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पोषण पुनर्वास केंद्र ‘कुपोषित’
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जिला अस्पताल में स्थित पोषण पुर्नवास केंद्र में भर्ती बच्चे। संवाद
- फोटो : DEORIA
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पोषण पुनर्वास केंद्र ‘कुपोषित’
जिला अस्पताल में बनाया गया केंद्र है दुर्व्यवस्था का शिकार
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। जिला अस्पताल में कुपोषित बच्चों की सेहत को सुधारने के लिए बनाया गया पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) खुद कुपोषित हो गया है। इस वार्ड में शौचालय के पास तक बच्चों को भर्ती किया जाता है। पंखा, टीवी और बेड टूटे पड़े हुए हैं। इन्हीं के बीच कुपोषित बच्चों को भर्ती किया जा रहा है। शुक्रवार को केंद्र की पड़ताल में व्यवस्था में खामियां उजागर हुईं।
जिला अस्पताल स्थित दस बेड का पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) है। जहां पर कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों को चिह्नित कर केंद्र पहुंचाया जाता है। इस समय सात बच्चे भर्ती हैं। केंद्र का हाल यह है कि भवन का प्लास्टर और फर्श टूट चुका है। शौचालय का दरवाजा टूट हुआ है, जहां पर एक बेड भी है। मनोरंजन के लिए लगाया गया टीवी काफी दिनों से खराब है। स्वच्छ पेयजल के लिए लगा आरओ खराब है। स्टोर रूम कबाड़ बन चुका है। भोजनालय की स्थिति सही नहीं है। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि आखिर जिम्मेदारों का ध्यान क्यों नहीं है। मेन्यू के हिसाब से भोजन भी बच्चों और मां को नहीं मिलता है। जबकि नियम है कि एनआरसी (पोषण पुनर्वास केंद्र) में 14 दिन रखा जाता है। यहां पर उनकी नियमित जांच, वजन, नियमित पौष्टिक आहार दिया जाना चाहिए। जिम्मेदारों की उदासीनता से बच्चों को कुपोषित से पोषित करने की पूरी व्यवस्था लचर साबित हो रही है।
क्या मिलनी चाहिए सुविधा
देवरिया। केंद्र पर पांच वर्ष तक के कुपोषित बच्चे के साथ मां भी रहती हैं। यहां पर बच्चों के रहने, खाने के साथ ही उनके स्वास्थ्य की देखभाल की जाती है। दोनों को निशुल्क भोजन के साथ रहने के लिए 100 रुपये प्रतिदिन भत्ता के रूप में भी दिया जाता है। यहां तक कि लाने और ले जाने के लिए एंबुलेंस की सुविधा मुहैया कराई जाती है।
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यह मिलता है आहार
देवरिया। पोषण पुनर्वास केंद्र पर भर्ती होने वाले बच्चों को दूध, दलिया, फल, ब्रेड सहित अन्य प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ दिए जाते हैं। करीब 14 दिन रखा जाता है और सामान्य श्रेणी में आने के बाद घर भेज दिया जाता है। जिले में कुपोषित और अति कुपोषित बच्चे 2600 हैं
कोट
भोजन तो मिलता है लेकिन व्यवस्था सुधारने की जरूरत है। साफ-सफाई पर ध्यान दिया जाना चाहिए। डॉक्टर तो हर दिन राउंड पर आते हैं। आरओ मशीन खराब होने से दिक्कत हो रही है। इसे ठीक कराया जाए। 11 माह की बच्ची को लेकर करीब सप्ताह से भर्ती हूं।
-किरण देवी, मंडपा गांव
कोट
नौ दिन से बच्ची को लेकर यहां पर हूं लेकिन आरओ खराब होने से हैंडपंप का पानी पीना पड़ रहा है। भोजन में दूध तो मिलता है पर पौष्टिक आहार की कमी है। सफाई न होने से दुर्गंध आने से परेशानी हो रही है।
-रानी देवी, रमन छपरा गांव
कोट
सोलह माह के बच्चे को लेकर केंद्र पर सात दिनों से हूं। सबसे अधिक दिक्कत पानी और साफ- सफाई की है। कई जगह तो फर्श टूटने से चोट भी लगने का डर रहता है। पंखा ठीक है लेकिन लाइट की व्यवस्था सही नहीं है।
-रीमा, बरहज
कोट
एक सप्ताह से बच्चा भर्ती है। डॉक्टर तो आते हैं लेकिन व्यवस्था ठीक नहीं है। आधे से अधिक कमरे में कबाड़ भरा हुआ है। गर्मी के दिन में काफी परेशानी हो रही है। रात में वार्ड वीरान पड़ा रहता है। टीवी खराब होने से मन नहीं लगता है।
-अंजू देवी, छपिया गांव
वर्जन
भवन का ध्वस्तीरण किया जाना है। केंद्र को दूसरे भवन में शिफ्ट किया जाना है। बच्चों को पौष्टिक आहार और साथ रहने वाले को भोजन दिया जाता है। काफी संख्या में कुपोषित बच्चों को सामान्य श्रेणी में लाया जा चुका है।
-डॉ. एचके मिश्र, प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक
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जिला अस्पताल में बनाया गया केंद्र है दुर्व्यवस्था का शिकार
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। जिला अस्पताल में कुपोषित बच्चों की सेहत को सुधारने के लिए बनाया गया पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) खुद कुपोषित हो गया है। इस वार्ड में शौचालय के पास तक बच्चों को भर्ती किया जाता है। पंखा, टीवी और बेड टूटे पड़े हुए हैं। इन्हीं के बीच कुपोषित बच्चों को भर्ती किया जा रहा है। शुक्रवार को केंद्र की पड़ताल में व्यवस्था में खामियां उजागर हुईं।
जिला अस्पताल स्थित दस बेड का पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) है। जहां पर कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों को चिह्नित कर केंद्र पहुंचाया जाता है। इस समय सात बच्चे भर्ती हैं। केंद्र का हाल यह है कि भवन का प्लास्टर और फर्श टूट चुका है। शौचालय का दरवाजा टूट हुआ है, जहां पर एक बेड भी है। मनोरंजन के लिए लगाया गया टीवी काफी दिनों से खराब है। स्वच्छ पेयजल के लिए लगा आरओ खराब है। स्टोर रूम कबाड़ बन चुका है। भोजनालय की स्थिति सही नहीं है। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि आखिर जिम्मेदारों का ध्यान क्यों नहीं है। मेन्यू के हिसाब से भोजन भी बच्चों और मां को नहीं मिलता है। जबकि नियम है कि एनआरसी (पोषण पुनर्वास केंद्र) में 14 दिन रखा जाता है। यहां पर उनकी नियमित जांच, वजन, नियमित पौष्टिक आहार दिया जाना चाहिए। जिम्मेदारों की उदासीनता से बच्चों को कुपोषित से पोषित करने की पूरी व्यवस्था लचर साबित हो रही है।
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क्या मिलनी चाहिए सुविधा
देवरिया। केंद्र पर पांच वर्ष तक के कुपोषित बच्चे के साथ मां भी रहती हैं। यहां पर बच्चों के रहने, खाने के साथ ही उनके स्वास्थ्य की देखभाल की जाती है। दोनों को निशुल्क भोजन के साथ रहने के लिए 100 रुपये प्रतिदिन भत्ता के रूप में भी दिया जाता है। यहां तक कि लाने और ले जाने के लिए एंबुलेंस की सुविधा मुहैया कराई जाती है।
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यह मिलता है आहार
देवरिया। पोषण पुनर्वास केंद्र पर भर्ती होने वाले बच्चों को दूध, दलिया, फल, ब्रेड सहित अन्य प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ दिए जाते हैं। करीब 14 दिन रखा जाता है और सामान्य श्रेणी में आने के बाद घर भेज दिया जाता है। जिले में कुपोषित और अति कुपोषित बच्चे 2600 हैं
कोट
भोजन तो मिलता है लेकिन व्यवस्था सुधारने की जरूरत है। साफ-सफाई पर ध्यान दिया जाना चाहिए। डॉक्टर तो हर दिन राउंड पर आते हैं। आरओ मशीन खराब होने से दिक्कत हो रही है। इसे ठीक कराया जाए। 11 माह की बच्ची को लेकर करीब सप्ताह से भर्ती हूं।
-किरण देवी, मंडपा गांव
कोट
नौ दिन से बच्ची को लेकर यहां पर हूं लेकिन आरओ खराब होने से हैंडपंप का पानी पीना पड़ रहा है। भोजन में दूध तो मिलता है पर पौष्टिक आहार की कमी है। सफाई न होने से दुर्गंध आने से परेशानी हो रही है।
-रानी देवी, रमन छपरा गांव
कोट
सोलह माह के बच्चे को लेकर केंद्र पर सात दिनों से हूं। सबसे अधिक दिक्कत पानी और साफ- सफाई की है। कई जगह तो फर्श टूटने से चोट भी लगने का डर रहता है। पंखा ठीक है लेकिन लाइट की व्यवस्था सही नहीं है।
-रीमा, बरहज
कोट
एक सप्ताह से बच्चा भर्ती है। डॉक्टर तो आते हैं लेकिन व्यवस्था ठीक नहीं है। आधे से अधिक कमरे में कबाड़ भरा हुआ है। गर्मी के दिन में काफी परेशानी हो रही है। रात में वार्ड वीरान पड़ा रहता है। टीवी खराब होने से मन नहीं लगता है।
-अंजू देवी, छपिया गांव
वर्जन
भवन का ध्वस्तीरण किया जाना है। केंद्र को दूसरे भवन में शिफ्ट किया जाना है। बच्चों को पौष्टिक आहार और साथ रहने वाले को भोजन दिया जाता है। काफी संख्या में कुपोषित बच्चों को सामान्य श्रेणी में लाया जा चुका है।
-डॉ. एचके मिश्र, प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक