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स्वरोजगार से आत्मनिर्भर बन रहीं शहर की गरीब महिलाएं
ब्यूरो/अमर उजाला देवरिया
Updated Sun, 15 Apr 2018 10:31 PM IST
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समूह बनाकर स्वरोजगार में जुटी महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। अपना उद्योग लगाकर परिवार चलाना कोई इन गरीब महिलाओं से सीखे। एक-दो नहीं बल्कि 13 सौ से अधिक शहरी महिलाएं इन दिनों अपने उत्पाद से नामी-गिरामी कंपनियों को टक्कर देने में लगी हैं। प्रचार-प्रसार की व्यवस्था नहीं होने के बावजूद इनके उत्पाद की क्वालिटी हर घरों में पसंद की जाने लगी है। मसाला, पापड़, चिप्स, मिक्स आचार, सेजवान चटनी आदि का चटखारा ले चुके लोग ब्रांडेड कंपनियों के नाम भूलने लगे हैं। यह सब पं. दीनदयाल अंत्योदय योजना राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के उप घटक योजना के तहत संभव हुआ है।
शहरी महिलाओं को स्वरोजगार मुहैया कराने के उद्देश्य से वर्ष 2014-15 में केंद्र सरकार ने इस योजना की शुरुआत की। वित्तीय वर्ष 2015-16 में 42, वर्ष 2016-17 और 18 में करीब दस-दस महिलाओं के 100 समूह बनाए गए। इस समय 130 समूह बनाकर शहर की महिलाएं तरह-तरह के उद्योग संचालित कर रही हैं। इनमें 15 से 20 ऐसे समूह हैं जो जिनका विस्तार ज्यादा है। तमाम तरह के खाद्य पदार्थों के अलावा कढ़ाई युक्त पर्दे, चादर, खिलौने, अगरबत्ती आदि बनाकर महिलाएं दुकानों पर थोक रेट में बेच रही हैं। मंथली हिसाब बनाकर घर खर्च तो निकाल ही रही हैं, इनकी पूंजी का भी विस्तार हो रहा है। महिलाओं की मेहनत और लगन को देखते हुए डूडा इनके प्रोडक्ट की मार्केटिंग ग्रामीण इलाकों से लगायत अन्य शहरों में भी कराने की तैयारी में जुटा है।
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शहरी महिलाओं को स्वरोजगार मुहैया कराने के उद्देश्य से वर्ष 2014-15 में केंद्र सरकार ने इस योजना की शुरुआत की। वित्तीय वर्ष 2015-16 में 42, वर्ष 2016-17 और 18 में करीब दस-दस महिलाओं के 100 समूह बनाए गए। इस समय 130 समूह बनाकर शहर की महिलाएं तरह-तरह के उद्योग संचालित कर रही हैं। इनमें 15 से 20 ऐसे समूह हैं जो जिनका विस्तार ज्यादा है। तमाम तरह के खाद्य पदार्थों के अलावा कढ़ाई युक्त पर्दे, चादर, खिलौने, अगरबत्ती आदि बनाकर महिलाएं दुकानों पर थोक रेट में बेच रही हैं। मंथली हिसाब बनाकर घर खर्च तो निकाल ही रही हैं, इनकी पूंजी का भी विस्तार हो रहा है। महिलाओं की मेहनत और लगन को देखते हुए डूडा इनके प्रोडक्ट की मार्केटिंग ग्रामीण इलाकों से लगायत अन्य शहरों में भी कराने की तैयारी में जुटा है।
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