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Deoria News: पांच माह पहले हुई थी शादी, पिता भी थे सेना में

Wed, 19 Jul 2023 11:25 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 19 Jul 2023 11:25 PM IST
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Married five months ago, father was also in the army
बचपन से ही बड़े होनहार थे अंशुमान, पिता के सानिध्य में सैनिक स्कूल में ग्रहण की थी शिक्षा
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संवाद न्यूज एजेंसी
सलेमपुर। अंशुमान सिंह की इस साल फरवरी माह में शादी हुई थी। महज चंद माह में ही पत्नी सृष्टि से हमेशा के लिए उनका साथ छूट गया। वह बचपन से ही होनहार थे। वह शुरू से ही सेना में अधिकारी बनकर देश सेवा करने की सोचते थे। उनके जुनून को देखते हुए भारतीय सेना में तैनात रहे पिता रविप्रताप सिंह ने उनका दाखिला आर्मी स्कूल में करा दिया। साथ ही वह अधिकारी बनने की तैयारी में जुट गए। इसी बीच 2021 में भारतीय सेना में रेजिमेंटल मेडिकल आफिसर कैप्टन के पद पर चयनित हो गए। ट्रेंनिग के बाद उनकी तैनाती सियाचिन ग्लेशियर में थी। बुधवार की सुबह टेंट में आग लग गई। यह देख अंशुमान ने साहस दिखाते हुए आग बुझाने की कोशिश करते हुए अंदर फंसे जवानों को बचाने में जुट गए। काफी मशक्कत के बाद उन्होंने कुछ जवानों को बाहर भी निकाला। इसके बाद शहीद हो गए।
वह दो भाई व एक बहन में सबसे बड़े थे। उनसे छोटे भाई घनश्याम सिंह हैं। छोटी बहन तान्या सिंह हैं। पत्नी सृष्टि सिंह दिल्ली में इंजीनियर हैं। माता मंजू देवी पिता रविप्रताप सिंह परिवार के साथ लखनऊ में रहते हैं। बुधवार को दोपहर में सभी अपने अपने काम में जुटे थे। इसी बीच बेटे के शहीद होने की खबर मिली। इसके बाद चीख-पुकार मच गई। घटना की जानकारी होते ही आसपास के लोग जुट गए।
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शहीद होने की खबर मिलते ही गांव में फैला सन्नाटा
अंशुमान के शहीद होने की खबर गांव पहुंची तो गांव वाले अवाक रह गए। पैतृक घर पर लोगों की भीड़ जुट गई। चाचा मुन्ना गब्बर से लोग घटना की जानकारी ले रहे थे। मौजूद लोग यही कह रहे थे कि यह कैसे हो गया। वहीं घर के अंदर से महिलाओं के रोने की आवाज आ रही थी। आस पास की महिलाएं उनका ढांढस बंधा रही थीं। गांव में पूरी तरह से सन्नाटा पसरा हुआ है।
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मिलनसार थे अंशुमान
अंशुमान बचपन से ही गांव के दोस्तों से काफी घुले मिले थे। वह काफी मिलनसार थे। उनके शहीद होने की खबर मिली तो मित्र पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष विनय सिंह, संदीप फफक पड़े। वह कह रहे थे कि अंशुमान काफी मिलनसार थे। जब भी गांव आते थे तो सभी से मिलते थे। उनके व्यवहार के सभी मुरीद थे। सुशील ने बताया कि बचपन से ही देश की सेवा करने का जज्बा लिए भर्ती हुए। वह जब भी गांव आते थे तो मित्रों के बीच ही समय व्यतीत करते थे। उनके शहीद होने के बाद सभी गमजदा हैं।
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युवाओं को आगे बढ़ने के लिए करते थे प्रेरित

अंशुमान जब भी समय मिलता तो गांव जरूर आते थे। उनके आने की खबर मिलते ही उनके घर गांव सहित क्षेत्र के युवाओं की भीड़ जुट जाती थी। सभी उनसे सेना में भर्ती होने का टिप्स लेते थे। वह भी किसी को निरास नहीं करते थे। युवाओं को घंटों टिप्स देते थे। उनसे प्रभावित होकर इलाके के कई युवा सेना में भर्ती हुए हैं। शहीद होने की खबर मिलते ही लखनऊ के लिए परिजन हो गए। सियाचिन ग्लेशियर में टेंट में आग लगने से अंशुमान सिंह शहीद हो गए। इसकी खबर मिलते ही उनके चाचा मुन्ना सिंह, विनय सिंह सहित गांव के कई अन्य लोग लखनऊ स्थित आवास के लिए रवाना हो गए।

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अंशुमान की शहादत पर ग्रामीणों को है गर्व

कैप्टन अंशुमान सिंह की शहादत पर ग्रामीणों को गर्व है। ग्रामीणों ने कहा कि अंशुमान भारत माता के सच्चे सपूत थे। जवानों को आग के अंदर घिरा देख टेंट में घुस गए। कई जवानों को बाहर निकाले। अंत में खुद शहीद हो गए। ऐसे बहादुर बेटे पर हम सभी ग्रामीणों को गर्व है।
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