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Deoria News: इलाज-बेटी की शादी के लिए लिया कर्ज... एजेंटों के जुल्म से छोड़ा घर
Sun, 30 Mar 2025 12:21 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sun, 30 Mar 2025 12:21 AM IST
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घर के अंदर चस्पा किया गया नोटिस।
संवाद न्यूज एजेंसी
सलेमपुर। इलाज और बेटियों की शादी के लिए लिए कर्ज का ऐसा कहर टूटा कि एक दर्जन महिलाएं अपने-अपने घर पर ताला बंद कर दूसरे प्रदेश चली गईं, जहां निजी कंपनियों में काम कर परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में झुंड बनाकर माइक्रो फाइनेंस कंपनी के एजेंट आते हैं और कर्ज लेने वाली महिलाओं के साथ वाद-विवाद करते हैं। विरोध करने पर केस में फंसाने का धमकी देते हैं।
रामपुर बछउर गांव निवासी उगेश राजभर ने बताया कि पत्नी ज्ञांती देवी ने दो वर्ष पहले बेटी की शादी के लिए चार फाइनेंस कंपनियों से तीन प्रतिशत ब्याज दर पर दो लाख रुपये कर्ज लिया था। कुछ माह लगातार ब्याज देती रही। बाद में एजेंटतीन प्रतिशत की जगह 22 प्रतिशत ब्याज वसूलने लगे।
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इंदु देवी ने बताया कि उसके पति को गंभीर बीमारी हो गई। इलाज के लिए घर पर पैसा नहीं था। उसने दो फाइनेंस कंपनी से 60- 60 हजार कर एक लाख 20 हजार रुपये कर्ज लिया, ताकि पति ठीक हो जाएं, लेकिन उनकी मौत हो गई।
परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। पैसा जमा नहीं कर सकी। रोज फाइनेंस कंपनी वाले गांव में आते हैं और दुर्व्यवहार करते हैं।
सीमा देवी ने बताया कि दो वर्ष पहले पति अच्छेबर की बीमारी के चलते तीन फाइनेंस कंपनी से डेढ़ लाख रुपये कर्ज लिए। फिर भी पति की जान नहीं बच पाई।
अब फाइनेंस कंपनी वाले घर आकर जेल भेजवाने की धमकी देते। फाइनेंस कंपनी वालों के उत्पीड़न के चलते कई महिलाएं घर छोड़कर दूसरे प्रदेश में चली गई हैं।
गुड्डी देवी पत्नी सुदेश ने बेटी की शादी में एक वर्ष पहले 50 हजार रुपये कर्ज लिया था। उषा के पति मिट्ठू राजभर को ब्रेन हैमरेज हो गया था। इलाज के लिए दो लाख बीस हजार रुपये कर्ज लिया था। पति की मौत भी हो गई।
कविता ने बताया कि पति वीरेंद्र राजभर की बीमारी के चलते एक कंपनी से 34 हजार रुपये कर्ज ली थी। सीता देवी पत्नी दिनेश बीमारी में पैसा ली थी।
गांव की प्रधान बेबी सिंह ने बताया कि फाइनेंस कंपनी वालों के उत्पीड़न और बेइज्जत करने से तंग आ चुकीं नीलम पत्नी मुन्ना राजभर, सीता देवी पत्नी दिनेश, आरती देवी पत्नी रामलखन, रंजू पत्नी संजय राजभर, सिंपी पत्नी ओमप्रकाश, नीलम पत्नी अशोक, सोनी पत्नी अखिलेश अपने-अपने घर मे ताला बंद कर दूसरे प्रदेश में मजदूरी करने को मजबूद हैं।
स्थिति यह है कि रोजाना झुंड बनाकर माइक्रो फाइनेंस कंपनी के एजेंट गाव में आ रहे हैं और गाली दे रहे हैं, जबकि सीता देवी और नीलम देवी तो पूना के एक निजी कंपनी में काम कर जीविका चला रही हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि फाइनेंस कंपनियों के एजेंटों ने महिलाओं को झांसा में डालकर लूटने का काम किया है। जब एक कंपनी लोन दी थी तो दूसरे कंपनी वालों ने क्यों लोन दिया।
आधार कार्ड नंबर डालने पर सबकुछ सो करता है इसके बावजूद लापरवाही कैसे हुई, यह तो जांच का विषय है।
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सलेमपुर। इलाज और बेटियों की शादी के लिए लिए कर्ज का ऐसा कहर टूटा कि एक दर्जन महिलाएं अपने-अपने घर पर ताला बंद कर दूसरे प्रदेश चली गईं, जहां निजी कंपनियों में काम कर परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में झुंड बनाकर माइक्रो फाइनेंस कंपनी के एजेंट आते हैं और कर्ज लेने वाली महिलाओं के साथ वाद-विवाद करते हैं। विरोध करने पर केस में फंसाने का धमकी देते हैं।
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रामपुर बछउर गांव निवासी उगेश राजभर ने बताया कि पत्नी ज्ञांती देवी ने दो वर्ष पहले बेटी की शादी के लिए चार फाइनेंस कंपनियों से तीन प्रतिशत ब्याज दर पर दो लाख रुपये कर्ज लिया था। कुछ माह लगातार ब्याज देती रही। बाद में एजेंटतीन प्रतिशत की जगह 22 प्रतिशत ब्याज वसूलने लगे।
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इंदु देवी ने बताया कि उसके पति को गंभीर बीमारी हो गई। इलाज के लिए घर पर पैसा नहीं था। उसने दो फाइनेंस कंपनी से 60- 60 हजार कर एक लाख 20 हजार रुपये कर्ज लिया, ताकि पति ठीक हो जाएं, लेकिन उनकी मौत हो गई।
परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। पैसा जमा नहीं कर सकी। रोज फाइनेंस कंपनी वाले गांव में आते हैं और दुर्व्यवहार करते हैं।
सीमा देवी ने बताया कि दो वर्ष पहले पति अच्छेबर की बीमारी के चलते तीन फाइनेंस कंपनी से डेढ़ लाख रुपये कर्ज लिए। फिर भी पति की जान नहीं बच पाई।
अब फाइनेंस कंपनी वाले घर आकर जेल भेजवाने की धमकी देते। फाइनेंस कंपनी वालों के उत्पीड़न के चलते कई महिलाएं घर छोड़कर दूसरे प्रदेश में चली गई हैं।
गुड्डी देवी पत्नी सुदेश ने बेटी की शादी में एक वर्ष पहले 50 हजार रुपये कर्ज लिया था। उषा के पति मिट्ठू राजभर को ब्रेन हैमरेज हो गया था। इलाज के लिए दो लाख बीस हजार रुपये कर्ज लिया था। पति की मौत भी हो गई।
कविता ने बताया कि पति वीरेंद्र राजभर की बीमारी के चलते एक कंपनी से 34 हजार रुपये कर्ज ली थी। सीता देवी पत्नी दिनेश बीमारी में पैसा ली थी।
गांव की प्रधान बेबी सिंह ने बताया कि फाइनेंस कंपनी वालों के उत्पीड़न और बेइज्जत करने से तंग आ चुकीं नीलम पत्नी मुन्ना राजभर, सीता देवी पत्नी दिनेश, आरती देवी पत्नी रामलखन, रंजू पत्नी संजय राजभर, सिंपी पत्नी ओमप्रकाश, नीलम पत्नी अशोक, सोनी पत्नी अखिलेश अपने-अपने घर मे ताला बंद कर दूसरे प्रदेश में मजदूरी करने को मजबूद हैं।
स्थिति यह है कि रोजाना झुंड बनाकर माइक्रो फाइनेंस कंपनी के एजेंट गाव में आ रहे हैं और गाली दे रहे हैं, जबकि सीता देवी और नीलम देवी तो पूना के एक निजी कंपनी में काम कर जीविका चला रही हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि फाइनेंस कंपनियों के एजेंटों ने महिलाओं को झांसा में डालकर लूटने का काम किया है। जब एक कंपनी लोन दी थी तो दूसरे कंपनी वालों ने क्यों लोन दिया।
आधार कार्ड नंबर डालने पर सबकुछ सो करता है इसके बावजूद लापरवाही कैसे हुई, यह तो जांच का विषय है।