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नहीं रहे देवरहा बाबा के शिष्य राज नरायण दास, अंतिम दर्शन को उमड़ी भीड़

Mon, 02 Aug 2021 11:43 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 02 Aug 2021 11:43 PM IST
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follower of deoraha baba raj narain das is no more
नहीं रहे देवरहा बाबा के शिष्य राज नरायण दास, अंतिम दर्शन को उमड़ी भीड़
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लार रोड। देवरहा बाबा के प्रिय शिष्य राज नारायण दास का रविवार की रात देहावसान हो गया। वे सौ वर्ष के थे। उनके अंतिम दर्शनों को भीड़ उमड़ पड़ी। भागलपुर में सरयू नदी में शव प्रवाहित किया गया।
काफी विचार-विमर्श के बाद उनके पार्थिव शरीर को जल में प्रवाहित किया। अंतिम यात्रा में सलेमपुर विधायक काली प्रसाद, ग्राम प्रधान अतुल सिंह, श्याम बहादुर सिंह, दिलीप मल्ल, अविनाश सिंह, राजू सिंह, प्रिंस सिंह, अमरीश चंद कौशिक, शैलेंद्र सिंह, झब्बर सिंह, सकील राम, मधुर कुशवाहा, संजय जायसवाल, सुनील सिंह, चंदू सिंह, शत्रुघ्न सिंह, दुख हरण सिंह, संतोष सिंह, मंटू सिंह, अशोक सिंह, राकेश सिंह आदि मौजूद रहे।
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सादगी की प्रतिमूर्ति थे राज नारायण दास : देवरहा बाबा के प्रिय शिष्य रहे और क्षेत्र से लेकर दूसरे जगहों पर भी दर्जनों महायज्ञ करा कर लोगो के बीच प्रसिद्धि पाने वाले राज नारायण दास महाराज सादगी की प्रतिमूर्ति थे। अपनी त्याग, सादगी के कारण लोग उन्हें अपने अभिभावक के तरह मानते थे। कहीं भी मंदिर निर्माण हो या यज्ञ कराना हो अगर राज नारायण दास महाराज किसी भी भक्त से कुछ सहयोग के लिए बोल देते थे तो कोई भी उनकी बात को कभी मना नही करता था। कुंडौली गांव में 100वर्षों पूर्व एक कुशवाहा परिवार में जन्म लेने वाले राजबली कुशवाहा (बचपन का नाम) का शुरू से धर्म से लगाव रहा। शादी की चर्चा होने पर घर छोड़कर देवरहा बाबा के सानिध्य में चले गए थे। उन्होंने देवरहा बाबा से दीक्षा लेने के बाद उनका नाम राज नारायण दास पड़ गया। लोग उन्हें त्यागी जी नाम से भी बुलाते थे।
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बहराइच जिले में बसाया है कुंडौली गांव
बाबा का अपने गांव से इतना लगाव था कि जब वे देश भ्रमण करते हुए बहराईच जिले में गए तो वहां की आबोहवा से प्रभावित होकर कुंडौली नाम का गांव बसा दिए। उस गांव में यहां से बहुत से लोग जाकर निवास करते है ।
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