फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Deoria News ›   Insurance company cheated

कृषि मंत्री के जिले में बीमा कंपनी ने किसानों को दिया धोखा

Thu, 09 Jan 2020 11:00 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 09 Jan 2020 11:00 PM IST
विज्ञापन
Insurance company cheated
किसानों से फसल बीमा कंपनी ने किया धोखा
विज्ञापन

बारिश से धान की फसल नुकसान, बीमा कंपनी ने मुआवजा देने से इन्कार किया
धान और गन्ने की फसल को पालिसी से बाहर बताया, जिले के अफसर भी खामोश
नीलांबुज मिश्र
देवरिया। कृषि मंत्री के जिले में फसल बीमा कंपनी के नियमों में किसानों की क्षतिपूर्ति राशि फंस गई है। बारिश में धान की फसल डूबी तो प्रधानमंत्री फसल बीमा कराने वाले किसानों को क्षतिपूर्ति राशि की उम्मीद जगी। सर्वे के बाद जब बीमा कंपनी को रिपोर्ट गई तो मालूम हुआ कि इस पालिसी में धान और गन्ने की फसल शामिल ही नहीं हैं। इसकी जानकारी होने पर अफसरों ने जहां चुप्पी साध ली, वहीं किसान सन्न रह गए और सरकारी सिस्टम को कोस रहे हैं।
देवरिया में प्रधानमंत्री फसल बीमा करने की जिम्मेदार ओरियंटल इंश्योरेंस कंपनी को मिली है। अफसरों ने अभियान चलाकर करीब 42 हजार किसानों का बीमा कराया, जिसमें 16 हजार किसानों ने व्यक्तिगत क्लेम और बाकी का किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए फसल बीमा हुआ था। बीच में लगातार हुई बारिश से जलभराव होने के कारण धान की फसल बर्बाद हो गई। बीमा कराने वाले करीब 1600 किसानों की जलभराव से धान की फसल बर्बाद होने की शिकायत अफसरों की टेबल तक पहुंची। जिला प्रशासन के निर्देश पर राजस्व टीम, कृषि विभाग और बीमा कंपनी ने सर्वे किया तो 1557 किसानों का धान की फसल नुकसान पाया गया। इसकी रिपोर्ट जब ओरियंटल इश्योरेंस कंपनी भेजी गई तो कंपनी ने क्षतिपूर्ति राशि देने से इन्कार कर दिया। अफसरों ने इंश्योरेंस कंपनी के जिला कोआर्डिनेटर और किसानों को आमने-सामने बैठाकर वार्ता की। तो कंपनी के अफसरों ने बताया कि जिस पालिसी के अंतर्गत किसानों का प्रधानमंत्री फसल बीमा हुआ है। उस पालिसी से धान और गन्ने की फसल नहीं हैं। इन दोनों फसलों का बाढ़ या जलभराव से नुकसान होने पर बीमा नहीं मिलेगा, जबकि इसके पहले किसी को भी इसकी जानकारी बीमा कंपनी की ओर से नहीं दी गई थी, जबकि अन्य जनपदों में ऐसी कोई भी पालिसी बीमा कंपनियों की ओर से लागू नहीं की गई है। कृषि मंत्री के जिले में किसान खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। अफसरों का दबाव पड़ने पर बीमा कंपनी क्रॉप कटिंग के आधार पर क्षतिपूर्ति राशि देने की बात स्वीकार की है। क्रॉप कटिंग हो चुकी है, बावजूद अभी तक किसानों को क्षतिपूर्ति राशि नहीं मिल सकी है, बीमा कंपनी के अफसर भी खामोश हैं। इस बाबत कृषि उप निदेशक डॉ. एके मिश्र ने बताया कि उस समय कंपनी ने ऐसी कोई भी जानकारी नहीं दी थी। सर्वे रिपोर्ट होने के बाद इसकी जानकारी हुई है। क्रॉप कटिंग कराया गया है। इस आधार पर बीमा कंपनी किसानों को मुआवजा देगी।
विज्ञापन

बीमा कराने वाले किसान बोले
नुकसान हुए फसल की क्षतिपूर्ति राशि लेने के लिए किसान अभी भी अफसरों के कार्यालयों का चक्कर काट रहे हैं। क्रॉप कटिंग के जरिए मुआवजा मिलने का आश्वासन किसानों को अफसर दे रहे हैं। पहाड़पुर गांव निवासी किसान अमित राय, चरियांव गांव निवासी भरत राय, खजुरी करौता गांव निवासी अंबिका सिंह, गड़ेर निवासी मारकंडेय सिंह ने बताया कि व्यक्तिगत क्लेम और केसीसी के जरिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना कराया था। बारिश में फसल बर्बाद होने के बाद सर्वे रिपोर्ट गई तो बीमा कंपनी ने पालिसी में नियमों का हवाला देने हुए क्षतिपूर्ति राशि देने से मना कर दिया, जबकि ऐसी जानकारी कभी भी किसानों को नहीं दी गई थी। यह किसानों के साथ धोखा है। कृषि मंत्री के जिले के किसानों की जब ऐसी स्थिति है तो अन्य जिलों में क्या होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

बीमा कंपनी पर कार्रवाई से कतरा रहे अफसर
ओरियंटल इश्योरेंस कंपनी ने किसानों का प्रधानमंत्री फसल बीमा किया है। कंपनी के वर्कर मनमानी कर रहे हैं। धान की फसल बर्बाद होने के बाद मुआवजा मिलने की बात आई तो सभी को जानकारी हुई कि पालिसी से गन्ने और धान की फसल नहीं है। तीन वर्ष पूर्व भी जब सूखा पड़ा तो सरकार की ओर से मुआवजा दिया गया, लेकिन बीमा कंपनी ने फूटी कौड़ी भी किसानों को नहीं दी थी। शिकायत के बाद भी अफसर बीमा कंपनी पर कार्रवाई से कतरा रहे हैं। किसानों को बिना जानकारी दिए प्रीमियम अकाउंट से बीमा कंपनी को दे दिया जाता है। इस वर्ष अधिकांश किसान व्यक्तिगत क्लेम भी किए थे, भाकियू इसको लेकर आंदोलन करेगा। - राघवेंद्र प्रताप शाही, जिलाध्यक्ष भाकियू
किसानों को पढ़ना चाहिए पालिसी
जिस फसल पालिसी के तहत प्रधानमंत्री फसल बीमा हुआ है। उसमें जलभराव से धान और गन्ने की फसल नुकसान होने पर मुआवजा देने का प्रविधान नहीं है। कंपनी के पालिसी में इसका जिक्र भी किया गया है। किसानों को इसे पढ़ना चाहिए, जबकि पिछले वर्ष ऐसा कोई प्रविधान नहीं था। यह पालिसी ऊपर से तय होती है।

- विनोद मौर्या, जिला कोआर्डिनेटर, ओरिएंटल इंश्योरेंस
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत जिले के करीब 42 हजार किसानों ने बीमा कराया है। इंश्योरेंस कंपनी के जिला कोआर्डिनेटर के अनुसार किसानों ने बीमा कंपनी को करीब सवा दो करोड़ से अधिक प्रीमियम दिया है, लेकिन फसल क्षतिपूर्ति के नाम पर एक भी किसानों को फूटी कौड़ी भी नहीं मिली है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed