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जांच टीम के आने की सुगबुगाहट से पीडब्लूडी में मची खलबली
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जांच टीम के आने की सुगबुगाहट से पीडब्ल्यूडी में खलबली
दो साल में की गई अनियमितताओं का खुलेगा कच्चा-चिट्ठा
अधूरे फाइलों को पूरा करने में जुटे अधिकारी-कर्मचारी
अबतक नहीं बैठ पाया डेढ़ टन तारकोल का हिसाब
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड में हुई अनियमितताओं की जांच के लिए टीम गठित होते ही विभाग में खलबली मच गई है। उन सभी कार्यों के हिसाब बैठाए जा रहे हैं, जिनमें घोटाले का अंदेशा है। इसके लिए स्थानांतरित हो चुके इंजीनियरों व कर्मचारियों की भी मदद ली जा रही है। बड़ा घोटाला लोक सभा चुनाव के दौरान गड्ढ़ामुक्ति के कार्य में हुआ है। वहीं, बिना टेंडर कराए चहेते ठेकेदारों को किए गए करोड़ों के भुगतान का मामला भी अधिकारियों के गले की फांस बनी हुई है।
छह माह पहले मामला उजागर होने के बाद शासन ने एक्सईएन समेत चार सहायक अभियंता व नौ अवर अभियंताओं का तबादला कर दिया। नए इंजीनियरों की तैनाती के बाद जांच प्रक्रिया तेज कर दी गई है। शासन अधिकारियों की तीन सदस्यीय जांच टीम कर दो सप्ताह के भीतर आख्या प्रस्तुत करने को कहा है। इसमें एक अप्रैल 2017 से 31 अगस्त 2019 तक किए गए भुगतानों स्थलीय व कागजी सत्यापन किया जाएगा। जांच टीम कभी भी प्रांतीय खंड के दफ्तर में दस्तक दे सकती है।
इनसेट
इन मामलों में फंसेगा पेंच
गड्ढ़ामुक्ति: पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड में गड्ढ़ामुक्ति के नाम पर करोड़ों के घपले की आशंका जताई जा रही है। तमाम सड़कें ऐसी हैं जिन पर काम कराए बिना ही भुगतान कर दिया गया है। वित्तीय वर्ष 2018-19 में डेढ़ सौ से अधिक सड़कों पर गड्ढ़ामुक्ति के नाम पर सरकारी धन की बंदरबांट किया गया है।
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स्पीड ब्रेकर: जिले की तमाम सड़कों पर स्पीड ब्रेकर बनाने के नाम पर भी लाखों रुपये का गोलमाल किया गया है। कागजों में दर्शाए गए अधिकांश स्पीड ब्रेकर धरातल पर मौजूद रहीं हैं।
सप्लाई ऑर्डर: सप्लाई ऑर्डर के नाम पर भी बड़ा गड़बड़झाला हुआ है। टेंडर से बचने के लिए अधिकारियों ने इस काम को टुकड़ों में बांटकर चहेतों को खूब लाभ पहुंचाया है।
फंड डायवर्जन: निर्धारित कार्य के लिए अवमुक्त धनराशि दूसरे कार्यों पर खर्च की गई है। कई सड़कें ऐसी हैं, जिनके लिए धन तो आवंटित हुआ लेकिन वह कहीं और खर्च कर दिया गया। भौतिक सत्यापन में इस तरह के गड़बड़झाले की पोल खुलनी तय है।
स्टोर: प्रांतीय खंड के स्टोर में भी करोड़ रुपये के घालमेल की आशंका है। सेतुओं की प्लेट्स व पीपे की कटिंग कर बेचे जाने का मामला प्रकाश में आ रहा है। बीते एक माह से डेढ़ सौ टन तारकोल का हिसाब बैठा पाना जिम्मेदारों के लिए पहेली बनी हुई है।
रुद्रपुर-कपरवार मार्ग: रुद्रपुर-कपरवार जिला मार्ग के निर्माण से लगायत गड्ढा भरने के कार्यों में धांधली की गई है। 13 किमी सड़क बनाने के लिए स्वीकृत हुई धनराशि से महज दस किमी सड़क निर्माण हुआ है। गड़बड़ी प्रतीत होने पर एसई ने सड़क का नमूना जांच के लिए लैब में भेजा है।
वर्जन
जांच टीम जनपद में आने वाली है। हम उनका पूरा सहयोग करेंगे, सभी कार्यों की फाइल तैयार है। टीम किस दिन आएगी। इसकी जानकारी फिलहाल नहीं है।
-अशोक कुमार, एक्सईएन, पीडब्लूडी प्रांतीय खंड।
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दो साल में की गई अनियमितताओं का खुलेगा कच्चा-चिट्ठा
अधूरे फाइलों को पूरा करने में जुटे अधिकारी-कर्मचारी
अबतक नहीं बैठ पाया डेढ़ टन तारकोल का हिसाब
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड में हुई अनियमितताओं की जांच के लिए टीम गठित होते ही विभाग में खलबली मच गई है। उन सभी कार्यों के हिसाब बैठाए जा रहे हैं, जिनमें घोटाले का अंदेशा है। इसके लिए स्थानांतरित हो चुके इंजीनियरों व कर्मचारियों की भी मदद ली जा रही है। बड़ा घोटाला लोक सभा चुनाव के दौरान गड्ढ़ामुक्ति के कार्य में हुआ है। वहीं, बिना टेंडर कराए चहेते ठेकेदारों को किए गए करोड़ों के भुगतान का मामला भी अधिकारियों के गले की फांस बनी हुई है।
छह माह पहले मामला उजागर होने के बाद शासन ने एक्सईएन समेत चार सहायक अभियंता व नौ अवर अभियंताओं का तबादला कर दिया। नए इंजीनियरों की तैनाती के बाद जांच प्रक्रिया तेज कर दी गई है। शासन अधिकारियों की तीन सदस्यीय जांच टीम कर दो सप्ताह के भीतर आख्या प्रस्तुत करने को कहा है। इसमें एक अप्रैल 2017 से 31 अगस्त 2019 तक किए गए भुगतानों स्थलीय व कागजी सत्यापन किया जाएगा। जांच टीम कभी भी प्रांतीय खंड के दफ्तर में दस्तक दे सकती है।
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इन मामलों में फंसेगा पेंच
गड्ढ़ामुक्ति: पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड में गड्ढ़ामुक्ति के नाम पर करोड़ों के घपले की आशंका जताई जा रही है। तमाम सड़कें ऐसी हैं जिन पर काम कराए बिना ही भुगतान कर दिया गया है। वित्तीय वर्ष 2018-19 में डेढ़ सौ से अधिक सड़कों पर गड्ढ़ामुक्ति के नाम पर सरकारी धन की बंदरबांट किया गया है।
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स्पीड ब्रेकर: जिले की तमाम सड़कों पर स्पीड ब्रेकर बनाने के नाम पर भी लाखों रुपये का गोलमाल किया गया है। कागजों में दर्शाए गए अधिकांश स्पीड ब्रेकर धरातल पर मौजूद रहीं हैं।
सप्लाई ऑर्डर: सप्लाई ऑर्डर के नाम पर भी बड़ा गड़बड़झाला हुआ है। टेंडर से बचने के लिए अधिकारियों ने इस काम को टुकड़ों में बांटकर चहेतों को खूब लाभ पहुंचाया है।
फंड डायवर्जन: निर्धारित कार्य के लिए अवमुक्त धनराशि दूसरे कार्यों पर खर्च की गई है। कई सड़कें ऐसी हैं, जिनके लिए धन तो आवंटित हुआ लेकिन वह कहीं और खर्च कर दिया गया। भौतिक सत्यापन में इस तरह के गड़बड़झाले की पोल खुलनी तय है।
स्टोर: प्रांतीय खंड के स्टोर में भी करोड़ रुपये के घालमेल की आशंका है। सेतुओं की प्लेट्स व पीपे की कटिंग कर बेचे जाने का मामला प्रकाश में आ रहा है। बीते एक माह से डेढ़ सौ टन तारकोल का हिसाब बैठा पाना जिम्मेदारों के लिए पहेली बनी हुई है।
रुद्रपुर-कपरवार मार्ग: रुद्रपुर-कपरवार जिला मार्ग के निर्माण से लगायत गड्ढा भरने के कार्यों में धांधली की गई है। 13 किमी सड़क बनाने के लिए स्वीकृत हुई धनराशि से महज दस किमी सड़क निर्माण हुआ है। गड़बड़ी प्रतीत होने पर एसई ने सड़क का नमूना जांच के लिए लैब में भेजा है।
वर्जन
जांच टीम जनपद में आने वाली है। हम उनका पूरा सहयोग करेंगे, सभी कार्यों की फाइल तैयार है। टीम किस दिन आएगी। इसकी जानकारी फिलहाल नहीं है।
-अशोक कुमार, एक्सईएन, पीडब्लूडी प्रांतीय खंड।