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‘बढ़ रही है नारी चेतना’
अमर उजाला ब्यूरो/देवरिया
Updated Mon, 15 Feb 2016 11:36 PM IST
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रामजी सहाय पीजी कॉलेज में सोमवार को महिला सशक्तिकरण में महिलाओं की भूमिका विषय पर सेमीनार का आयोजन हुआ।
समाज शास्त्र विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में नारी शक्ति पर छात्राओं ने अपने विचार रखे।
मुख्य वक्ता डॉ. संतोष यादव ने कहा कि आजादी के बाद देश में दलित और नारी समाज की मुख्य धारा से दूर थे जिन्हें जोड़ना एक बड़ी चुनौती थी।
हालांकि वैदिक काल में स्त्री समाज निर्माण में महत्वपूर्ण भूूमिका में थी। इतिहास के अनुसार मुगल काल से नारियों के हक पर अतिक्रमण होने लगा।
लेकिन अब ऐसा नहीं है। आधुनिक समय में नारी चेतना तेजी से बढ़ रही है। अब नारी को अबला कहना उनका अपमान होगा। वह सबला हो चुकी है।
डॉ. रेखा पांडेय ने कहा कि तुलसीदास से लेकर भारतेंदु ने नारी की महत्ता को बताया है। विज्ञापनों के माध्यम से नारी को उपयोग करने का संदेश दिया जा रहा है।
इस पर पाबंदी लगनी चाहिए। देश में महिलाएं आरक्षण की मोहताज नहीं। उनको कर्म के अनुसार अधिकार चाहिए। महेश्वर सिंह ने लोगों से नारी शिक्षा और सुरक्षा में बढ़ चढ़ कर हिस्सेदारी करने की अपील की।
इस दौरान स्नातक और स्नातकोत्तर की छात्राओं ने महिला सशक्तिकरण में अपने शोध को पढ़ा। सेमिनार की शुरूआत प्रबंधक चंद्रप्रकाश श्रीवास्तव और प्राचार्य डॉ. चंद्रभान वर्मा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
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इस अवसर पर डॉ. सुधीर श्रीवास्तव, डॉ. मिथिलेश शुक्ला, डॉ. डीएन मिश्र, डॉ. दिनेशलाल, डॉ. अजय पांडेय, पारसनाथ यादव, गणेश शंकर शर्मा, रश्मि वर्नवाल, प्रगति, शैलेष कुमार, शिवमहिमा आदि मौजूद रहे।
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समाज शास्त्र विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में नारी शक्ति पर छात्राओं ने अपने विचार रखे।
मुख्य वक्ता डॉ. संतोष यादव ने कहा कि आजादी के बाद देश में दलित और नारी समाज की मुख्य धारा से दूर थे जिन्हें जोड़ना एक बड़ी चुनौती थी।
हालांकि वैदिक काल में स्त्री समाज निर्माण में महत्वपूर्ण भूूमिका में थी। इतिहास के अनुसार मुगल काल से नारियों के हक पर अतिक्रमण होने लगा।
लेकिन अब ऐसा नहीं है। आधुनिक समय में नारी चेतना तेजी से बढ़ रही है। अब नारी को अबला कहना उनका अपमान होगा। वह सबला हो चुकी है।
डॉ. रेखा पांडेय ने कहा कि तुलसीदास से लेकर भारतेंदु ने नारी की महत्ता को बताया है। विज्ञापनों के माध्यम से नारी को उपयोग करने का संदेश दिया जा रहा है।
इस पर पाबंदी लगनी चाहिए। देश में महिलाएं आरक्षण की मोहताज नहीं। उनको कर्म के अनुसार अधिकार चाहिए। महेश्वर सिंह ने लोगों से नारी शिक्षा और सुरक्षा में बढ़ चढ़ कर हिस्सेदारी करने की अपील की।
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इस दौरान स्नातक और स्नातकोत्तर की छात्राओं ने महिला सशक्तिकरण में अपने शोध को पढ़ा। सेमिनार की शुरूआत प्रबंधक चंद्रप्रकाश श्रीवास्तव और प्राचार्य डॉ. चंद्रभान वर्मा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
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इस अवसर पर डॉ. सुधीर श्रीवास्तव, डॉ. मिथिलेश शुक्ला, डॉ. डीएन मिश्र, डॉ. दिनेशलाल, डॉ. अजय पांडेय, पारसनाथ यादव, गणेश शंकर शर्मा, रश्मि वर्नवाल, प्रगति, शैलेष कुमार, शिवमहिमा आदि मौजूद रहे।