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Deoria News: लंपी वायरस ने दी दस्तक, एक पशु की मौत, दो सौ से अधिक ग्रसित
Mon, 28 Aug 2023 11:22 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Mon, 28 Aug 2023 11:22 PM IST
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देसही देवरिया ब्लाक के महवा गांव में लंपी वायरस से बीमार पड़ी गाय।संवाद
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देवरिया। नेपाल से चले लंपी वायरस ने जिले में दस्तक दे दी है। इसके कारण रविवार की सुबह गौरीबाजार ब्लाॅक के मठिया माफी गांव निवासी वरुण यादव की गाय की मौत हो गई। वहीं, अलग-अलग जगहों पर दो सौ से अधिक पशु बीमार हैं। हालांकि, पशुपालन विभाग लंपी वायरस से 36 पशुओं के प्रभावित होने की बात कह रहा है। लंपी के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए जिला प्रशासन ने रैपिड रिस्पांस टीम का गठन किया है। बाहरी पशुओं के जिले में प्रवेश पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है।
लंपी वायरस से पशु के ग्रस्त होने का पहला केस 24 अगस्त को गौरीबाजार ब्लॉक के मठिया माफी गांव में सामने आया। इलाज के दौरान चिकित्सकों ने लक्षण के आधार पर बीमारी की पुष्टि की। अगले दिन से जिले के अन्य गांवों में भी लंपी के मामले मिलने लगे। विभाग ने बीमार पशुओं के खून के नमूने लेने शुरू कर दिए हैं। जल्द ही सभी ब्लाॅकों से एकत्र किए गए नमूनों को आईवीआरआई (इंडियन वेटरिनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट) बरेली भेजा जाएगा। ताकि वायरस के प्रकार व बदलते स्वरूप का पता लगाया जा सके।
कोरोना की तरह संक्रामक है लंपी
उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. यूके सिंह ने बताया कि लंपी कोरोना की तरह संक्रामक बीमारी है। यह संपर्क में आने से एक से दूसरे पशु में फैलता है। इसमें भी सैनिटाइजेशन और संक्रमित पशु हो आइसोलेट कराने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। अभी तक जो भी केस मिले हैं उनकी पहचान लक्षण के आधार पर हुई है। लंपी के लक्षण दूसरी बीमारियों से ज्यादा मेल नहीं खाते हैं। यह बीमारी सिर्फ गोवंश में ही फैल रही है। इसका मनुष्यों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
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लंपी का नहीं है कोई टीका
जनपद में गोवंश की संख्या 2,75,521 है। जिसके मुकाबले पशुपालन विभाग ने अभी तक महज 30 हजार पशुओं का ही टीकाकरण कराया है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी एके वैश्य ने बताया कि लंपी के लिए कोई विशेष टीका नहीं बना है। इम्यूनिटी बूस्टर के तौर पर गोवंश को गोटपाक्स लगाया जाता है। इसे लंपी से बचाव के लिए 70 प्रतिशत असरदार माना गया है। शासन से गोटपॉक्स की 30 हजार खुराक मिली थी जिसे पशुओं को लगाया जा चुका है। एक से दो दिन में और खुराक मिल जाएंगी।
ये हैं बीमारी के लक्षण
लंपी स्किन डिजीज एक वायरल बीमारी है, जो गाय, भैंसों में होती है। लंपी स्किन डिजीज में पशु के शरीर पर गांठें बनने लगती हैं। इसके प्रसार के लिए जिम्मेदार एलएसडी वायरस मच्छरों और मक्खियों जैसे खून चूसने वाले कीड़ों से आसानी से फैलता है। साथ ही ये दूषित पानी, लार और चारे के माध्यम से भी फैलता है। बीमारी से ग्रसित पशुओं की मृत्यु दर अनुमान एक से पांच प्रतिशत होती है।
ऐसे करें बीमारी की रोकथाम
- बीमारी से ग्रसित पशुओं को स्वस्थ पशु से अलग रखें।
- पशुओं को मक्खी, चिचड़ी, मच्छर आदि से बचाएं।
- संक्रमित जगह की फरमलीन, ईथर, एल्कोहल से सफाई रखें।
- संक्रमित पशुओं को खाने के लिए संतुलित आहार तथा हरा चारा दें।
संक्रमण के बाद देसी औषधि भी कारगर
नीम के पत्ते, एक मुट्ठी तुलसी के पत्ते, लहसुन की कली 10 नग, लौंग 10 नग, काली मिर्च 10 नग, जीरा 15 ग्राम, हल्दी पाउडर 10 ग्राम, पान के पत्ते पांच नग, छोटे प्याज दो नग पीसकर गुड़ में मिलाकर सुबह-शाम 10 से 14 दिन तक खिलाएं। यह देसी औषधि इलाज में काफी कारगर है।
जिले में पशु:
- 2,75,521 गोवंश हैं जिले में।
- 1,90,894 महिषवंश हैं जिले में।
गाय की मौत के बाद जागा प्रशासन
रविवार को गाय की मौत होने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। लंपी वायरस की रोकथाम के लिए जिलाधिकारी ने तहसीलवार उप जिलाधिकारियों को जोनल मजिस्ट्रेट नामित करते हुए रैपिड रिस्पांस टीम का गठन किया है। इसमें खंड विकास अधिकारी सेक्टर मजिस्ट्रेट व पशु चिकित्सक नोडल नामित किए गए हैं। इसके अलावा बीमारी से संबंधित किसी भी सूचना के लिए जिला मुख्यालय पर कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। जिसका मोबाइल नंबर 9415833790 है।
लंपी स्किन डिजीज से घबराने की जरूरत नहीं है। स्वच्छता और सतर्कता अपनाकर पशुओं का इस बीमारी से बचाव किया जा सकता है। जिला प्रशासन की ओर से बीमारी की रोकथाम के लिए रैपिड रिस्पांस टीम का गठन किया गया है। कंट्रोल रूम भी बनाया गया है। पशु पालक इस पर फोन कर सलाह व सूचना का आदान-प्रदान कर सकते हैं। बीमारी से ग्रसित पशु का दूध पीने से मानव जीवन को कोई हानि नहीं होती है।
- एके वैश्य, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी।
बोले लोग
गाय कई दिनों से बीमार है। इलाज करा रहे हैं। खाना-पीना सब छोड़ चुकी है। फिलहाल कोई सुधार नहीं दिख रहा।
- रामगती, पशुपालक महवा।
गांव में कई पशु लंपी वायरस की चपेट में हैं। जिला प्रशासन को इस पर ध्यान देना चाहिए। समय पर टीका लगता है न कोई पशुओं की जांच करने आता है। - सतीश यादव, महवा।
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लंपी वायरस से पशु के ग्रस्त होने का पहला केस 24 अगस्त को गौरीबाजार ब्लॉक के मठिया माफी गांव में सामने आया। इलाज के दौरान चिकित्सकों ने लक्षण के आधार पर बीमारी की पुष्टि की। अगले दिन से जिले के अन्य गांवों में भी लंपी के मामले मिलने लगे। विभाग ने बीमार पशुओं के खून के नमूने लेने शुरू कर दिए हैं। जल्द ही सभी ब्लाॅकों से एकत्र किए गए नमूनों को आईवीआरआई (इंडियन वेटरिनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट) बरेली भेजा जाएगा। ताकि वायरस के प्रकार व बदलते स्वरूप का पता लगाया जा सके।
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कोरोना की तरह संक्रामक है लंपी
उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. यूके सिंह ने बताया कि लंपी कोरोना की तरह संक्रामक बीमारी है। यह संपर्क में आने से एक से दूसरे पशु में फैलता है। इसमें भी सैनिटाइजेशन और संक्रमित पशु हो आइसोलेट कराने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। अभी तक जो भी केस मिले हैं उनकी पहचान लक्षण के आधार पर हुई है। लंपी के लक्षण दूसरी बीमारियों से ज्यादा मेल नहीं खाते हैं। यह बीमारी सिर्फ गोवंश में ही फैल रही है। इसका मनुष्यों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
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लंपी का नहीं है कोई टीका
जनपद में गोवंश की संख्या 2,75,521 है। जिसके मुकाबले पशुपालन विभाग ने अभी तक महज 30 हजार पशुओं का ही टीकाकरण कराया है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी एके वैश्य ने बताया कि लंपी के लिए कोई विशेष टीका नहीं बना है। इम्यूनिटी बूस्टर के तौर पर गोवंश को गोटपाक्स लगाया जाता है। इसे लंपी से बचाव के लिए 70 प्रतिशत असरदार माना गया है। शासन से गोटपॉक्स की 30 हजार खुराक मिली थी जिसे पशुओं को लगाया जा चुका है। एक से दो दिन में और खुराक मिल जाएंगी।
ये हैं बीमारी के लक्षण
लंपी स्किन डिजीज एक वायरल बीमारी है, जो गाय, भैंसों में होती है। लंपी स्किन डिजीज में पशु के शरीर पर गांठें बनने लगती हैं। इसके प्रसार के लिए जिम्मेदार एलएसडी वायरस मच्छरों और मक्खियों जैसे खून चूसने वाले कीड़ों से आसानी से फैलता है। साथ ही ये दूषित पानी, लार और चारे के माध्यम से भी फैलता है। बीमारी से ग्रसित पशुओं की मृत्यु दर अनुमान एक से पांच प्रतिशत होती है।
ऐसे करें बीमारी की रोकथाम
- बीमारी से ग्रसित पशुओं को स्वस्थ पशु से अलग रखें।
- पशुओं को मक्खी, चिचड़ी, मच्छर आदि से बचाएं।
- संक्रमित जगह की फरमलीन, ईथर, एल्कोहल से सफाई रखें।
- संक्रमित पशुओं को खाने के लिए संतुलित आहार तथा हरा चारा दें।
संक्रमण के बाद देसी औषधि भी कारगर
नीम के पत्ते, एक मुट्ठी तुलसी के पत्ते, लहसुन की कली 10 नग, लौंग 10 नग, काली मिर्च 10 नग, जीरा 15 ग्राम, हल्दी पाउडर 10 ग्राम, पान के पत्ते पांच नग, छोटे प्याज दो नग पीसकर गुड़ में मिलाकर सुबह-शाम 10 से 14 दिन तक खिलाएं। यह देसी औषधि इलाज में काफी कारगर है।
जिले में पशु:
- 2,75,521 गोवंश हैं जिले में।
- 1,90,894 महिषवंश हैं जिले में।
गाय की मौत के बाद जागा प्रशासन
रविवार को गाय की मौत होने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। लंपी वायरस की रोकथाम के लिए जिलाधिकारी ने तहसीलवार उप जिलाधिकारियों को जोनल मजिस्ट्रेट नामित करते हुए रैपिड रिस्पांस टीम का गठन किया है। इसमें खंड विकास अधिकारी सेक्टर मजिस्ट्रेट व पशु चिकित्सक नोडल नामित किए गए हैं। इसके अलावा बीमारी से संबंधित किसी भी सूचना के लिए जिला मुख्यालय पर कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। जिसका मोबाइल नंबर 9415833790 है।
लंपी स्किन डिजीज से घबराने की जरूरत नहीं है। स्वच्छता और सतर्कता अपनाकर पशुओं का इस बीमारी से बचाव किया जा सकता है। जिला प्रशासन की ओर से बीमारी की रोकथाम के लिए रैपिड रिस्पांस टीम का गठन किया गया है। कंट्रोल रूम भी बनाया गया है। पशु पालक इस पर फोन कर सलाह व सूचना का आदान-प्रदान कर सकते हैं। बीमारी से ग्रसित पशु का दूध पीने से मानव जीवन को कोई हानि नहीं होती है।
- एके वैश्य, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी।
बोले लोग
गाय कई दिनों से बीमार है। इलाज करा रहे हैं। खाना-पीना सब छोड़ चुकी है। फिलहाल कोई सुधार नहीं दिख रहा।
- रामगती, पशुपालक महवा।
गांव में कई पशु लंपी वायरस की चपेट में हैं। जिला प्रशासन को इस पर ध्यान देना चाहिए। समय पर टीका लगता है न कोई पशुओं की जांच करने आता है। - सतीश यादव, महवा।