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Deoria News: पांच साल में डेढ़ लाख पेड़ों की हो गई कटाई, 10 प्रतिशत भी तैयार नहीं कर पाए
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गुल हो गई शहर की हरियाली, नहीं मिल पा रही पेड़ों की छांव, चिलचिलाती धूप में परेशान हो रहे राहगीर
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। फोरलेन निर्माण के दौरान देवरिया-गोरखपुर मार्ग पर खरोह चौराहा से सलेमपुर तक डेढ़ लाख पौधे काट दिए गए। शहर में ही दो से अधिक छायादार वृक्ष काटे गए। अफसरों ने वादा किया था कि इसके दसगुना पौधा लगा देंगे, लेकिन हकीकत यह है कि अभी तक दस प्रतिशत भी पौधे तैयार नहीं हुए। कागजीखानापूर्ति कर पौधारोपण की इतिश्री की गई है। जुलाई माह नजदीक आ गया और फिर पौधारोपण की तैयारी शुरू हो गई है।
जिले में जितने पेड़ तैयार नहीं हो रहे, उससे अधिक की कटान हो जा रही है। बीते पांच साल में करीब डेढ़ लाख पेड़ काटे गए हैं। वन निगम ने ही 50 हजार पेड़ों की कटान कराई है। इनमें कुछ पेड़ सड़क चौड़ीकरण के दौरान काटे गए तो कुछ सूख चुके थे। इसके अलावा जो पेड़ चोरी हो गए या आम लोगों ने बिना अनुमति के कटवा दिए उनका रिकाॅर्ड वन विभाग के पास नहीं है। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार फोरलेन निर्माण में चैनेज 125 किमी से 174 किमी के बीच 28 हजार 551 पेड़ काटे गए हैं। वित्तीय वर्ष 2018-19 में छह हजार 722 पेड़ वन निगम ने कटवाए। वित्तीय सत्र 2019-20 में 565 व 2020-21 में 622 सूखे पेड़ काटे गए। पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से गांवों की हरियाली तो गायब हुई ही है शहर भी रूखा-सूखा दिखने लगा है। पुरवा चौराहा से आईटीआई तक तकरीबन चार सौ पेड़ फोरलेन निर्माण के दौरान काटे गए थे। इनकी 10 प्रतिशत भी भारपाई नहीं हो पाई है।
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गर्मी में याद आने लगे पुराने पेड़
पांच साल पहले शहर ऐसा न था सड़कें संकरी जरूर थीं मगर इसका स्वरूप सुहावना था। भरी दोपहरी में जहां कदम थिरके वहीं पेड़ों की छांवा, मिल जाती थी। विकास भवन आते तो गेट के पास इमली का पेड़, कोऑपरेटिव चौराहा के पास बरगद, कलेक्ट्रेट के सामने बरगद तले मोती के चाय की दुकान पर सारी थकान दूर हो जाती थी। विकास के रथ पर सवार इस शहर से हरियाली गायब हो गई है। यह शिकायत थी बनकटा गांव निवासी भोला तिवारी की।वह पड़ोसी से जमीन विवाद के मामले में अधिवक्ता से सलाह लेने मंगलवार को दीवानी न्यायालय आए थे। पांच साल बाद शहर की बदली तस्वीर देख उन्हें खुशी तो हुई लेकिन सड़क किनारे कहीं भी पेड़ों की छांव न मिलने की पीड़ा उनके मन को साल रही थी।
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वरिष्ठ अधिवक्ता गजेंद्र मिश्रा से बातचीत के दौरान पंकज, रमेश मल्ल, रामअवध आदि का कहना था कि पुरवा चौराहा से जिला कारागार तक पीपल, नीम, पाकड़, बरगद, अशोक, अर्जुन, इमली आदि के करीब चार सौ पेड़ थे जो काट दिए गए। इनकी जगह 10 पेड़ भी नहीं तैयार किए जा सके हैं। राहगीरों को कहीं छांव नहीं मिल पा रही है। चाय की दुकानें भी ज्यादातर टीनशेड में चल रही हैं। यहां बैठने पर शरीर उबलने जैसा महसूस होता है।
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इनसेट
जितने पेड़ कटे उसके दस गुना लगाने का है नियम
वन विभाग के अनुसार जितने पेड़ काटने की अनुमति दी जाती है उसके दस गुना लगवाने की शर्त भी रखी जाती है। फोरलेन निर्माण के दौरान वर्ष 2017 में जो पेड़ काटे गए थे उसकी क्षतिपूर्ति के लिए 64 लाख 21 हजार 751 रुपये की धनराशि लोक निर्माण विभाग से क्षतिपूरक वनीकरण कोष प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण के खाते में जमा कराई गई है।
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हर व्यक्ति तैयार करे एक वृक्ष
शहर या गांव को हरा भरा बनाने के लिए हर व्यक्ति कम से कम एक पौधा अपने जन्मदिन पर लगाए। उसकी नियमित देखभाल करे। ताकि वह वृक्ष बन सके। ऐसा करने से पूरे जिले में हरियाली लौट आएगी। - लवली राय, पर्यावरण प्रहरी
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झूठी कसमें खाते हैं लोग
पर्यावरण दिवस के अवसर पर शहर से लेकर गांव तक पौधारोपण किया जाता है। लोग पर्यावरण संरक्षण के लिए कसमें तो खाते हैं मगर, घर लौटने के बाद भूल जाते हैं। बहुत कम लोग दोबारा पौधों को देखने जाते हैं। यही कारण है कि हर साल एक लाख से अधिक पौधे लगाए जाते हैं मगर तैयार हजार-पांच सौ भी नहीं होते। - राकेश यादव, भीमपुर गौरा
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वर्जन
फोरलेन निर्माण के दौरान ही ज्यादा संख्या में पेड़ काटे गए। इसके अलावा बहुत कम लोगों को पेड़ कटवाने की अनुमति दी जाती है। जितने पेड़ काटे जाते हैं, हमारी कोशिश रहती है कि उसके दस गुना पौधे लगवाएं। फोरलेन किनारे पौधे लगे हैं जल्द ही वह पेड़ बन जाएंगे।
- जगदीश आर, डीएफओ वन विभाग
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इस वर्ष चालीस लाख पौधे लगाने का है लक्ष्य
सरकारी विभागों ने पहले जो पौधे लगाए उनका तो अब पता नहीं है, लेकिन नए वित्तीय वर्ष में उन्हें नया पौधरोपण का लक्ष्य शासन से जरूर मिल गया है। इस बार 27 विभाग मिलकर जिले में करीब 40 लाख पौधे लगवाएंगे। अगर बीते पांच वर्षों की बात करें तो जनपद में करीब 1,40,00,000 पौधे लगाए गए हैं। जिस तेजी से पौधे लगाए गए, अगर उसी रफ्तार से उनका रखरखाव हुआ होता तो पूरा का पूरा जंगल खड़ा हो गया होता। वैसे कागज में पौधों की देखभाल करने वाले विभागों की हकीकत धरातल पर कुछ और ही है।
वर्ष लक्ष्य प्रगति
2018-19 1117718 1153390
2019-20 3933120 3972344
2020-21 2622390 2652956
2021-22 3088598 3116677
2022-23 3337724 3319876
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। फोरलेन निर्माण के दौरान देवरिया-गोरखपुर मार्ग पर खरोह चौराहा से सलेमपुर तक डेढ़ लाख पौधे काट दिए गए। शहर में ही दो से अधिक छायादार वृक्ष काटे गए। अफसरों ने वादा किया था कि इसके दसगुना पौधा लगा देंगे, लेकिन हकीकत यह है कि अभी तक दस प्रतिशत भी पौधे तैयार नहीं हुए। कागजीखानापूर्ति कर पौधारोपण की इतिश्री की गई है। जुलाई माह नजदीक आ गया और फिर पौधारोपण की तैयारी शुरू हो गई है।
जिले में जितने पेड़ तैयार नहीं हो रहे, उससे अधिक की कटान हो जा रही है। बीते पांच साल में करीब डेढ़ लाख पेड़ काटे गए हैं। वन निगम ने ही 50 हजार पेड़ों की कटान कराई है। इनमें कुछ पेड़ सड़क चौड़ीकरण के दौरान काटे गए तो कुछ सूख चुके थे। इसके अलावा जो पेड़ चोरी हो गए या आम लोगों ने बिना अनुमति के कटवा दिए उनका रिकाॅर्ड वन विभाग के पास नहीं है। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार फोरलेन निर्माण में चैनेज 125 किमी से 174 किमी के बीच 28 हजार 551 पेड़ काटे गए हैं। वित्तीय वर्ष 2018-19 में छह हजार 722 पेड़ वन निगम ने कटवाए। वित्तीय सत्र 2019-20 में 565 व 2020-21 में 622 सूखे पेड़ काटे गए। पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से गांवों की हरियाली तो गायब हुई ही है शहर भी रूखा-सूखा दिखने लगा है। पुरवा चौराहा से आईटीआई तक तकरीबन चार सौ पेड़ फोरलेन निर्माण के दौरान काटे गए थे। इनकी 10 प्रतिशत भी भारपाई नहीं हो पाई है।
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पांच साल पहले शहर ऐसा न था सड़कें संकरी जरूर थीं मगर इसका स्वरूप सुहावना था। भरी दोपहरी में जहां कदम थिरके वहीं पेड़ों की छांवा, मिल जाती थी। विकास भवन आते तो गेट के पास इमली का पेड़, कोऑपरेटिव चौराहा के पास बरगद, कलेक्ट्रेट के सामने बरगद तले मोती के चाय की दुकान पर सारी थकान दूर हो जाती थी। विकास के रथ पर सवार इस शहर से हरियाली गायब हो गई है। यह शिकायत थी बनकटा गांव निवासी भोला तिवारी की।वह पड़ोसी से जमीन विवाद के मामले में अधिवक्ता से सलाह लेने मंगलवार को दीवानी न्यायालय आए थे। पांच साल बाद शहर की बदली तस्वीर देख उन्हें खुशी तो हुई लेकिन सड़क किनारे कहीं भी पेड़ों की छांव न मिलने की पीड़ा उनके मन को साल रही थी।
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वरिष्ठ अधिवक्ता गजेंद्र मिश्रा से बातचीत के दौरान पंकज, रमेश मल्ल, रामअवध आदि का कहना था कि पुरवा चौराहा से जिला कारागार तक पीपल, नीम, पाकड़, बरगद, अशोक, अर्जुन, इमली आदि के करीब चार सौ पेड़ थे जो काट दिए गए। इनकी जगह 10 पेड़ भी नहीं तैयार किए जा सके हैं। राहगीरों को कहीं छांव नहीं मिल पा रही है। चाय की दुकानें भी ज्यादातर टीनशेड में चल रही हैं। यहां बैठने पर शरीर उबलने जैसा महसूस होता है।
इनसेट
जितने पेड़ कटे उसके दस गुना लगाने का है नियम
वन विभाग के अनुसार जितने पेड़ काटने की अनुमति दी जाती है उसके दस गुना लगवाने की शर्त भी रखी जाती है। फोरलेन निर्माण के दौरान वर्ष 2017 में जो पेड़ काटे गए थे उसकी क्षतिपूर्ति के लिए 64 लाख 21 हजार 751 रुपये की धनराशि लोक निर्माण विभाग से क्षतिपूरक वनीकरण कोष प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण के खाते में जमा कराई गई है।
हर व्यक्ति तैयार करे एक वृक्ष
शहर या गांव को हरा भरा बनाने के लिए हर व्यक्ति कम से कम एक पौधा अपने जन्मदिन पर लगाए। उसकी नियमित देखभाल करे। ताकि वह वृक्ष बन सके। ऐसा करने से पूरे जिले में हरियाली लौट आएगी। - लवली राय, पर्यावरण प्रहरी
झूठी कसमें खाते हैं लोग
पर्यावरण दिवस के अवसर पर शहर से लेकर गांव तक पौधारोपण किया जाता है। लोग पर्यावरण संरक्षण के लिए कसमें तो खाते हैं मगर, घर लौटने के बाद भूल जाते हैं। बहुत कम लोग दोबारा पौधों को देखने जाते हैं। यही कारण है कि हर साल एक लाख से अधिक पौधे लगाए जाते हैं मगर तैयार हजार-पांच सौ भी नहीं होते। - राकेश यादव, भीमपुर गौरा
वर्जन
फोरलेन निर्माण के दौरान ही ज्यादा संख्या में पेड़ काटे गए। इसके अलावा बहुत कम लोगों को पेड़ कटवाने की अनुमति दी जाती है। जितने पेड़ काटे जाते हैं, हमारी कोशिश रहती है कि उसके दस गुना पौधे लगवाएं। फोरलेन किनारे पौधे लगे हैं जल्द ही वह पेड़ बन जाएंगे।
- जगदीश आर, डीएफओ वन विभाग
इस वर्ष चालीस लाख पौधे लगाने का है लक्ष्य
सरकारी विभागों ने पहले जो पौधे लगाए उनका तो अब पता नहीं है, लेकिन नए वित्तीय वर्ष में उन्हें नया पौधरोपण का लक्ष्य शासन से जरूर मिल गया है। इस बार 27 विभाग मिलकर जिले में करीब 40 लाख पौधे लगवाएंगे। अगर बीते पांच वर्षों की बात करें तो जनपद में करीब 1,40,00,000 पौधे लगाए गए हैं। जिस तेजी से पौधे लगाए गए, अगर उसी रफ्तार से उनका रखरखाव हुआ होता तो पूरा का पूरा जंगल खड़ा हो गया होता। वैसे कागज में पौधों की देखभाल करने वाले विभागों की हकीकत धरातल पर कुछ और ही है।
वर्ष लक्ष्य प्रगति
2018-19 1117718 1153390
2019-20 3933120 3972344
2020-21 2622390 2652956
2021-22 3088598 3116677
2022-23 3337724 3319876