मंदिर की नौ दुकानों का निर्माण पीडब्लूडी की जमीन में हुआ था। रविवार की सुबह दस बजे एसडीएम रामकेश यादव, सीओ वरुण कुमार मिश्र, सदर कोतवाल विजय नारायण लाव-लश्कर के साथ कोऑपरेटिव चौराहा पहुंचे। उन्होंने दुकानदारों से दुकान खाली कराते हुए जेसीबी से तोड़वाना शुरू कर दिया।
इनसेट
अमर उजाला ने उठाई थी फोरलेन निर्माण की समस्या
फोरलेन निर्माण में बाधा बने अवैध निर्माण को दर्शाते हुए अमर उजाला ने फोरलेन निर्माण की राह में रोड़ा बना अतिक्रमण शीर्षक से रविवार को खबर प्रकाशित की थी। यह संभावना भी जताई थी कि अगर यहां अवैध निर्माण नहीं तोड़े गए तो फोरलेन की सूरत बिगड़ सकती है। अवैध निर्माण नगरपालिका, मलेरिया विभाग से जुड़ा होने के चलते पीडब्लूडी के अधिकारी भी निर्माण ढहाने के मामले में साफ-साफ बोलने से बच रहे थे। खबर छपते ही हरकत में आए जिला प्रशासन ने इन जगहों पर किए गए अवैध निर्माण को तोड़वा दिया।
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अवैध निर्माण पर वर्षों से चुप थे जिम्मेदार
प्रशासन ने जिस भूमि को पीडब्लूडी के हिस्से की बताते हुए दुकानें तोड़वाई, उनमें मोटर स्पेयर पार्ट्स, फल-सब्जी आदि की दुकानें थीं। भवन का निर्माण नगर पालिका ने कराया था और दुकानदारों को किराए पर दिया था। कार्रवाई के दौरान लोग कहते रहे कि अगर जमीन पीडब्लूडी की थी तो नगर पालिका को निर्माण की अनुमति क्यों दी गई। नगर पालिका की ओर से अवैध निर्माण के वक्त ही पीडब्लूडी के अफसरों ने क्यों चुप्पी साधी रही। मुख्य मार्ग पर यह हाल है तो अंदर के इलाकों में भी हालत और भी खराब होगी।
कोट
पीडब्लूडी ने नगरपालिका की 30 दुकानों को लेकर नोटिस जारी किया था। ये दुकानें पीडब्लूडी की जमीन में बनीं थीं। इसे जिला प्रशासन द्वारा तोड़वा दिया गया है।
-सीताराम गुप्त, एडीएम व प्रभारी ईओ नगरपालिका।
कोट
कुल आठ नोटिस पीडब्लूडी की ओर से जारी किए गए हैं। फोरलेन निर्माण में जहां भी बाधा आ रही है वहां अवैध निर्माण तोड़े जा रहे हैं।
-डीके चौधरी, एक्सईएन, पीडब्लूडी प्रांतीय खंड।
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सिविल लाइंस रोड की चौड़ाई पीडब्लूडी के नक्शे में 120 फुट है, लेकिन धरातल पर इसकी तस्वीर कुछ और ही है। कई जगहों पर सड़क की चौड़ाई घटकर 60 फुट हो गई है। सड़क कब्जाने में आम लोगों से ज्यादा सरकारी विभाग शामिल हैं। कोऑपरेटिव चौराहे पर अवैध निर्माण की सघनता के चलते फोरलेन बनाने के लिए पीडब्लूडी को 61 फुट तक जमीन नहीं मिल पा रही थी। लोक निर्माण विभाग की जमीन पर नगरपालिका ने 30 दुकानें बना ली थी। वहीं, मलेरिया विभाग व रामजानकी मंदिर की नौ दुकानों का निर्माण पीडब्लूडी की जमीन में हुआ था। रविवार की सुबह दस बजे एसडीएम रामकेश यादव, सीओ वरुण कुमार मिश्र, सदर कोतवाल विजय नारायण लाव-लश्कर के साथ कोऑपरेटिव चौराहा पहुंचे। उन्होंने दुकानदारों से दुकान खाली कराते हुए जेसीबी से तोड़वाना शुरू कर दिया।
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अमर उजाला ने उठाई थी फोरलेन निर्माण की समस्या
फोरलेन निर्माण में बाधा बने अवैध निर्माण को दर्शाते हुए अमर उजाला ने फोरलेन निर्माण की राह में रोड़ा बना अतिक्रमण शीर्षक से रविवार को खबर प्रकाशित की थी। यह संभावना भी जताई थी कि अगर यहां अवैध निर्माण नहीं तोड़े गए तो फोरलेन की सूरत बिगड़ सकती है। अवैध निर्माण नगरपालिका, मलेरिया विभाग से जुड़ा होने के चलते पीडब्लूडी के अधिकारी भी निर्माण ढहाने के मामले में साफ-साफ बोलने से बच रहे थे। खबर छपते ही हरकत में आए जिला प्रशासन ने इन जगहों पर किए गए अवैध निर्माण को तोड़वा दिया।
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अवैध निर्माण पर वर्षों से चुप थे जिम्मेदार
प्रशासन ने जिस भूमि को पीडब्लूडी के हिस्से की बताते हुए दुकानें तोड़वाई, उनमें मोटर स्पेयर पार्ट्स, फल-सब्जी आदि की दुकानें थीं। भवन का निर्माण नगर पालिका ने कराया था और दुकानदारों को किराए पर दिया था। कार्रवाई के दौरान लोग कहते रहे कि अगर जमीन पीडब्लूडी की थी तो नगर पालिका को निर्माण की अनुमति क्यों दी गई। नगर पालिका की ओर से अवैध निर्माण के वक्त ही पीडब्लूडी के अफसरों ने क्यों चुप्पी साधी रही। मुख्य मार्ग पर यह हाल है तो अंदर के इलाकों में भी हालत और भी खराब होगी।
कोट
पीडब्लूडी ने नगरपालिका की 30 दुकानों को लेकर नोटिस जारी किया था। ये दुकानें पीडब्लूडी की जमीन में बनीं थीं। इसे जिला प्रशासन द्वारा तोड़वा दिया गया है।
-सीताराम गुप्त, एडीएम व प्रभारी ईओ नगरपालिका।
कोट
कुल आठ नोटिस पीडब्लूडी की ओर से जारी किए गए हैं। फोरलेन निर्माण में जहां भी बाधा आ रही है वहां अवैध निर्माण तोड़े जा रहे हैं।
-डीके चौधरी, एक्सईएन, पीडब्लूडी प्रांतीय खंड।