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Deoria News: पिता के सपने को पूरा करने के लिए लड़ा ब्लॉक प्रमुख का चुनाव
Sun, 08 Mar 2026 12:43 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sun, 08 Mar 2026 12:43 AM IST
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बनकटा। पिता शिक्षक, खुद एमए-बीएड की डिग्री के बाद शिक्षक की नौकरी की, लेकिन पिता के सपने को पूरा करने के लिए एक बेटी राजनीति में उतरी और बिहार बॉर्डर स्थित विकास खंड बनकटा की चौथी बार ब्लॉक प्रमुख बनीं। आज ब्लॉक प्रमुख बिंदा देवी महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।
मध्यमवर्गीय परिवार में जन्म लेने वाली बिंदा देवी के पिता इंटर कॉलेज में शिक्षक थे। एमए-बीएड की पढ़ाई के बाद बतौर शिक्षक बिंदा ने अपने करियर की शुरुआत की। बिंदा देवी बताती हैं कि पिता स्व. रामायण सिंह बिहार में शिक्षक थे। तीन बहन और एक भाई में बड़ी बिंदा के अलावा उनकी एक छोटी बहन विद्यावती देवी प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका हैं।
दूसरी बहन बाल पुष्टाहार विभाग में कार्यरत हैं। वर्ष 1978 में उनके पिता ने ब्लॉक प्रमुख का चुनाव लड़ा, लेकिन पराजित हो गए। पिता का सपना था कि उनके परिवार से कोई ब्लॉक प्रमुख बन जाए। सबसे बड़ी होने के कारण बिंदा ने पिता के सपने को पूरा करने का निर्णय लिया और राजनीति में प्रवेश किया।
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वर्ष 1995 में पहली बार बीडीसी सदस्य बनीं। उसी साल ब्लॉक प्रमुख का चुनाव लड़ा और महज एक वोट से पराजित हुईं। वर्ष 2000 में पुनः चुनाव लड़ा और जीत गईं। इसके बाद लगातार वर्ष 2005 और 2011 का चुनाव भी जीता।
2015 के चुनाव में बनकटा ब्लॉक प्रमुख का सीट एसटी के लिए आरक्षित हो गया। इसके बाद 2021 में पुनः अनारक्षित होने पर बिंदा चौथी बार ब्लॉक प्रमुख बनीं। ब्लॉक प्रमुख के अलावा वह जिला उपभोक्ता फोरम की न्यायिक सदस्य, रेलवे बोर्ड के परामर्शदात्री समिति की सदस्य भी रह चुकी हैं।
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मध्यमवर्गीय परिवार में जन्म लेने वाली बिंदा देवी के पिता इंटर कॉलेज में शिक्षक थे। एमए-बीएड की पढ़ाई के बाद बतौर शिक्षक बिंदा ने अपने करियर की शुरुआत की। बिंदा देवी बताती हैं कि पिता स्व. रामायण सिंह बिहार में शिक्षक थे। तीन बहन और एक भाई में बड़ी बिंदा के अलावा उनकी एक छोटी बहन विद्यावती देवी प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका हैं।
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दूसरी बहन बाल पुष्टाहार विभाग में कार्यरत हैं। वर्ष 1978 में उनके पिता ने ब्लॉक प्रमुख का चुनाव लड़ा, लेकिन पराजित हो गए। पिता का सपना था कि उनके परिवार से कोई ब्लॉक प्रमुख बन जाए। सबसे बड़ी होने के कारण बिंदा ने पिता के सपने को पूरा करने का निर्णय लिया और राजनीति में प्रवेश किया।
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वर्ष 1995 में पहली बार बीडीसी सदस्य बनीं। उसी साल ब्लॉक प्रमुख का चुनाव लड़ा और महज एक वोट से पराजित हुईं। वर्ष 2000 में पुनः चुनाव लड़ा और जीत गईं। इसके बाद लगातार वर्ष 2005 और 2011 का चुनाव भी जीता।
2015 के चुनाव में बनकटा ब्लॉक प्रमुख का सीट एसटी के लिए आरक्षित हो गया। इसके बाद 2021 में पुनः अनारक्षित होने पर बिंदा चौथी बार ब्लॉक प्रमुख बनीं। ब्लॉक प्रमुख के अलावा वह जिला उपभोक्ता फोरम की न्यायिक सदस्य, रेलवे बोर्ड के परामर्शदात्री समिति की सदस्य भी रह चुकी हैं।