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Deoria News: चमत्कारी थे महायोगी देवरहा बाबा, भक्तों की मन की बात पहले ही बता देते थे बाबा

Sun, 02 Jul 2023 11:30 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 02 Jul 2023 11:30 PM IST
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Mahayogi Devraha Baba was miraculous
-पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से लेकर, विदेशी जॉर्ज पंचम तक हुए थे बाबा के नतमस्तक
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-आश्रम पर गुरु पूर्णिमा पर लगता है भक्तों का जमवाड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी
मईल। देवों की धरती देवरिया के जनपद मुख्यालय से दक्षिणांचल 40 किलोमीटर की दूरी पर मईल गांव के समीप सरयू तट पर अपनी सिद्ध भूमि बनाने वाले देवरहा बाबा चमत्कारी बाबा थे। बाबा को कई तरह की सिद्धियां प्राप्त थीं। बाबा की ख्याति न सिर्फ देश में फैली, बल्कि विदेशों में भी चर्चा रही है। बाबा दर्शन करने आने वाले भक्तों की मन की बात बिना बताए ही जान लेते थे। बाबा को पानी के ऊपर चलने की क्षमता हासिल थी। इनके सिद्ध योग और चमत्कारों के चलते देश के पूर्व राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ,अटल बिहारी वाजपेई, बीपी सिंह, चंद्रशेखर, पंडित मदन मोहन मालवीय, पूर्व मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह, कमलापति त्रिपाठी, बिंदेश्वरी दुबे, जगन्नाथ मिश्रा, नारायण दत्त तिवारी, मुलायम सिंह यादव, लालू यादव, अशोक सिंघल, बुटा सिंह सहित अनेक राजनेता, नौकरशाह और फिल्मी सितारे आकर बाबा का आशीर्वाद लेते थे। यहां तक की विदेशी जॉर्ज पंचम जब भारत आए थे 1911 में सरयू आश्रम मईल आकर बाबा का दर्शन कर आशीर्वाद लिए थे। देवरहा बाबा हमेशा काठ के छोटे मंच के ऊपर बैठकर कमर में मृगछाला पहने लोगों को दर्शन देते थे। कहा जाता है कि बाबा को कभी किसी ने वाहन से जाते नहीं देखा था। बाबा को प्लायन योग की सिद्धि प्राप्त थी। जिससे पानी पर चलकर बाबा प्रयागराज, काशी और वृंदावन जाते थे। बाबा की उम्र को लेकर आज भी रहस्य बना हुआ है। बाबा की उम्र को लेकर भक्त उनके ढाई सौ से 500 वर्ष तक जिंदा होने का दावा करते हैं। बाबा जिस भक्त को अपने पैरों के अंगूठे से स्पर्श कर देते थे, उनका भाग्य चमक जाता था। आज भी देवरहा बाबा की इस सिद्ध भूमि आश्रम का महत्व कम नहीं है। आश्रम पर समय-समय पर देश के कोने-कोने से भक्तों की भीड़ उमड़ती है। आज भी जो भक्त सच्चे मन से बाबा को याद करते हैं, आश्रम के बाबा के चरण रज मिट्टी से उनकी हर मनोकामना पूर्ण होती है। बाबा गोपालन, गोसेवा का संदेश देते थे। बाबा ने कभी अन्न का सेवन नहीं किया, बल्कि वह हमेशा दूध, दही, शहद और श्रीफल का प्रयोग करते थे। बाबा अंतिम पड़ाव में वृंदावन के सरजू तट पर चले गए, वहीं उन्होंने 1990 में योगनी एकादशी पर 19 जून को अपना शरीर त्याग दिया।

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गुरू पूर्णिमा पर आज देश के कोने-कोने से पहुंचेंगे भक्त
- पीठाधीश्वर श्याम सुंदर दास ने बताया कि गुरू पूर्णिमा सोमवार को मनाई जाएगी। इस दिन देश के कोने-कोने से भक्त पहुंचकर बाबा की तपोस्थली से आशीर्वाद लेते हैं ।
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