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भू-माफिया : सिर्फ छोटों पर नकेल, बड़े कर रहे खुला खेल

Thu, 24 Aug 2023 12:38 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया Updated Thu, 24 Aug 2023 12:38 AM IST
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Land mafia: Cracking down only on the small ones, the big ones are playing an open game
देवरिया। दो साल पहले जिले के भू-माफिया की सूची बनाने में खूब खेल हुआ। कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से सूची में कुछ छोटे खिलाड़ियों को शामिल कर बड़ों को छोड़ दिया गया। इससे उनका मनोबल बढ़ गया और उन्होंने कई कीमती जमीनों पर कब्जा कर डाला। ऐसे में एक बार फिर से अवैधानिक तरीके से कब्जा कर रहे भू-माफिया की सूची तैयार करने की तैयारी है। इसमें छोटे-बड़े सभी माफिया को शामिल कर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात प्रशासन कह रहा है। सीआरओ ने सभी तहसील के एसडीएम ने रिपोर्ट मांगी है।
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करीब दो साल पहले जिले में 28 भू-माफिया की सूची तैयार की गई थी। इस सूची की हकीकत यह थी कि इसमें शामिल सभी भू-माफिया छोटे-मोटे मामलों में लिप्त थे। ज्यादातर खलिहान और पोखरी की भूमि पर कब्जा करने वालों को भू माफिया बना कर केस दर्ज कराया गया था। बाद में चलकर सभी ने जमानत करा ली। वहीं जनपद के बड़े भू-माफिया को इस सूची में शामिल ही नहीं किया गया था। जिससे वे बेरोकटोक जमीनों पर कब्जा करते रहे और उनके विरुद्ध कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हो पाई। ये माफिया कर्मचारियों की मिलीभगत से जमीन अपने नाम भी कराते गए। मामला ठंडा होने पर भू-माफिया से आला अफसरों की नजर हट गई। इस कारण उनका मनोबल बढ़ गया।
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इतना नहीं, सरकारी भूमि पर कब्जा हटाने के बाद भी उन्हें सूची में नहीं डाला गया, जबकि नियम है कि हर माह तहसील और जिले स्तर पर एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स की बैठक होनी चाहिए। पर दो साल से बैठक न होने से भू-माफिया निर्भीक होकर जमीनों को अपने नाम कराने और कब्जा करने का काम कर रहे हैं। अब नई सूची में देखना है कि बड़े भू-माफिया के नाम शामिल किए जा रहे हैं कि नहीं। नई सूची तैयार होने की तैयारी के बीच फिर बड़े माफिया इस सूची से नाम हटवाने की जुगत में लग गए हैं।
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केस- एक
- रुद्रपुर में राप्ती नदी के किनारे 900 एकड़ जंगल गजेटियर में है। पर अभी कुछ दिन पहले इसकी जांच कराई गई तो पता चला कि महज एक एकड़ जंगल बचा हुआ है। पर इस पर कब्जा करने वालों का नाम भू-माफिया सूची में नहीं डाला गया था।
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केस- दो
- बरहज तहसील के सरयू नदी के उस पार जिले के छह राजस्व गांव हैं। यहां गोरखपुर, देवरिया, मऊ जिले के तीन हजार किसानों की तकरीबन 4650 एकड़ भूमि पर भू-माफिया का कब्जा है। पर यहां कब्जा करने वाले भी भू माफिया की सूची में नहीं शामिल किए गए।
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केस-तीन
-रुद्रपुर तहसील क्षेत्र में करोड़ों रुपये की सीलिंग की भूमि के मामले में वर्ष 2017 से लंबित रिकॉल आवेदन में भी निर्णय पारित करने का निर्देश डीएम ने दी तो जांच में पता चला कि ग्राम जंगल तरैनी में 35.18 एकड़, परसा जोकहा में 0.66 एकड़ भूमि 13 जनवरी 1989 को सरकारी घोषित हुई थी। इसके अलावा भी तहसील क्षेत्र के कुछ अन्य गांवों के 7.30 एकड़ से अधिक भूमि सीलिंग के तहत निकली थी। अफसरों की मिलीभगत से धारा - 34 और 229 बी के तहत उक्त भूमि दूसरे के नाम कर दी गई।

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कोट
- सरकारी जमीनों पर कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती है। कब्जा भी हटवाया जाता है। भू माफिया की नई सूची तैयार की जा रही है। इसके लिए सभी तहसीलों से रिपोर्ट मांगी गई है।
- रजनीश राय, सीआरओ
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