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बांध कटने से पहले ही डूबने लगे गांव, चारों तरफ से पानी से घिरा भिरवा और पटवनिया गांव
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बांध कटने से पहले ही डूबने लगे गांव, चारों तरफ से पानी से घिरा भिरवा और पटवनिया गांव
बांध पर शरण लेने लगे लोग
रुद्रपुर। दोआबा और कछार क्षेत्र में बाढ़ का संकट दिन-प्रतिदिन गहराता जा रहा है। लाल निशान को पार करने के बाद राप्ती और गोर्रा नदियों का जलस्तर तेजी से डेंजर लेवल की ओर बढ़ रहा है। नदियों में उफान के कारण बरसात के पानी से दोआबा क्षेत्र की करीब दो हजार हेक्टेयर भू भाग जलमग्न हो गया है, वहीं आधा दर्जन गांव चारों ओर से पानी से घिरे हैं।
भिरवा और पटवनिया गांव में हालात बद से बदतर होते जा रहे है। दोनों का संपर्क मार्ग डूब गया है। लोग गांव छोड़कर बंधों पर शरण ले रहे हैं। गांव वाले थर्माकोल की नाव से जान जाखिम में डालकर गांव से बाहर निकल रहे हैं। समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक अनुग्रह नारायण सिंह ने शुक्रवार को दोआबा क्षेत्र के दर्जन भर गांवों का दौराकर बाढ़ पीड़ितों का हाल जाना। उन्होंने कहा कि दोआबा में स्थिति भयावह होने के बाद भी प्रशासन हाथ पर हाथ रख कर बैठा है। पटवनिया गांव चारों ओर से पानी से घिरा है। यहां के गरीब लोगों को दो जून की रोटी भी नसीब नहीं हो रही है। गांव की महिलाएं और बच्चे बंधों पर रात काट रहें है। इन गांवों में अब तक प्रशासन की ओर से कोई अहेतुक सहायता नहीं मिली। गांव के लोगों को नाव की जरूरत है। लेकिन प्रशासन की ओर से चारों ओर से पानी घिरे गांवों में नाव का इंतजाम नहीं किया गया। उन्होंने प्रशासन से मैरूंड गांवों में राहत सामग्री पहुंचाने की मांग की। गांव के हीरालाल, गणेश, विजय, रामगोविंद यादव, दौलत देवी, गुड्डी देवी, इष्टदेव यादव, हरेंद्र सिंह त्यागी, प्रिंस, रामबिलास यादव, महंत यादव, सुधाकर यादव, गुलाब यादव आदि ने कहा कि चारों ओर से पानी से घिरने से बाढ़ से भी बदतर हालत हो गई है। बांध पर दबाव बनने से गांव वालों को भारी तबाही की चिंता सता रही है। उन्होंने प्रशासन से अहेतुक सहायता की मांग की। इस बाबत एसडीएम संजीव कुमार उपाध्याय ने कहा कि मैरूंड गांवों में लेखपाल को सर्वे कर बाढ़ पीड़ितों की मदद करने का निर्देश दिया गया है।
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बांध पर शरण लेने लगे लोग
रुद्रपुर। दोआबा और कछार क्षेत्र में बाढ़ का संकट दिन-प्रतिदिन गहराता जा रहा है। लाल निशान को पार करने के बाद राप्ती और गोर्रा नदियों का जलस्तर तेजी से डेंजर लेवल की ओर बढ़ रहा है। नदियों में उफान के कारण बरसात के पानी से दोआबा क्षेत्र की करीब दो हजार हेक्टेयर भू भाग जलमग्न हो गया है, वहीं आधा दर्जन गांव चारों ओर से पानी से घिरे हैं।
भिरवा और पटवनिया गांव में हालात बद से बदतर होते जा रहे है। दोनों का संपर्क मार्ग डूब गया है। लोग गांव छोड़कर बंधों पर शरण ले रहे हैं। गांव वाले थर्माकोल की नाव से जान जाखिम में डालकर गांव से बाहर निकल रहे हैं। समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक अनुग्रह नारायण सिंह ने शुक्रवार को दोआबा क्षेत्र के दर्जन भर गांवों का दौराकर बाढ़ पीड़ितों का हाल जाना। उन्होंने कहा कि दोआबा में स्थिति भयावह होने के बाद भी प्रशासन हाथ पर हाथ रख कर बैठा है। पटवनिया गांव चारों ओर से पानी से घिरा है। यहां के गरीब लोगों को दो जून की रोटी भी नसीब नहीं हो रही है। गांव की महिलाएं और बच्चे बंधों पर रात काट रहें है। इन गांवों में अब तक प्रशासन की ओर से कोई अहेतुक सहायता नहीं मिली। गांव के लोगों को नाव की जरूरत है। लेकिन प्रशासन की ओर से चारों ओर से पानी घिरे गांवों में नाव का इंतजाम नहीं किया गया। उन्होंने प्रशासन से मैरूंड गांवों में राहत सामग्री पहुंचाने की मांग की। गांव के हीरालाल, गणेश, विजय, रामगोविंद यादव, दौलत देवी, गुड्डी देवी, इष्टदेव यादव, हरेंद्र सिंह त्यागी, प्रिंस, रामबिलास यादव, महंत यादव, सुधाकर यादव, गुलाब यादव आदि ने कहा कि चारों ओर से पानी से घिरने से बाढ़ से भी बदतर हालत हो गई है। बांध पर दबाव बनने से गांव वालों को भारी तबाही की चिंता सता रही है। उन्होंने प्रशासन से अहेतुक सहायता की मांग की। इस बाबत एसडीएम संजीव कुमार उपाध्याय ने कहा कि मैरूंड गांवों में लेखपाल को सर्वे कर बाढ़ पीड़ितों की मदद करने का निर्देश दिया गया है।
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