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चिह्नित किए गए टीबी रोग से ग्रसित बच्चे
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चिह्नित किए गए टीबी रोग से ग्रसित बच्चे
देवरिया। जनपद में टीबी रोग को लेकर कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसके तहत लोगों को जहां जागरूक किया जा रहा है। वहीं मरीजों को चिह्नित कर उनका उपचार किया जा रहा है। 11 माह में 84 बच्चे टीबी रोग के चिह्नित किए गए हैं। इनकी दवा शुरू कर दी गई है। बच्चों की काउंसिलिंग करने के साथ ही एहतियात बरतने की सलाह दी गई है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से टीबी के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है। जिले में बड़ों के अलावा बच्चे भी टीबी रोग से ग्रसित मिल रहे हैं। 11 माह में टीबी रोग से ग्रसित शून्य से 15 वर्ष तक के 84 बच्चे मिले हैं। इसमें पहले तिमाही में 27, दूसरे में 21, तीसरे में 18 तथा चौथे में अक्तूबर व नवंबर माह तक 18 मरीज पाए गए। बच्चे में दो सप्ताह से अधिक समय से खांसी आने की शिकायत मिलने पर जांच कराई तो आवश्यकता महसूस होने पर एक्स-रे भी कराया गया। जांच में टीबी रोग की पुष्टि होने पर दवा शुरू कर दी गई। चिकित्सक की सलाह पर टीबी रोग से ग्रसित बच्चों को छह माह या उससे अधिक समय तक नियमित दवा चलाई जाती है। इसके साथ ही चिह्नित बच्चों की काउंसिलिंग भी की जाती है। साथ ही अन्य बच्चों से दूर रखने की सलाह दी जाती है ताकि इसका संक्रमण न फैले। अभी नवंबर में विभाग की ओर से दस दिन का सक्रिय टीबी रोगी खोज अभियान चलाया गया, जिसमें लोगों को बीमारी के प्रति जागरूक किया गया। साथ टीमें घर-घर जाकर लोगों को टीबी के लक्षण के बारे में बताई और लक्षण मिलने पर सैंपल जांच कराया गया, जिसमें 139 मरीज मिले।
घुलनशील होती है बच्चों की दवा
टीबी से ग्रसित बच्चों को दी जाने वाली दवा घुलनशील होती है। दवा न निगल पाने की स्थिति में उसे घोल कर भी दिया जा सकता है, जिससे बच्चे आसानी से दवा ले सकें। बच्चों की भी दवा बड़े लोगों की तरह वजन के अनुसार चलती है।
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सरकार ने वर्ष 2025 तक टीबी उन्मूलन का लक्ष्य रखा है। इस दिशा में तेजी से कार्य किए जा रहे हैं। टीम टीबी रोगियों को चिह्नित करती है और जांच के बाद दवा दी जाती है। इसके अलावा अभियान चलाकर मरीजों को चिह्नित किया जाता है। साथ ही लोगों को जागरूक किया जा रहा है। जनपद में अब तक 84 बच्चे टीबी रोग से ग्रसित मिले हैं। उनकी दवा शुरू कर दी गई है। पोषण के लिए पांच सौ रुपये भी दिया जा रहा है। किसी भी व्यक्ति को दो हफ्ते से बुखार, खांसी आ रही हो और भूख नहीं लगती हो तो उसे समीप के स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर जांच करानी चाहिए।
- देवेंद्र प्रताप सिंह, जिला कार्यक्रम समन्वयक
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देवरिया। जनपद में टीबी रोग को लेकर कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसके तहत लोगों को जहां जागरूक किया जा रहा है। वहीं मरीजों को चिह्नित कर उनका उपचार किया जा रहा है। 11 माह में 84 बच्चे टीबी रोग के चिह्नित किए गए हैं। इनकी दवा शुरू कर दी गई है। बच्चों की काउंसिलिंग करने के साथ ही एहतियात बरतने की सलाह दी गई है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से टीबी के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है। जिले में बड़ों के अलावा बच्चे भी टीबी रोग से ग्रसित मिल रहे हैं। 11 माह में टीबी रोग से ग्रसित शून्य से 15 वर्ष तक के 84 बच्चे मिले हैं। इसमें पहले तिमाही में 27, दूसरे में 21, तीसरे में 18 तथा चौथे में अक्तूबर व नवंबर माह तक 18 मरीज पाए गए। बच्चे में दो सप्ताह से अधिक समय से खांसी आने की शिकायत मिलने पर जांच कराई तो आवश्यकता महसूस होने पर एक्स-रे भी कराया गया। जांच में टीबी रोग की पुष्टि होने पर दवा शुरू कर दी गई। चिकित्सक की सलाह पर टीबी रोग से ग्रसित बच्चों को छह माह या उससे अधिक समय तक नियमित दवा चलाई जाती है। इसके साथ ही चिह्नित बच्चों की काउंसिलिंग भी की जाती है। साथ ही अन्य बच्चों से दूर रखने की सलाह दी जाती है ताकि इसका संक्रमण न फैले। अभी नवंबर में विभाग की ओर से दस दिन का सक्रिय टीबी रोगी खोज अभियान चलाया गया, जिसमें लोगों को बीमारी के प्रति जागरूक किया गया। साथ टीमें घर-घर जाकर लोगों को टीबी के लक्षण के बारे में बताई और लक्षण मिलने पर सैंपल जांच कराया गया, जिसमें 139 मरीज मिले।
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घुलनशील होती है बच्चों की दवा
टीबी से ग्रसित बच्चों को दी जाने वाली दवा घुलनशील होती है। दवा न निगल पाने की स्थिति में उसे घोल कर भी दिया जा सकता है, जिससे बच्चे आसानी से दवा ले सकें। बच्चों की भी दवा बड़े लोगों की तरह वजन के अनुसार चलती है।
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सरकार ने वर्ष 2025 तक टीबी उन्मूलन का लक्ष्य रखा है। इस दिशा में तेजी से कार्य किए जा रहे हैं। टीम टीबी रोगियों को चिह्नित करती है और जांच के बाद दवा दी जाती है। इसके अलावा अभियान चलाकर मरीजों को चिह्नित किया जाता है। साथ ही लोगों को जागरूक किया जा रहा है। जनपद में अब तक 84 बच्चे टीबी रोग से ग्रसित मिले हैं। उनकी दवा शुरू कर दी गई है। पोषण के लिए पांच सौ रुपये भी दिया जा रहा है। किसी भी व्यक्ति को दो हफ्ते से बुखार, खांसी आ रही हो और भूख नहीं लगती हो तो उसे समीप के स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर जांच करानी चाहिए।
- देवेंद्र प्रताप सिंह, जिला कार्यक्रम समन्वयक