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पराली जलाने के दर्ज 62 मुकदमों को वापस लेने की तैयारी
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पराली जलाने के दर्ज 62 मुकदमों को वापस लेने की तैयारी
देवरिया। फसलों के अवशेष (पराली) जलाने के करीब तीन साल के दौरान जनपद में 62 मुकदमों किसानों पर दर्ज है। अभी पुलिस अफसरों के पास शासन का निर्देश तो नहीं आया है लेकिन सीएम की घोषणा के बाद इसको लेकर पुलिस गंभीर है क्योंकि मुकदमा की वापसी होनी है। पुलिस इसका ब्योरा तैयार कर रही है कि कितने मामलों में कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है और कितने की विवेचना लंबित है। वैसे इस साल जनपद में पराली जलाने के एक भी मुकदमें दर्ज नहीं हुए है।
किसानों पर पराली जालने के 2018 से 2021 तक विभिन्नों में 62 मुकदमा दर्ज हुआ है। इसमें सबसे अधिक 2018 और 2019 में हुआ है। 2019 में करीब 20 मामले दर्ज हुए है। जबकि इस साल जनवरी माह से अगस्त तक पराली जलाने की कोई घटना जनपद में नहीं हुई। वैसे पराली जलाने की घटना गेहूं की कटाई के बाद अप्रैल, मई, जून और धान की कटाई होने के बाद होती। इससे पर्यावरण को काफी नुकसान होता है। इन मामले मुकदमा दर्ज होने के बाद आर्थिक दण्ड का प्राविधान है।हालांकि दिनों में सरकार ने पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ मुकदमों को वापस लेने का फैसला लिया है। लेकिन इस तरह का अभी कोई आदेश जिले के आला अफसरों तक नहीं पहुंचा है। इसके कारण मुकदमों की स्थित जस की तस है।
कोट
अभी कोई आदेश मुकदमा वापस करने का नहीं आया है। लेकिन ऐसे मामलों का ब्योरा तैयार किया जाएगा। अगर कोई शासन का निर्देश आएगा तो उसका पालन कराया जाएगा।
डा.श्रीपति मिश्र,एसपी
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देवरिया। फसलों के अवशेष (पराली) जलाने के करीब तीन साल के दौरान जनपद में 62 मुकदमों किसानों पर दर्ज है। अभी पुलिस अफसरों के पास शासन का निर्देश तो नहीं आया है लेकिन सीएम की घोषणा के बाद इसको लेकर पुलिस गंभीर है क्योंकि मुकदमा की वापसी होनी है। पुलिस इसका ब्योरा तैयार कर रही है कि कितने मामलों में कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है और कितने की विवेचना लंबित है। वैसे इस साल जनपद में पराली जलाने के एक भी मुकदमें दर्ज नहीं हुए है।
किसानों पर पराली जालने के 2018 से 2021 तक विभिन्नों में 62 मुकदमा दर्ज हुआ है। इसमें सबसे अधिक 2018 और 2019 में हुआ है। 2019 में करीब 20 मामले दर्ज हुए है। जबकि इस साल जनवरी माह से अगस्त तक पराली जलाने की कोई घटना जनपद में नहीं हुई। वैसे पराली जलाने की घटना गेहूं की कटाई के बाद अप्रैल, मई, जून और धान की कटाई होने के बाद होती। इससे पर्यावरण को काफी नुकसान होता है। इन मामले मुकदमा दर्ज होने के बाद आर्थिक दण्ड का प्राविधान है।हालांकि दिनों में सरकार ने पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ मुकदमों को वापस लेने का फैसला लिया है। लेकिन इस तरह का अभी कोई आदेश जिले के आला अफसरों तक नहीं पहुंचा है। इसके कारण मुकदमों की स्थित जस की तस है।
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कोट
अभी कोई आदेश मुकदमा वापस करने का नहीं आया है। लेकिन ऐसे मामलों का ब्योरा तैयार किया जाएगा। अगर कोई शासन का निर्देश आएगा तो उसका पालन कराया जाएगा।
डा.श्रीपति मिश्र,एसपी