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खुदाई में मिला आठवीं शताब्दी का दुर्लभ कूप
अमर उजाला ब्यूरो/देवरिया
Updated Mon, 08 Feb 2016 11:37 PM IST
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पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व के नगर रुद्रपुर की माटी में सदियों का इतिहास दबा है। यहां पहले हुए हुए उत्खनन में ऑठवी शताब्दी के कलाकृतियों के चिन्ह प्राप्त होते रहे हैं।
बीते दिनों दुग्धेश्वरनाथ मंदिर परिक्षेत्र में स्थिति गिरिजा सरोवर के सुंदरीकरण के दौरान भी आठवीं शताब्दी का कुंआ मिला। इस पुराने कूप को देखने के लिए लोगों की भीड़ जुट रही है।
उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की ओर से दुग्धेश्वरनाथ मंदिर परिक्षेत्र के सुंदरीकरण का कार्य चल रहा है। शासन की ओर से मंदिर और पोखरे के सुंदरीकरण को पांच करोड़ रुपये की धनराशि दी गई है।
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मंदिर के ठीक सामने स्थित गिरिजा सरोवर की सीढ़ियों की ढ़लाई के लिए खुदाई करने के दौरान एक कूप दबा हुआ मिला। मिट्टी हटाने पर कूप सही सलामत हालत में दिख रहा है।
इतिहासकारों के अनुसार कूप का निर्माण आठवीं शताब्दी में हुआ होगा। कूप के निर्माण में प्रयुक्त ईंटें आठवीं शताब्दी की लगती हैं। उस समय आम जनता को पानी पीने के लिए इस आकार के कूप खुदवाएं जाते थे।
कूप में प्रयुक्त ईट 24 सेंटीमीटर लंबी, और छह सेंटीमीटर मोटी है। प्राचीन इतिहास में इस आकार के ईंटों का प्रमाण ऑठवी से दसवीं शताब्दी तक मिलता है।
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बीते दिनों दुग्धेश्वरनाथ मंदिर परिक्षेत्र में स्थिति गिरिजा सरोवर के सुंदरीकरण के दौरान भी आठवीं शताब्दी का कुंआ मिला। इस पुराने कूप को देखने के लिए लोगों की भीड़ जुट रही है।
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उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की ओर से दुग्धेश्वरनाथ मंदिर परिक्षेत्र के सुंदरीकरण का कार्य चल रहा है। शासन की ओर से मंदिर और पोखरे के सुंदरीकरण को पांच करोड़ रुपये की धनराशि दी गई है।
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मंदिर के ठीक सामने स्थित गिरिजा सरोवर की सीढ़ियों की ढ़लाई के लिए खुदाई करने के दौरान एक कूप दबा हुआ मिला। मिट्टी हटाने पर कूप सही सलामत हालत में दिख रहा है।
इतिहासकारों के अनुसार कूप का निर्माण आठवीं शताब्दी में हुआ होगा। कूप के निर्माण में प्रयुक्त ईंटें आठवीं शताब्दी की लगती हैं। उस समय आम जनता को पानी पीने के लिए इस आकार के कूप खुदवाएं जाते थे।
कूप में प्रयुक्त ईट 24 सेंटीमीटर लंबी, और छह सेंटीमीटर मोटी है। प्राचीन इतिहास में इस आकार के ईंटों का प्रमाण ऑठवी से दसवीं शताब्दी तक मिलता है।