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Deoria News: बड़ी कंपनियों के उत्पाद को टक्कर देगी आर्गेनिक हल्दी...देव हेल्थी

Thu, 16 Apr 2026 12:15 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 16 Apr 2026 12:15 AM IST
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Organic turmeric will compete with the products of big companies...Dev Healthy
अमर उजाला ब्यूरो
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देवरिया। औषधीय गुणों से भरपूर देवरिया की आर्गेनिक हल्दी जल्द ही बाजार में बिकने वाली ब्रांडेड कंपनियों की हल्दी को टक्कर देगी। अपने खास कैंसररोधी गुणों वाली यह आर्गेनिक हल्दी बाजार में बिकने वाली अन्य कंपनियों की आर्गेनिक हल्दी से करीब 200 रुपये किलो सस्ती होगी।
इस हल्दी को देव हेल्थी नाम दिया गया है और इसकी ब्रांडिंग भी शुरू हो गई है। अभी इस आर्गेनिक हल्दी के उत्पादन से करीब तीन साै किसान जुड़े हैं।
खामपार के जमुना सिंह प्रोसेसिंग यूनिट में तैयार इस आर्गेनिक हल्दी को स्वयं सहायता समूहों के जरिए बेचा जा रहा है। अब तक करीब पांच क्विंटल हल्दी की बिक्री हुई है। इस साल उद्यान विभाग ने जिले में हल्दी का वर्तमान रकबा 15 हेक्टेयर को बढ़ाकर 30 हेक्टेयर करने का लक्ष्य रखा है।
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सीडीओ राजेश कुमार सिंह ने बताया कि हमारी योजना है कि समूह से जुड़े किसान हल्दी उत्पादित करेंगे, जिसे प्रोसेसिंग यूनिट बाजार रेट पर खरीदकर पिसाई और पैकिंग करेगी।
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बिना रंगे भी अपनी चमक से अलग से दिखेगी यह हल्दी : हल्दी की खेती के लिए भाटपार और बनकटा इलाके की मिट्टी उपयुक्त है। यहां देसी किस्म की जो हल्दी बोई जाती है, उसकी गांठ छोटी होती है और उसका रंग गहरा पीला होता है।
जबकि अभी बाजार में जो हल्दी मिलती है, उसकी फांक बड़ी होती है और रंग हल्का पीला होता है। इसे अधिक पीला बनाने के लिए प्रोसेसिंग के दौरान पीला रंग डालकर रंगा जाता है।
इसीलिए उस हल्दी में लेड (शीशा) के अवयव आ जाते हैं। देव हेल्थी में जिस हल्दी का उपयोगा होगा, उसे प्रोसेसिंग के दौरान रंगा नहीं जाएगा, जिससे उसका प्राकृतिक गुण बना रहेगा।
पहले देवरिया से हल्दी जाती थी प्रयागराज : जिले का भाटपार और बनकटा ब्लॉक महज 10 साल पहले तक हल्दी उत्पादन का बड़ा केंद्र था। बंगरा बाजार, खामपार समेत आसपास के 50 से अधिक गांव के किसान हल्दी की खेती करते थे।
हल्दी की खेती करने वाले किसान राजकिशोर कुशवाहा, रामेश्वर सिंह आदि का कहना है कि फसल कटने के बाद व्यापारी आते थे और इसे खरीदकर भाटपार रानी और भटनी स्टेशनों पर ले जाते थे। वहां से इस हल्दी को ट्रेन से प्रयागराज ले जाते थे। लेकिन बाजार खत्म होने के बाद किसानों ने हल्दी की खेती छोड़ दी थी। अब उद्यान विभाग की तरफ से फिर इसे बढ़ावा दिया जा रहा है।

सीडीओ राजेश सिंह ने शुरू कराया एफपीओ : बीते दिसंबर में जिले में सीडीओ राजेश कुमार सिंह ने हल्दी उत्पादक किसानों से बात करके उनकी पीड़ा को समझा और फिर यहां उत्पादित हल्दी को बाजार उपलब्ध कराने के लिए स्वयं सहायता समूह के जरिए प्रयास शुरू किया। उत्पादित हल्दी के प्रोसेसिंग की समस्या का समाधान करने के लिए खामपार के एक व्यक्ति को प्रोसेसिंग यूनिट लगाने के लिए प्रेरित किया गया। इसके बाद एक कंपनी बनाकर उसके प्रोडक्ट को नाम दिया गया देव हेल्थी।
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