{"_id":"6ab81ad70d71d42da008238a","slug":"order-for-the-issuance-of-a-succession-certificate-deoria-news-c-208-1-deo1049-192811-2026-09-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Deoria News: उत्तराधिकार प्रमाणपत्र जारी करने का आदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Deoria News: उत्तराधिकार प्रमाणपत्र जारी करने का आदेश
Sun, 27 Sep 2026 12:49 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sun, 27 Sep 2026 12:49 AM IST
विज्ञापन
देवरिया। सिविल जज जूनियर डिविजन कक्ष संख्या-10 दीक्षा त्रिपाठी की अदालत ने दिवंगत धर्मनाथ यादव की तीन एलआईसी पॉलिसियों में जमा 2,81,502 रुपये और उस पर देय ब्याज के लिए उनके पुत्र अभिषेक यादव और पुत्री पूजा यादव के पक्ष में उत्तराधिकार प्रमाणपत्र जारी करने का आदेश दिया है। अदालत ने दोनों की ओर से प्रस्तुत प्रार्थना पत्र को आपत्ति के अभाव में स्वीकार कर लिया।
मामले के अनुसार, धर्मनाथ यादव की सात अप्रैल 2022 को भटनी बाजार स्थित आवास पर मृत्यु हो गई थी। उनके पुत्र अभिषेक और पुत्री पूजा ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर बताया कि उनके अलावा मृतक का कोई अन्य उत्तराधिकारी नहीं है। विपक्षी मनीष यादव ने भी प्रमाणपत्र जारी किए जाने पर कोई आपत्ति नहीं की। इसके समर्थन में मृत्यु प्रमाणपत्र, एलआईसी का पत्र और परिवार रजिस्टर की नकल समेत अन्य दस्तावेज दाखिल किए गए।
अदालत ने आदेश दिया कि दोनों उत्तराधिकारी क्षतिपूर्ति बंधपत्र और अंडरटेकिंग दाखिल करेंगे। भविष्य में कोई अन्य वैधानिक वारिस सामने आकर अपना अधिकार साबित करता है तो प्रमाणपत्र धारकों को नियमानुसार रकम न्यायालय में जमा करनी होगी। साथ ही, मृतक की कोई वसीयत सामने आने पर उत्तराधिकार प्रमाणपत्र निष्प्रभावी माना जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
मामले के अनुसार, धर्मनाथ यादव की सात अप्रैल 2022 को भटनी बाजार स्थित आवास पर मृत्यु हो गई थी। उनके पुत्र अभिषेक और पुत्री पूजा ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर बताया कि उनके अलावा मृतक का कोई अन्य उत्तराधिकारी नहीं है। विपक्षी मनीष यादव ने भी प्रमाणपत्र जारी किए जाने पर कोई आपत्ति नहीं की। इसके समर्थन में मृत्यु प्रमाणपत्र, एलआईसी का पत्र और परिवार रजिस्टर की नकल समेत अन्य दस्तावेज दाखिल किए गए।
विज्ञापन
अदालत ने आदेश दिया कि दोनों उत्तराधिकारी क्षतिपूर्ति बंधपत्र और अंडरटेकिंग दाखिल करेंगे। भविष्य में कोई अन्य वैधानिक वारिस सामने आकर अपना अधिकार साबित करता है तो प्रमाणपत्र धारकों को नियमानुसार रकम न्यायालय में जमा करनी होगी। साथ ही, मृतक की कोई वसीयत सामने आने पर उत्तराधिकार प्रमाणपत्र निष्प्रभावी माना जाएगा।
विज्ञापन