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हवा से बढ़ी गलन, ठंड से सावधान न रहने पर बिगड़ सकती है सेहत
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हवा से बढ़ी गलन, ठंड से सावधान न रहने पर बिगड़ सकती है सेहत
देवरिया। मौसम ने करवट बदल ली है। रविवार की सुबह से ही हल्के बादल छाएं रहे। धीमी गति से हवा चलने की वजह से कंपकंपी बढ़ गई है। तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। चिकित्सक बताते हैं कि ठंड में सावधान रहने की जरूरत है, वरना सेहत बिगड़ सकती है।
रविवार को सर्द हवाओं का असर इस कदर हुआ कि दिन में सूरज निकलने के बाद भी ठंड लगती रही। उधर अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। ठंड के बावजूद कंबल का वितरण किसी तहसील में नहीं हुआ है। न ही अलाव जलवाए जा रहे हैं। शहर में दो स्थानों पर रैन बसेरा नगरपालिका ने खोला तो है, लेकिन इंतजाम बेहतर नहीं है।
पहाड़ों की तरफ से आ रही सर्द हवाओं ने ठंड इस कदर बढ़ा दी है कि इसका असर पिछले दो दिनों से बना हुआ है। अस्पताल में सर्दी, खांसी, जुकाम और बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। तापमान के आंकड़ों पर गौर करें तो 17 दिसंबर को अधिकतम तापमान 21 और न्यूनतम तापमान 09 डिग्री सेल्सियस रहा। 18 दिसंबर को अधिकतम 20 और न्यूनतम 06 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा। रविवार 19 दिसंबर को अधिकतम 23 एवं न्यूनतम तापमान 08 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। शनिवार की शाम से हवाओं ने गलन बढ़ा दी है। बस अड्डा, रेलवे स्टेशन, अस्पताल के इमरजेंसी पर अलाव का कोई इंतजाम नहीं है। रैन बसेरा कहीं शहर में अभी नहीं खुल सका है।
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मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक व बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एचके मिश्रा ने कहा कि हर्ट व सांस के मरीजों को ठंड से बचने की आवश्यकता है। जो दवा लेते हैं, वे समय से लेते रहें। कोई परेशानी होने पर तत्काल चिकित्सक से सलाह लें। उन्होंने कहा कि ठंड से बचने के लिए गर्म कपड़े पहनें। टोपी, मोजा और दस्ताना पहनें। साथ ही बच्चों को भी बचा कर रखें। डॉ. एसएस द्विवेदी का कहना है कि ठंड लगने का अनुभव होने पर गर्म तरल पदार्थ चाय, दाल का पानी, काढ़ा आदि का सेवन करें। आराम न मिलने पर चिकित्सकीय सलाह लें। डॉ. एसएन मणि का कहना है कि ठंडे पानी के सेवन से बचें। समुचित कपड़े पहन कर बाहर निकालें। खुली हवा में शाम व सुबह लंबे समय तक न रहें।
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देवरिया। मौसम ने करवट बदल ली है। रविवार की सुबह से ही हल्के बादल छाएं रहे। धीमी गति से हवा चलने की वजह से कंपकंपी बढ़ गई है। तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। चिकित्सक बताते हैं कि ठंड में सावधान रहने की जरूरत है, वरना सेहत बिगड़ सकती है।
रविवार को सर्द हवाओं का असर इस कदर हुआ कि दिन में सूरज निकलने के बाद भी ठंड लगती रही। उधर अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। ठंड के बावजूद कंबल का वितरण किसी तहसील में नहीं हुआ है। न ही अलाव जलवाए जा रहे हैं। शहर में दो स्थानों पर रैन बसेरा नगरपालिका ने खोला तो है, लेकिन इंतजाम बेहतर नहीं है।
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पहाड़ों की तरफ से आ रही सर्द हवाओं ने ठंड इस कदर बढ़ा दी है कि इसका असर पिछले दो दिनों से बना हुआ है। अस्पताल में सर्दी, खांसी, जुकाम और बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। तापमान के आंकड़ों पर गौर करें तो 17 दिसंबर को अधिकतम तापमान 21 और न्यूनतम तापमान 09 डिग्री सेल्सियस रहा। 18 दिसंबर को अधिकतम 20 और न्यूनतम 06 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा। रविवार 19 दिसंबर को अधिकतम 23 एवं न्यूनतम तापमान 08 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। शनिवार की शाम से हवाओं ने गलन बढ़ा दी है। बस अड्डा, रेलवे स्टेशन, अस्पताल के इमरजेंसी पर अलाव का कोई इंतजाम नहीं है। रैन बसेरा कहीं शहर में अभी नहीं खुल सका है।
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मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक व बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एचके मिश्रा ने कहा कि हर्ट व सांस के मरीजों को ठंड से बचने की आवश्यकता है। जो दवा लेते हैं, वे समय से लेते रहें। कोई परेशानी होने पर तत्काल चिकित्सक से सलाह लें। उन्होंने कहा कि ठंड से बचने के लिए गर्म कपड़े पहनें। टोपी, मोजा और दस्ताना पहनें। साथ ही बच्चों को भी बचा कर रखें। डॉ. एसएस द्विवेदी का कहना है कि ठंड लगने का अनुभव होने पर गर्म तरल पदार्थ चाय, दाल का पानी, काढ़ा आदि का सेवन करें। आराम न मिलने पर चिकित्सकीय सलाह लें। डॉ. एसएन मणि का कहना है कि ठंडे पानी के सेवन से बचें। समुचित कपड़े पहन कर बाहर निकालें। खुली हवा में शाम व सुबह लंबे समय तक न रहें।