{"_id":"68c5bf11414c7691a5089406","slug":"medical-college-if-you-want-to-get-an-ultrasound-done-you-will-have-to-sacrifice-your-nights-sleep-deoria-news-c-208-1-deo1010-163126-2025-09-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Deoria News: मेडिकल कॉलेज ः अल्ट्रासाउंड कराना है तो रात की नींद करनी पड़ेगी कुर्बान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Deoria News: मेडिकल कॉलेज ः अल्ट्रासाउंड कराना है तो रात की नींद करनी पड़ेगी कुर्बान
Sun, 14 Sep 2025 12:29 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sun, 14 Sep 2025 12:29 AM IST
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मेडिकल काॅलेज में मरीजों की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। अल्ट्रासाउंड के लिए आपको रात की नींद बर्बाद करनी पड़ेगी। जांच के लिए पहले से सिस्टम द्वारा खड़ी की गई बाधाओं को पार करना पड़ता है।
नंबर लगाने के लिए मरीजों को रात 12 बजे से ही लाइन लगानी पड़ती है। प्रतिदिन 15 से 20 मरीजों का ही अल्ट्रासाउंड हो पाता है। इसके चलते दूरदराज से आए अधिकतर मरीज निराश होकर लौट जाते हैं। मेडिकल काॅलेज मेंे अल्ट्रासाउंड जांच कराना मुश्किल हो गया है। से ही लाइन लगनी शुरू हो जाती है।
नजदीक के रहने वाले मरीज अपनी पर्ची सेंटर के बैक डोर वाली खिड़की के बाहर ईंट से दबाकर लाइन में खड़े हो जाते हैं। ऐसे में दूरदराज से आए मरीजों को निराशा ही हाथ लगती है। प्रतिदिन ओपीडी में करीब चार हजार पर्चियां बनती हैं। इसमें विभिन्न विभागों के डाॅक्टर सौ से अधिक मरीजों को अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह देते हैं।
विज्ञापन
मरीज जब सेंटर पर जांच के लिए पहुंचते हैं तो सिस्टर द्वारा राेज15 से 20 मरीजों के जांच के नियम के चलते निराश होकर लौट जाते हैं। अहिल्यापुर के राजू प्रसाद तीन दिन से उल्ट्रासाउंड कराने आ रहे हैं।
उनका कहना है कि जब केंद्र के बाहर पहुंचते हैं तो पहले से मरीज अपनी पर्चियां ईंट से दबाकर लाइन में खड़े रहते हैं। भटनी क्षेत्र के बैकुंठपुर स्थित सरैंया निवासी अरुण प्रसाद एक सप्ताह से आ रहे हैं। कहते हैं कि 15 से 20 मरीजों की पर्चियां केंद्र के कर्मचारी रख लेते हैं।
विज्ञापन
देवरिया। मेडिकल काॅलेज में मरीजों की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। अल्ट्रासाउंड के लिए आपको रात की नींद बर्बाद करनी पड़ेगी। जांच के लिए पहले से सिस्टम द्वारा खड़ी की गई बाधाओं को पार करना पड़ता है।
नंबर लगाने के लिए मरीजों को रात 12 बजे से ही लाइन लगानी पड़ती है। प्रतिदिन 15 से 20 मरीजों का ही अल्ट्रासाउंड हो पाता है। इसके चलते दूरदराज से आए अधिकतर मरीज निराश होकर लौट जाते हैं। मेडिकल काॅलेज मेंे अल्ट्रासाउंड जांच कराना मुश्किल हो गया है। से ही लाइन लगनी शुरू हो जाती है।
विज्ञापन
नजदीक के रहने वाले मरीज अपनी पर्ची सेंटर के बैक डोर वाली खिड़की के बाहर ईंट से दबाकर लाइन में खड़े हो जाते हैं। ऐसे में दूरदराज से आए मरीजों को निराशा ही हाथ लगती है। प्रतिदिन ओपीडी में करीब चार हजार पर्चियां बनती हैं। इसमें विभिन्न विभागों के डाॅक्टर सौ से अधिक मरीजों को अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह देते हैं।
विज्ञापन
मरीज जब सेंटर पर जांच के लिए पहुंचते हैं तो सिस्टर द्वारा राेज15 से 20 मरीजों के जांच के नियम के चलते निराश होकर लौट जाते हैं। अहिल्यापुर के राजू प्रसाद तीन दिन से उल्ट्रासाउंड कराने आ रहे हैं।
उनका कहना है कि जब केंद्र के बाहर पहुंचते हैं तो पहले से मरीज अपनी पर्चियां ईंट से दबाकर लाइन में खड़े रहते हैं। भटनी क्षेत्र के बैकुंठपुर स्थित सरैंया निवासी अरुण प्रसाद एक सप्ताह से आ रहे हैं। कहते हैं कि 15 से 20 मरीजों की पर्चियां केंद्र के कर्मचारी रख लेते हैं।