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Deoria News: मानसून की बेरुखी से किसान बेहालए सिंचाई से बढ़ गई खेती की लागत

Sat, 19 Sep 2026 11:59 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया Updated Sat, 19 Sep 2026 11:59 PM IST
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Farmers in distress due to a lacklustre monsoon; irrigation has raised farming costs.
पम्पसेट से धान की सिंचाई के बाद पाईप समेटते देवसिया निवासी किसान
भागलपुर। मानसून की बेरुखी ने अन्नदाताओं के माथे पर चिंता की गहरी लकीरें खींच दी हैं। एक सप्ताह से बादल तो उमड़ रहे हैं मगर बरस नहीं रहे हैं। इससे धान की फसल पर सूखने का संकट गहराने लगा है। फसल बचाने के लिए किसान पंपिंगसेट से खेतों की सिंचाई कर रहे हैं। इससे फसल की लागत बढ़ रही है। वहीं उपज घटने की आशंका बढ़ गई है।
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इस साल बारिश का जिले में असामान्य व्यवहार किसानों के लिए चिंता का विषय रहा। मई-जून में हल्की बारिश के बाद जुलाई में अचानक हुई मूसलाधार बारिश किसानों के लिए अभिशाप बन गई थी। लगातार तीन दिन तक हुई भीषण बारिश से खेतों में पानी भर गया था। इससे अरहर, मक्का, तिल, ज्वार और बाजरा का बीज खेत में ही सड़ गया। बड़ी मुश्किल से किसानों ने साहूकारों और बैंकों से कर्ज लेकर दोबारा बीज खरीदा और डीजल मोटर और पंपिंग सेट चलाकर धान की रोपाई की। किसानों का कहना है कि रोपाई में ही प्रति बीघा 2500 से 3000 रुपये का अतिरिक्त खर्च आ गया था।
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किसानों को उम्मीद थी कि अब मानसून साथ देगा और अच्छी पैदावार होगी मगर अब ठीक उल्टा हो रहा है। पिछले एक सप्ताह से बारिश न होने से धान के खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं। धान की रोपाई के बाद पहले 25 दिन तक खेत में दो से तीन इंच पानी भरा रहना बेहद जरूरी होता है। पानी न मिलने से धान के पौधों की बढ़वार रुक गई है और पौधे पीले पड़ने लगे हैं।
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इससे पैदावार आधी रह जाएगी। मजबूरी में किसान 92 रुपये लीटर वाला डीजल खरीद कर सिंचाई कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि एक बीघा खेत में एक बार पानी भरने में छह से सात लीटर डीजल खर्च हो रहे हैं। छोटे किसानों को 300 रुपये प्रति घंटे की दर से किराये पर पंपिंग सेट से पानी चलवाना महंगा पड़ रहा है।
क्षेत्रीय किसान प्रहलाद तिवारी, रमेश पांडेय, अनिल सिंह, मणि यादव, सुरेंद्र यादव आदि ने सिंचाई की सुविधा बढ़ाने की मांग की है।
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