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Deoria News: नौ दिन की भक्ति, हर दिन जिम्मेदारी, महिलाओं की अग्निपरीक्षा
Mon, 12 Oct 2026 12:29 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Mon, 12 Oct 2026 12:29 AM IST
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भागलपुर। शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा की आराधना के साथ व्रती महिलाओं की दिनचर्या भी बदल गई है। घर में कोई व्रत है तो किसी के भोजन बनाना भी जरूरी है। ऐसे में महिलाएं रसोई में दोहरी जिम्मेदारी के साथ नौकरी और बच्चों की देखभाल भी कर रही हैं।
सुबह पूजा से शुरू होने वाला दिन देर शाम तक परिवार की जिम्मेदारियों के बीच गुजर रहा है।
भागलपुर कस्बे की गृहिणी अनीता जायसवाल ने बताया कि वह व्रत रख रही हैं। पति और दो बच्चों के लिए रोज सामान्य भोजन बनाना पड़ता है, इसलिए रसोई में व्रत की सामग्री और सामान्य खाद्य पदार्थ अलग-अलग रखती हैं।
लार रोड के भरौली निवासी प्रीति द्विवेदी ने बताया कि वह सुबह चार बजे उठकर स्नान-पूजन करती हैं। इसके बाद बच्चों का टिफिन और पति के लिए भोजन तैयार करती हैं। दोपहर में फलाहार करती हैं और शाम को कुट्टू की पूरी व आलू की सब्जी बनाती हैं। धरहरा गांव की रिपु यादव ने नौ दिन व्रत रखने का संकल्प लिया है। उन्होंने बताया कि अन्न का त्याग कर दिन में फल और शाम को फलाहार करती हैं। जरूरी सामान पहले ही खरीद लिया था, ताकि बार-बार बाजार न जाना पड़े। उनके अनुसार, थकान होती है मगर मां दुर्गा की भक्ति से शक्ति मिलती है।
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कामकाजी महिला संध्या जायसवाल ने बताया कि नौकरी के साथ व्रत रखना चुनौतीपूर्ण है। सुबह पूजा और परिवार के लिए भोजन बनाने के बाद बच्चों को स्कूल भेजती हैं। शाम को दफ्तर से लौटकर परिवार की देखभाल और भोजन तैयार करने के बाद व्रत खोलती हैं।
डॉ. ममता चौहान ने व्रत के दौरान संतुलित खानपान पर जोर दिया। उन्होंने महिलाओं को अधिक तली-भुनी चीजों से बचने और पर्याप्त पानी व फलों का सेवन करने की सलाह दी।
बाजार में व्रत सामग्री की मांग बढ़ीभागलपुर बाजार के दुकानदार विशाल जायसवाल ने बताया कि दो दिनमें सेंधा नमक, साबूदाना और कुट्टू के आटे की बिक्री दोगुनी हो गई है। लोग सुबह-शाम व्रत संबंधित सामान की खरीदारी कर रहे हैं।
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सुबह पूजा से शुरू होने वाला दिन देर शाम तक परिवार की जिम्मेदारियों के बीच गुजर रहा है।
भागलपुर कस्बे की गृहिणी अनीता जायसवाल ने बताया कि वह व्रत रख रही हैं। पति और दो बच्चों के लिए रोज सामान्य भोजन बनाना पड़ता है, इसलिए रसोई में व्रत की सामग्री और सामान्य खाद्य पदार्थ अलग-अलग रखती हैं।
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लार रोड के भरौली निवासी प्रीति द्विवेदी ने बताया कि वह सुबह चार बजे उठकर स्नान-पूजन करती हैं। इसके बाद बच्चों का टिफिन और पति के लिए भोजन तैयार करती हैं। दोपहर में फलाहार करती हैं और शाम को कुट्टू की पूरी व आलू की सब्जी बनाती हैं। धरहरा गांव की रिपु यादव ने नौ दिन व्रत रखने का संकल्प लिया है। उन्होंने बताया कि अन्न का त्याग कर दिन में फल और शाम को फलाहार करती हैं। जरूरी सामान पहले ही खरीद लिया था, ताकि बार-बार बाजार न जाना पड़े। उनके अनुसार, थकान होती है मगर मां दुर्गा की भक्ति से शक्ति मिलती है।
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कामकाजी महिला संध्या जायसवाल ने बताया कि नौकरी के साथ व्रत रखना चुनौतीपूर्ण है। सुबह पूजा और परिवार के लिए भोजन बनाने के बाद बच्चों को स्कूल भेजती हैं। शाम को दफ्तर से लौटकर परिवार की देखभाल और भोजन तैयार करने के बाद व्रत खोलती हैं।
डॉ. ममता चौहान ने व्रत के दौरान संतुलित खानपान पर जोर दिया। उन्होंने महिलाओं को अधिक तली-भुनी चीजों से बचने और पर्याप्त पानी व फलों का सेवन करने की सलाह दी।
बाजार में व्रत सामग्री की मांग बढ़ीभागलपुर बाजार के दुकानदार विशाल जायसवाल ने बताया कि दो दिनमें सेंधा नमक, साबूदाना और कुट्टू के आटे की बिक्री दोगुनी हो गई है। लोग सुबह-शाम व्रत संबंधित सामान की खरीदारी कर रहे हैं।