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Deoria News: 27 साल से बंद पड़ी है गौरी बाजार चीनी मिल
Sun, 16 Feb 2025 11:31 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sun, 16 Feb 2025 11:31 PM IST
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27 साल से बंद पड़ी है गौरी बाजार चीनी मिल
- परिसंपत्तियों की रक्षा और जमीन से कब्जा हटाने का शासन ने दिया निर्देश
वर्ष 1998 में बंद हो गई थी चीनी मिल
- सार्वजनिक संपत्तियों को लेकर अभियान चला रही है केंद्र व राज्य सरकार
गौरी बाजार। कस्बे की चीनी मिल को ब्रिटिश हुकूमत ने वर्ष 1914 में स्थापित की थी। ढाई दशक से बंद पड़ी गौरी बाजार चीनी मिल परिसर का कुल क्षेत्रफल 60.78 एकड़ है। आजादी के बाद केंद्र सरकार के कपड़ा मंत्रालय के अधीन संचालित चीनी मिल 27 साल बाद 1998 में बंद हो गई। बंदी के बाद चीनी मिल कई बार बिकी। कुछ खरीदार इसका स्क्रैप भी उठा ले गए।
किसानों एवं श्रमिकों ने कई बार आंदोलन भी किया। देवरिया से दिल्ली तक आवाज बुलंद हुई। आंदोलन के दौरान लगभग आधा दर्जन श्रमिक दुर्घटना के शिकार हो भी हुए। समय बीतने के साथ वीरान पड़ी चीनी मिल में दर्जनों बार चोरियां भी हुईं। वहीं लोगों ने मिल के आसपास की जमीन पर जगह-जगह कब्जा भी कर लिया। अब केंद्र व राज्य सरकार ने सार्वजनिक संपत्तियों को लेकर देश व प्रदेश में अभियान चला रखा है।
इसी क्रम में केंद्र सरकार के कपड़ा मंत्रालय के विशेष सचिव ने इस संबंध में एक पत्र विशेष सचिव उत्तर प्रदेश सरकार को भेजते हुए केंद्रीय सार्वजनिक निगम भूमि एवं उपक्रम की परिसंपत्तियों को सुरक्षित करते हुए अतिक्रमण हटाने को कहा है। इसके मद्देनजर विशेष सचिव उत्तर प्रदेश शासन ने जिला प्रशासन से अवैध कब्जों को हटाने का फरमान जारी किया है। जिला प्रशासन इसकी तैयारी में जुट गया है।
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शासन से पत्र मिलने के बाद नायब तहसीलदार व राजस्व कर्मी को मौके पर भेजा गया था। किसी तरह का अतिक्रमण नहीं मिला है। परिसंपत्तियों की रक्षा के लिए निगरानी की जा रही है।
- विपिन कुमार द्विवेदी, एसडीएम सदर
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- परिसंपत्तियों की रक्षा और जमीन से कब्जा हटाने का शासन ने दिया निर्देश
वर्ष 1998 में बंद हो गई थी चीनी मिल
- सार्वजनिक संपत्तियों को लेकर अभियान चला रही है केंद्र व राज्य सरकार
गौरी बाजार। कस्बे की चीनी मिल को ब्रिटिश हुकूमत ने वर्ष 1914 में स्थापित की थी। ढाई दशक से बंद पड़ी गौरी बाजार चीनी मिल परिसर का कुल क्षेत्रफल 60.78 एकड़ है। आजादी के बाद केंद्र सरकार के कपड़ा मंत्रालय के अधीन संचालित चीनी मिल 27 साल बाद 1998 में बंद हो गई। बंदी के बाद चीनी मिल कई बार बिकी। कुछ खरीदार इसका स्क्रैप भी उठा ले गए।
किसानों एवं श्रमिकों ने कई बार आंदोलन भी किया। देवरिया से दिल्ली तक आवाज बुलंद हुई। आंदोलन के दौरान लगभग आधा दर्जन श्रमिक दुर्घटना के शिकार हो भी हुए। समय बीतने के साथ वीरान पड़ी चीनी मिल में दर्जनों बार चोरियां भी हुईं। वहीं लोगों ने मिल के आसपास की जमीन पर जगह-जगह कब्जा भी कर लिया। अब केंद्र व राज्य सरकार ने सार्वजनिक संपत्तियों को लेकर देश व प्रदेश में अभियान चला रखा है।
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इसी क्रम में केंद्र सरकार के कपड़ा मंत्रालय के विशेष सचिव ने इस संबंध में एक पत्र विशेष सचिव उत्तर प्रदेश सरकार को भेजते हुए केंद्रीय सार्वजनिक निगम भूमि एवं उपक्रम की परिसंपत्तियों को सुरक्षित करते हुए अतिक्रमण हटाने को कहा है। इसके मद्देनजर विशेष सचिव उत्तर प्रदेश शासन ने जिला प्रशासन से अवैध कब्जों को हटाने का फरमान जारी किया है। जिला प्रशासन इसकी तैयारी में जुट गया है।
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शासन से पत्र मिलने के बाद नायब तहसीलदार व राजस्व कर्मी को मौके पर भेजा गया था। किसी तरह का अतिक्रमण नहीं मिला है। परिसंपत्तियों की रक्षा के लिए निगरानी की जा रही है।
- विपिन कुमार द्विवेदी, एसडीएम सदर