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Deoria News: बाईपास की राह में अड़चन किसान ही नहीं तेल पाइप लाइन भी
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बाईपास के लिए हरैया गांव के खेत में गाडा गया पत्थर।संवाद
नहरों पर पुल तो रेल लाइन पर बनाना पड़ेगा ओवरब्रिज, तीन सौ पेड़ भी कटेंगे बरौनी से बैतालपुर तक डाली गई तेल पाइप लाइन को करना पड़ेगा शिफ्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। शहर को जाम से निजात दिलाने के लिए बनने वाले 22 किलोमीटर लंबे बाईपास की राह में केवल किसान ही अड़चन नहीं हैं। तेल पाइप लाइन, हरे पेड़, नहर और रेलवे लाइन भी बाधा हैं। सबसे बड़ी दिक्कत तेल पाइप लाइन को लेकर आने वाली है। पाइप लाइन को दूसरी जगह कैसे शिफ्ट किया जाएगा? यह सबसे बड़ा सवाल बन गया है।
बता दें कि देवरिया-गोरखपुर मार्ग के सिरजम चौराहे के पास से देवरिया-सलेमपुर मार्ग के मुंडेरा तक 22 किलोमीटर का बाईपास बनाया जा रहा है। इसके लिए 1900 करोड़ रुपये का बजट आवंटित हो चुका। मगर 37 गांवों के करीब 968 किसानों में किसी से भूमि नहीं ली जा सकी है। किसान कम मुआवजा मिलने की बात कहकर विरोध कर रहे हैं।
दूसरी तरफ, बाईपास का आनन-फानन सीमांकन तो कर दिया गया है, लेकिन कई जगहों पर समस्या खड़ी हो गई है। हरैया गांव से बैतालपुर तक करीब पांच जगहों पर तेल पाइप लाइन पड़ रही है। इसे शिफ्ट करने के लिए एनओसी लेनी पड़ेगी। पाइप लाइन महज दो फीट जमीन के अंदर दबी है। पाइप लाइन डालने के लिए किसानों को मुआवजा देकर भूमि ली गई थी। अब बाईपास के लिए इस पाइप लाइन को हटाना पड़ेगा या कोई दूसरा उपाय तलाशना होगा।
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वहीं 22 किलोमीटर लंबे बाईपास की राह में करीब 313 पेड़ खड़े हैं। इन्हें काटना होगा। साथ ही करीब पांच जगहों पर नहर बचानी होगी। जाहिर है कि इसके लिए पुल बनाना होगा। दो जगहों पर रेलवे लाइन होने के कारण ओवरब्रिज बनाना पड़ेगा। इससे साफ है कि बाईपास मार्ग की राह बहुत आसान नहीं है। इसे समय से पूरा करना कठिन कार्य होगा।
जबकि विभागीय सूत्रों की अनुसार इसी माह बाईपास का शिलान्यास कराने की तैयारी चल रही है। संभावना है कि 20 जून के पहले शिलान्यास करा दिया जाएगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। शहर को जाम से निजात दिलाने के लिए बनने वाले 22 किलोमीटर लंबे बाईपास की राह में केवल किसान ही अड़चन नहीं हैं। तेल पाइप लाइन, हरे पेड़, नहर और रेलवे लाइन भी बाधा हैं। सबसे बड़ी दिक्कत तेल पाइप लाइन को लेकर आने वाली है। पाइप लाइन को दूसरी जगह कैसे शिफ्ट किया जाएगा? यह सबसे बड़ा सवाल बन गया है।
बता दें कि देवरिया-गोरखपुर मार्ग के सिरजम चौराहे के पास से देवरिया-सलेमपुर मार्ग के मुंडेरा तक 22 किलोमीटर का बाईपास बनाया जा रहा है। इसके लिए 1900 करोड़ रुपये का बजट आवंटित हो चुका। मगर 37 गांवों के करीब 968 किसानों में किसी से भूमि नहीं ली जा सकी है। किसान कम मुआवजा मिलने की बात कहकर विरोध कर रहे हैं।
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दूसरी तरफ, बाईपास का आनन-फानन सीमांकन तो कर दिया गया है, लेकिन कई जगहों पर समस्या खड़ी हो गई है। हरैया गांव से बैतालपुर तक करीब पांच जगहों पर तेल पाइप लाइन पड़ रही है। इसे शिफ्ट करने के लिए एनओसी लेनी पड़ेगी। पाइप लाइन महज दो फीट जमीन के अंदर दबी है। पाइप लाइन डालने के लिए किसानों को मुआवजा देकर भूमि ली गई थी। अब बाईपास के लिए इस पाइप लाइन को हटाना पड़ेगा या कोई दूसरा उपाय तलाशना होगा।
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वहीं 22 किलोमीटर लंबे बाईपास की राह में करीब 313 पेड़ खड़े हैं। इन्हें काटना होगा। साथ ही करीब पांच जगहों पर नहर बचानी होगी। जाहिर है कि इसके लिए पुल बनाना होगा। दो जगहों पर रेलवे लाइन होने के कारण ओवरब्रिज बनाना पड़ेगा। इससे साफ है कि बाईपास मार्ग की राह बहुत आसान नहीं है। इसे समय से पूरा करना कठिन कार्य होगा।
जबकि विभागीय सूत्रों की अनुसार इसी माह बाईपास का शिलान्यास कराने की तैयारी चल रही है। संभावना है कि 20 जून के पहले शिलान्यास करा दिया जाएगा।