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देवरिया अभिलेखागार : 30 वर्ष से नहीं मिल रहा 103 गांवों का नक्शा
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देवरिया अभिलेखागार : 30 वर्ष से नहीं मिल रहा 103 गांवों का नक्शा
देवरिया। कलेक्ट्रेट के रिकॉर्ड रूम से 103 गांवों का नक्शा तीस साल से गायब है। कई डीएम आए और चले गए लेकिन किसी ने रुचि नहीं ली। जबकि इस मामले में वर्ष 2015 में तत्कालीन डीएम के निर्देश पर कोतवाली थाने में 16 लोगों के खिलाफ केस दर्ज है। बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। कई बार अधिवक्ताओं ने इस मामले पर बैठक की और प्रशासन को चेतावनी भी दी, लेकिन पूरा मामला ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है। अब नए डीएम आशुतोष निरंजन के सामने इस मामले को उठाने की तैयारी में कुछ अधिवक्ता जुट गए हैं।
देवरिया जिले के 77 एवं कुशीनगर जिले के 26 गांवों के जिल्द बंदोबस्त गायब होने का मामला पहली बार 17 नवंबर 2011 को तत्कालीन कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष बृज बांके तिवारी ने उठाया था। उन्होंने डीएम को छह सूत्री मांग पत्र सौंपा। उन्होंने आरोप लगाया कि रिकॉर्ड रूम में जिल्द बंदोबस्त सहित कई पत्रावलियां भूमाफिया ने गायब करा दिया है। इसके अलावा कई अभिलेखों में फेरबदल किया गया है। उन्होंने दोषियों पर कार्रवाई करने एवं दूसरे रिकार्ड बनाए जाने की मांग की। इसे गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन एडीएम वित्त एवं राजस्व ने अधिवक्ता बृज बांके तिवारी को छह अक्तूबर 2012 को पत्र लिखा। उन्होंने लिखा कि आठ जून 2010 एवं 20 अक्तूबर 2012 के आपके पत्र के क्रम में अभिलेखागार में गायब अभिलेखों की जांच कराई जा रही है। बृज बांके तिवारी ने कई बार पत्र लिखा तो 12 अगस्त 2015 को तत्कालीन एडीएम प्रशासन ने फिर उन्हें पत्र लिखकर अवगत कराया कि राजस्व अभिलेखागार से गायब जिल्द चकबंदी बंदोबस्त एवं भू-चित्रों के मामले में कोतवाली पुलिस को तहरीर दी गई है।
डीएम के निर्देश के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई तो जिला कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन ने चार दिसंबर 2016 को एक फिर बैठक की। रिकॉर्ड रूम में बंदोबस्ती नक्शा, 50 से अधिक गांवों के पुष्टिकृत नक्शा और कई गांवों के डीह के रिकॉर्ड गायब होने का मामला उठाया। आरोप लगाया कि गांवों के रिकॉर्ड में फेरबदल किया गया है। अधिवक्ताओं की मांग के बावजूद प्रशासन ने कोई पहल नहीं की। अधिवक्ताओं ने कड़ा रुख अपनाया तो तत्कालीन डीएम ने 23 मई 2017 को आयुक्त एवं सचिव राजस्व परिषद लखनऊ को पत्र लिखा। उन्होंने लिखा कि राजस्व अभिलेखागार में अनुरक्षित भू-अभिलेखों एवं चकबंदी अभिलेखों 41-45 चकबंदी बंदोबस्ती भू-चित्रों के गायब होने की शिकायतें प्राप्त होती रही हैं। जांच में पता चला है कि 1990 से पूर्व के नक्शे गायब हैं। अधिकांश कर्मचारी रिटायर्ड हो चुके हैं। ऐसे में द्वितीय प्रति तैयार कराने की अनुमति दी जाए।
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डीएम के पत्र के बाद भी पुलिस नहीं हुई सक्रिय
डीएम ने प्रभारी निरीक्षक को सात जून 2017 को पत्र लिखा और कहा कि देवरिया कोतवाली में अपराध संख्या 2017 दिनांक 21 अगस्त 2015 को 16 कर्मचारियों के खिलाफ केस भी दर्ज कराया जा चुका है। इस केस के बारे में अद्यतन जानकारी उपलब्ध कराएं। बावजूद पुलिस चुप्पी मार कर बैठ गई।
तीन अधिकारियों की गठित हुई थी जांच समिति
डीएम के आदेश पर 12 जून 2017 को मुख्य राजस्व अधिकारी की अध्यक्षता में तीन लोगों की कमेटी जांच के लिए बनाई गई। जिसमें एसडीएम सदर एवं चकबंदी अधिकारी को सदस्य बनाया गया। डीएम ने कहा कि जांच कर गायब अभिलेखों के पुनर्निर्माण एवं दोषी कर्मचारियों का उत्तरदायित्व निर्धारित करें। लेकिन पूरा मामला ठंडे बस्ते में अधिकारियों ने डाल दिया।
दस वर्ष से इसकी लड़ाई लड़ रहा हूं। प्रशासनिक अधिकारियों की इसमें संलिप्तता है। नए डीएम के सामने पूरा प्रकरण रखे जाने के बाद इस मुद्दे पर आंदोलन किया जाएगा। केस दर्ज होने के बाद भी आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है। -बृज बांके तिवारी, पूर्व अध्यक्ष कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन
देवरिया, कुशीनगर के इन गांवों का जिल्द बंदोबस्त नक्शा मिसिंग है। इस संबंध में राजस्व परिषद को दूसरा नक्शा मुहैया कराने के लिए कई बार पत्र लिखा जा चुका है। हाल ही में परसिया देवार समेत कई गांवों के नक्शे प्राप्त भी हुए हैं। नक्शे अब शीघ्र ही डिजिटल होंगे। -अमृतलाल बिंद, मुख्य राजस्व अधिकारी
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देवरिया। कलेक्ट्रेट के रिकॉर्ड रूम से 103 गांवों का नक्शा तीस साल से गायब है। कई डीएम आए और चले गए लेकिन किसी ने रुचि नहीं ली। जबकि इस मामले में वर्ष 2015 में तत्कालीन डीएम के निर्देश पर कोतवाली थाने में 16 लोगों के खिलाफ केस दर्ज है। बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। कई बार अधिवक्ताओं ने इस मामले पर बैठक की और प्रशासन को चेतावनी भी दी, लेकिन पूरा मामला ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है। अब नए डीएम आशुतोष निरंजन के सामने इस मामले को उठाने की तैयारी में कुछ अधिवक्ता जुट गए हैं।
देवरिया जिले के 77 एवं कुशीनगर जिले के 26 गांवों के जिल्द बंदोबस्त गायब होने का मामला पहली बार 17 नवंबर 2011 को तत्कालीन कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष बृज बांके तिवारी ने उठाया था। उन्होंने डीएम को छह सूत्री मांग पत्र सौंपा। उन्होंने आरोप लगाया कि रिकॉर्ड रूम में जिल्द बंदोबस्त सहित कई पत्रावलियां भूमाफिया ने गायब करा दिया है। इसके अलावा कई अभिलेखों में फेरबदल किया गया है। उन्होंने दोषियों पर कार्रवाई करने एवं दूसरे रिकार्ड बनाए जाने की मांग की। इसे गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन एडीएम वित्त एवं राजस्व ने अधिवक्ता बृज बांके तिवारी को छह अक्तूबर 2012 को पत्र लिखा। उन्होंने लिखा कि आठ जून 2010 एवं 20 अक्तूबर 2012 के आपके पत्र के क्रम में अभिलेखागार में गायब अभिलेखों की जांच कराई जा रही है। बृज बांके तिवारी ने कई बार पत्र लिखा तो 12 अगस्त 2015 को तत्कालीन एडीएम प्रशासन ने फिर उन्हें पत्र लिखकर अवगत कराया कि राजस्व अभिलेखागार से गायब जिल्द चकबंदी बंदोबस्त एवं भू-चित्रों के मामले में कोतवाली पुलिस को तहरीर दी गई है।
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डीएम के निर्देश के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई तो जिला कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन ने चार दिसंबर 2016 को एक फिर बैठक की। रिकॉर्ड रूम में बंदोबस्ती नक्शा, 50 से अधिक गांवों के पुष्टिकृत नक्शा और कई गांवों के डीह के रिकॉर्ड गायब होने का मामला उठाया। आरोप लगाया कि गांवों के रिकॉर्ड में फेरबदल किया गया है। अधिवक्ताओं की मांग के बावजूद प्रशासन ने कोई पहल नहीं की। अधिवक्ताओं ने कड़ा रुख अपनाया तो तत्कालीन डीएम ने 23 मई 2017 को आयुक्त एवं सचिव राजस्व परिषद लखनऊ को पत्र लिखा। उन्होंने लिखा कि राजस्व अभिलेखागार में अनुरक्षित भू-अभिलेखों एवं चकबंदी अभिलेखों 41-45 चकबंदी बंदोबस्ती भू-चित्रों के गायब होने की शिकायतें प्राप्त होती रही हैं। जांच में पता चला है कि 1990 से पूर्व के नक्शे गायब हैं। अधिकांश कर्मचारी रिटायर्ड हो चुके हैं। ऐसे में द्वितीय प्रति तैयार कराने की अनुमति दी जाए।
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डीएम के पत्र के बाद भी पुलिस नहीं हुई सक्रिय
डीएम ने प्रभारी निरीक्षक को सात जून 2017 को पत्र लिखा और कहा कि देवरिया कोतवाली में अपराध संख्या 2017 दिनांक 21 अगस्त 2015 को 16 कर्मचारियों के खिलाफ केस भी दर्ज कराया जा चुका है। इस केस के बारे में अद्यतन जानकारी उपलब्ध कराएं। बावजूद पुलिस चुप्पी मार कर बैठ गई।
तीन अधिकारियों की गठित हुई थी जांच समिति
डीएम के आदेश पर 12 जून 2017 को मुख्य राजस्व अधिकारी की अध्यक्षता में तीन लोगों की कमेटी जांच के लिए बनाई गई। जिसमें एसडीएम सदर एवं चकबंदी अधिकारी को सदस्य बनाया गया। डीएम ने कहा कि जांच कर गायब अभिलेखों के पुनर्निर्माण एवं दोषी कर्मचारियों का उत्तरदायित्व निर्धारित करें। लेकिन पूरा मामला ठंडे बस्ते में अधिकारियों ने डाल दिया।
दस वर्ष से इसकी लड़ाई लड़ रहा हूं। प्रशासनिक अधिकारियों की इसमें संलिप्तता है। नए डीएम के सामने पूरा प्रकरण रखे जाने के बाद इस मुद्दे पर आंदोलन किया जाएगा। केस दर्ज होने के बाद भी आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है। -बृज बांके तिवारी, पूर्व अध्यक्ष कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन
देवरिया, कुशीनगर के इन गांवों का जिल्द बंदोबस्त नक्शा मिसिंग है। इस संबंध में राजस्व परिषद को दूसरा नक्शा मुहैया कराने के लिए कई बार पत्र लिखा जा चुका है। हाल ही में परसिया देवार समेत कई गांवों के नक्शे प्राप्त भी हुए हैं। नक्शे अब शीघ्र ही डिजिटल होंगे। -अमृतलाल बिंद, मुख्य राजस्व अधिकारी