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पैरा ताइक्वांडो के खिलाड़ी रंजन के सपनों पर तंगी का ग्रहण

Sun, 15 Sep 2019 11:45 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 15 Sep 2019 11:45 PM IST
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दिब्यांग ताईक्वान्डो खिलाडी रंजन कुमार। - फोटो : DEORIA
फोटो समाचार...
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पैरा ताइक्वांडो के खिलाड़ी रंजन के सपनों पर तंगी का ग्रहण
कनाडा में होने वाली वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए हुआ है चयन
नेताओं, अफसरों के दर पर दस्तक देने के बाद भी मिली मायूसी
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। एक हादसे में अपना दायां हाथ खो चुके शहर के एक होनहार खिलाड़ी ने कनाडा में होने वाले अंतरराष्ट्रीय पैरा ताइक्वांडो ओपेन चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई कर लिया है। अपने खेल के जरिए विदेशी भूमि पर तिरंगा फहराने के लिए वह उत्साहित है, मगर मुसीबत यह है कि उसके पास कनाडा जाने और वहां के खर्च उठाने के लिए धन ही नहीं है। स्पांसर की तलाश में वह कई दिनों से दर-दर भटक रहा है। नेताओं-अफसरों से गुहार लगा चुका है। बावजूद इसके देवरहा बाबा और बाबा राघवदास जैसे दानवीरों की इस कर्मभूमि पर उसे कहीं से भी कोई मदद नहीं मिली है। ऐसे में उसके सपनों पर ग्रहण लगता दिख रहा है।
शहर के परशुराम चौक भुजौली कॉलोनी के किराना दुकानदार रामेश्वर पासवान कीतीन संतानों में दूसरे नंबर के रंजन कुमार के हौसले की दाद तो देनी ही पड़ेगी। शारीरिक अक्षमता को सफलता में बाधक मानने वालों के लिए वह नजीर हैं। पांच साल की उम्र में रामलीला मैदान के पास स्थित मकान की छत पर खेलने के दौरान 11 हजार वोल्ट के तार से छू जाने पर वह दुर्घटना के शिकार हो गए। उपचार के दौरान उसका दायां हाथ काटना पड़ा। इसके बावजूद रंजन ने हार नहीं मानी। रंजन ने 11 साल की उम्र में एक हाथ से ही क्रिकेट और ताइक्वांडो में अपनी पहचान बनाने की ठान ली। पैरा क्रिकेट की यूपी टीम में उसका चयन हुआ। बाद में चंडीगढ़ टीम से खेलना शुरू किया। ताइक्वांडो में उसकी प्रतिभा का कोई सानी नहीं। पिछले माह जयपुर में आयोजित नेशनल पैरा ताइक्वांडो चैंपियनशिप में अंडर-61 किग्रा वर्ग में हिमाचल प्रदेश के खिलाड़ी को फाइनल में हराकर रंजन ने इंटरनेशनल प्रतियोगिता के लिए क्वालीफाई कर लिया।
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कनाडा जाने को 1.40 लाख का इंतजाम हुआ मुश्किल
स्पांसरशिप नहीं मिलने से रंजन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कनाडा के मांट्रियल शहर में तीन से छह अक्तूबर तक प्रतियोगिता होनी है। वहां जाने के लिए फ्लाइट टिकट 98 हजार, इंट्री फीस सात हजार, प्लेयर किट और यूनिफार्म 15 हजार, होटल व भोजन 20 हजार को मिलाकर कुल 1.40 लाख का खर्च उसे सीधा परेशान कर रहा है। घर की माली स्थिति ऐसी नहीं है कि इसका इंतजाम हो सके। रंजन ने बताया कि स्पांसरशिप के लिए वह दिल्ली, लखनऊ के खेल प्रशासकों व जनप्रतिनिधियों के अलावा शहर के कई धनाढय लोगों से मिला, लेकिन किसी ने कोई खास रुचि नहीं दिखाई।
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होनहार कर रहा टोकियो ओलंपिक की तैयारी
सिर्फ ताइक्वांडो ही नहीं रंजन क्रिकेट और फुटबॉल के भी अच्छे खिलाड़ी हैं। पैरा ताइक्वांडो में वह पोलैंड, लंदन, कोरिया जैसी जगहों पर तीन इंटरनेशनल व पांच नेशनल खेल चुके हैं। इंटनेशनल स्तर पर अपने भार वर्ग में वह विश्व में 20वें नंबर के खिलाड़ी हैं। उन्होंने एक साल बाद होने वाले टोकियो ओलंपिक की तैयारियां अभी से शुरू कर दी है।

टीम इंडिया को स्वर्ण पदक दिलाने का सपना
रंजन ने बताया कि विदेशों की तरह यहां भी दिव्यांग खिलाड़ियों को स्पांसर मिलें तो वे अपने गेम में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। वे सामान्य व्यक्ति से ज्यादा मेहनत करते हैं। परिवार व लोगों का सपोर्ट मिले तो वह अपने गेम में टीम इंडिया का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊंचा कर सकते हैं।
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