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60 KM में सिर्फ 75 जवान: स्टाफ कम, तस्करी ज्यादा- गोरखपुर से बिहार बॉर्डर तक ट्रेनों में बढ़ी शराब तस्करी
Mon, 20 Jul 2026 01:16 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 20 Jul 2026 01:16 AM IST
सार
पिछले दिनों देवरिया सदर स्टेशन पर जीआरपी ने शराब तस्करी का एक मामला पकड़ा था। भटनी जीआरपी भी शराब तस्करों को पकड़ चुकी है। सबसे अधिक तस्करी पैसेंजर ट्रेनों के जरिए होती है। लेकिन स्टॉफ कम होने की वजह से नियमित निगरानी में दिक्कत आती है।
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- फोटो : AI Generated
विस्तार
गोरखपुर कैंट से बिहार बॉर्डर तक के ट्रेनों की सुरक्षा की जिम्मेदारी जीआरपी के महज 75 जवानों पर है। गोरखपुर कैंट स्टेशन के आउटर सिग्नल से लेकर नूनखार स्टेशन तक करीब 60 किलोमीटर लंबे ट्रैक के सुरक्षा की जिम्मेदारी जीआरपी थाना देवरिया के 30 जवानों और तीन अफसरों पर है।
इसी तरह नूनखार से बनकटा, तूर्तीपार और बरहज तक की जिम्मेदारी महज 42 जवानों पर है। इन्हीं में से 28 जवानों की ड्यूटी हर दिन वैशाली, वाराणसी इंटरसिटी सहित आठ आठ ट्रेनों के स्कॉट में लगती है।
ट्रेन और यात्रियों की सुरक्षा आरपीएफ के साथ राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) के जिम्मे है।
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इसी तरह नूनखार से बनकटा, तूर्तीपार और बरहज तक की जिम्मेदारी महज 42 जवानों पर है। इन्हीं में से 28 जवानों की ड्यूटी हर दिन वैशाली, वाराणसी इंटरसिटी सहित आठ आठ ट्रेनों के स्कॉट में लगती है।
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ट्रेन और यात्रियों की सुरक्षा आरपीएफ के साथ राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) के जिम्मे है।
हर स्टेशन के दोनों तरफ के आउटर सिग्नल के बीच का हिस्सा जीआरपी के दायरे में आता है। इसके अलावा प्लेटफार्म और ट्रेनों में भी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी इन पर है। बीते तीन दशक में रेलवे ने अपने आधारभूत संरचना में बड़ा बदलाव किया है लेकिन सुरक्षा के लिए जीआरपी के जवानों की संख्या नहीं बढ़ पा रही है।
जहर खुरानी से बड़ी चुनौती अब शराब तस्करी : जब से बिहार में शराब बंदी हुई है, यूपी से तस्करी होने लगी है। सड़क मार्ग पर पहरा बैठते ही तस्करों ने ट्रेन का सहारा लेना शुरू कर दिया है।
देवरिया, भटनी और भाटपार रानी जैसे स्टेशनों से हर दिन तस्कर झोले या बैग में शराब लेकर ट्रेन में चढ़ते हैं और बिहार के स्टेशनों पर उतर जाते हैं।
जहर खुरानी से बड़ी चुनौती अब शराब तस्करी : जब से बिहार में शराब बंदी हुई है, यूपी से तस्करी होने लगी है। सड़क मार्ग पर पहरा बैठते ही तस्करों ने ट्रेन का सहारा लेना शुरू कर दिया है।
देवरिया, भटनी और भाटपार रानी जैसे स्टेशनों से हर दिन तस्कर झोले या बैग में शराब लेकर ट्रेन में चढ़ते हैं और बिहार के स्टेशनों पर उतर जाते हैं।
पिछले दिनों देवरिया सदर स्टेशन पर जीआरपी ने शराब तस्करी का एक मामला पकड़ा था। भटनी जीआरपी भी शराब तस्करों को पकड़ चुकी है। सबसे अधिक तस्करी पैसेंजर ट्रेनों के जरिए होती है। लेकिन स्टॉफ कम होने की वजह से नियमित निगरानी में दिक्कत आती है।
2001 में भटनी से अलग होकर देवरिया बना था जीआरपी थाना : देवरिया सदर रेलवे स्टेशन पर वर्ष 2001 से पहले भटनी थाने की पुलिस चौकी थी। जबकि इस रेलवे स्टेशन पर वैशाली एक्सप्रेस, बिहार संपर्क क्रांति एक्सप्रेस, अवध आसाम एक्सप्रेस, मौर्या एक्सप्रेस, काशी एक्सप्रेस समेत 53 ट्रेनों का ठहराव होता है। यात्रियों की भीड़ को देखते हुए जीआरपी ने देवरिया सदर को 2001 में थाना बनाया था।
2001 में भटनी से अलग होकर देवरिया बना था जीआरपी थाना : देवरिया सदर रेलवे स्टेशन पर वर्ष 2001 से पहले भटनी थाने की पुलिस चौकी थी। जबकि इस रेलवे स्टेशन पर वैशाली एक्सप्रेस, बिहार संपर्क क्रांति एक्सप्रेस, अवध आसाम एक्सप्रेस, मौर्या एक्सप्रेस, काशी एक्सप्रेस समेत 53 ट्रेनों का ठहराव होता है। यात्रियों की भीड़ को देखते हुए जीआरपी ने देवरिया सदर को 2001 में थाना बनाया था।
उस वक्त यहां एक इंस्पेक्टर, दो सब इंस्पेक्टर, 12 हेड कांस्टेबल व 18 कांस्टेबल समेत कुल 33 पद सृजित किए थे। तब से तब तक रेलवे के यात्रियों की संख्या में तीन गुना से अधिक का इजाफा हो चुका है।
देवरिया सदर रेलवे स्टेशन को अमृत भारत योजना के तहत नए डिजाइन में तैयार किया जा रहा है लेकिन जीआरपी के जवानों की संख्या नहीं बढ़ी।
गोरखपुर कैंट आउटर से लेकर नूनखार तक कुसम्ही, चौरीचौरा, गौरीबाजार और अहिल्यापुर समेत कई प्रमुख स्टेशन हैं। इसके अलावा वैशाली समेत तीन ट्रेनों में यहां से आठ जवानों की स्कॉट ड्यूटी भी लगाई जाती है। चार जवानों की ड्यूटी प्लेटफार्म पर होती है। इसके अलावा चार जवानों की ड्यूटी ऑफिस में रहती है।
देवरिया सदर रेलवे स्टेशन को अमृत भारत योजना के तहत नए डिजाइन में तैयार किया जा रहा है लेकिन जीआरपी के जवानों की संख्या नहीं बढ़ी।
गोरखपुर कैंट आउटर से लेकर नूनखार तक कुसम्ही, चौरीचौरा, गौरीबाजार और अहिल्यापुर समेत कई प्रमुख स्टेशन हैं। इसके अलावा वैशाली समेत तीन ट्रेनों में यहां से आठ जवानों की स्कॉट ड्यूटी भी लगाई जाती है। चार जवानों की ड्यूटी प्लेटफार्म पर होती है। इसके अलावा चार जवानों की ड्यूटी ऑफिस में रहती है।
जीआरपी थानेदार अभिषेक पांडेय का कहना है कि वर्तमान जरूरत को देखते हुए यहां से कम से 70 जवानों की तैनाती होनी चाहिए। इसके अलावा चौरीचौरा और गौरीबाजार जैसे स्टेशनों पर पुलिस चौकी भी होनी चाहिए। लेकिन गोरखपुर से बिहार बाॅर्डर तक ही सिर्फ 74 जवान तैनात हैं।