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Deoria News: नजदीक के अस्पतालों में इंतजाम नहीं, मेडिकल कॉलेज पहुंचने पहले रुक जा रही है सांस

Thu, 22 Jun 2023 12:57 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया Updated Thu, 22 Jun 2023 12:57 AM IST
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hospital facility
संवाद न्यूज एजेंसी
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देवरिया। तेज गर्मी के बीच सबसे अधिक मरने वालों की संख्या देहात के इलाकों के लोगों की है। इसमें ऐसे लोग मरे हैं जिनका सफर घर से 90 तो 40 किलोमीटर का मेडिकल कॉलेज पहुंचने में रहा है। जबकि दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर सरकारी व्यवस्था बदहाल है। यहां पर डाक्टर और अन्य सुविधाओं का अभाव है। इसके कारण लोग रात हो या दिन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी पर पहुंच रहे हैं।
जून माह में हाफ्ते हुए और सांस फूलते हुए तो कोई मृत अवस्था में मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी पर पहुंचा है। तेज गर्मी के बीच बीमार पड़े बुजुर्ग से लेकर नौजवान तक इलाज में देरी के कारण ही मरे हैं। इसमें से कुछ की हालत यह है कि नजदीक के अस्पताल पहुंचे तो उन्हें रेफर कर दिया गया, क्योंकि सीएचसी, पीएचसी पर संसाधनों की कमी रही और आवश्यक दवाएं भी कम रहीं। इसी बीच एंबुलेंस बुलाने में भी इनको एक घंटे तक इंतजार करना पड़ा। जबकि दूसरी तरफ निजी वाहन से भी पहुंचने में घंटों सफर करना पड़ा। अगर जिले की भौगोलिक स्थिति पर नजर डाली जाए तो बिहार सीमा से सटा जनपद पूरब, पश्चिम में करीब 105 किलोमीटर है। उत्तर-दक्षिण की बात करें तो 70 से 80 किलोमीटर है। कई ऐसे गांव हैं जो जिला मुख्यालय से 90 किलोमीटर की दूरी पर हैं। ऐसे मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। हालांकि विभाग का दावा है कि सभी नजदीकी सीएचसी, पीएचसी पर सुविधाएं हैं।
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केस नंबर-1
- मईल थाना क्षेत्र के बरेजी गांव निवासी रामभवन की दो दिन पहले तबियत खराब हुई। एंबुलेंस के लिए फोन किए तो एक घंटे बाद पहुंचा। सांस फूलते हुए इमरजेंसी पहुंचे तो उनकी कुछ ही देर में मौत हो गई।
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केस नंबर- दो
- मैरवा की पतिराजी देवी की तबियत खराब होने पर नजदीक के अस्पताल परिजन ले गए, जहां से रेफर कर दिया गया। परिजन मेडिकल कॉलेज डेढ़ से दो घंटे में इमरजेंसी पहुंचे इससे पहले रास्ते में उन्होंने दम तोड़ दिया था।

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केस नंबर- तीन
- भाटपाररानी तहसील क्षेत्र के कुकुरघाटी निवासी बुजुर्ग सच्चिदानंद को सांस लेने में परेशानी हुई। पीएचसी पर सुविधा न होने के कारण उन्हें चालीस किलोमीटर का सफर तय कर मेडिकल कॉलेज भेजा गया, जहां पहुंचने पर डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
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- तेज बुखार के मरीज को शरीर पर पानी का पोछा व तरल पदार्थ देेना चाहिए। इस तरह से अगर एक से डेढ़ घंटे में इलाज मिल जाना चाहिए।
डॉ. पवन अरोरा, एमडी मेडिसिन
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