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‘अनुकरणीय है रविदास का जीवन’
देवरिया
Updated Fri, 10 Feb 2017 10:51 PM IST
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रविदास जयंती कार्यक्रम को मुख्य अतिथि एडीएम प्रशासन ने संबोधित किया।
- फोटो : अमर उजाला
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देवरिया/घांटी /बरहज/भाटपाररानी। संत रविदास की जयंती शुक्रवार को समारोहपूर्वक मनाई गई। उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला। उनके विचारों को आत्मसात करने पर जोर दिया। कहा कि सामाजिक कुरीतियों को दूर अपनाने पर जोर दिया। शहर के सीसी रोड स्थित रविदास मंदिर परिसर में शुक्रवार को आयोजित कार्यक्रम में एडीएम प्रशासन वीके दोहरे ने कहा कि रविदास जी की सोच से समाज में क्रांतिकारी बदलाव आया है।
सोचने समझने की क्षमता का विकास हुआ। उनका जीवन अनुकरणीय है। डॉ. अमरनाथ और डॉ. संजय बौद्ध ने कहा कि कर्मकांड, छूआछूत से दूर रहने की जरूरत है। ताकि समाज में समानता कायम रह सके। इस दौरान एलबी संजीवैया, महेंद्र अंबेडकर, रामपति, हरिलाल राम, नंदलाल, बालकिशुन आदि ने संबोधित किया। इसके अलावा भटनी विकास खंड के सिंहपुर में शुक्रवार को संत रविदास जयंती मनाई गई। मुख्य अतिथि छेदी मास्टर अकेला ने कहा कि संत रविदास ने मानव जाति को ही सर्वोपरि माना जाति पांति को कभी महत्व नही दिया।
हमें उनके आदर्शों पर ही चलने की जरूरत है। इस दौरान बांके लाल प्रसाद, रमेश रंजन, चंद्रप्रकाश, अमरजीत प्रसाद, राजेश प्रसाद आदि मौजूद रहे। उधर, बरहज के ऐतिहासिक जहाज घाट पर आयोजित संत रविदास जयंती और सहभोज कार्यक्रम में मुख्य अतिथि हिन्दू युवा वाहिनी के जिला संयोजक नीरज शाही ने कहा कि संत रविदास सामाजिक समरसता के अग्रदूत थे। उन्होंने समाज में फैली बुराइयों को दूर करने के लिए लोगों को जागरूक किया था। उन्होंने कहा कि रविदास का यह मानना था कि मन चंगा तो कठौती में गंगा और उन्होंने इसको सत्य साबित किया था। अध्यक्षता हियुवा जिलाध्यक्ष मुन्ना राय और संचालन जितेंद्र भारत ने किया।
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इससे पूर्व सभी जाति वर्ग के लोगों ने साथ बैठकर सहभोज किया। इस दौरान जयप्रकाश मिश्र, विन्देश्वर गिरी, चिंतामणि साहनी, मुरारी शर्मा, रामकृपाल शुक्ल, प्रभावती और चंद्रावती आदि उपस्थित रहीं। दूसरी तरफ भाटपाररानी क्षेत्र में शुक्रवार को माघी पूर्णिमा के अवसर पर संत रविदास की जयंती भजन और संकीर्तन के साथ मनाई गई। इस दौरान लोग नदी में स्नान कर दान पुण्य किए और भजन गाया। क्षेत्र के अकटही, सोहनपुर, सोहनपार, चनुकी, भिंगारी, भवानी छापर सहित कई जगहों पर मंदिरों तथा हरिजन बस्तियों में उनके चित्र पर माल्यार्पण कर भजन और संकीर्तन का कार्यक्रम आयोजित हुआ।
कई जगहों पर सहभोज का भी आयोजन किया गया। कुछ जगहों पर भक्त शिरोमणि संत रविदास जी के जीवन से संबंधित झांकियां भी निकाली गई। इसमें बड़ी संख्या में महिलाओं और बच्चों ने भाग लिया। उधर, शांति सद्भावना मंच की ओर से एकडंगा टेकुआ चौराहे पर संत रविदास की जयंती मनाई गई। रामकिशोर चौहान ने कहा कि जाति व्यवस्था की व्यवस्था को खत्म करने में अहम भूमिका निभाई। भाईचारा के लिए परिवर्तन जरूरी है। इस दौरान शिवचन चौहान, शत्रुघ्न, राजेश, धर्मेंद्र, विजय चौहान आदि मौजूद रहे।
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सोचने समझने की क्षमता का विकास हुआ। उनका जीवन अनुकरणीय है। डॉ. अमरनाथ और डॉ. संजय बौद्ध ने कहा कि कर्मकांड, छूआछूत से दूर रहने की जरूरत है। ताकि समाज में समानता कायम रह सके। इस दौरान एलबी संजीवैया, महेंद्र अंबेडकर, रामपति, हरिलाल राम, नंदलाल, बालकिशुन आदि ने संबोधित किया। इसके अलावा भटनी विकास खंड के सिंहपुर में शुक्रवार को संत रविदास जयंती मनाई गई। मुख्य अतिथि छेदी मास्टर अकेला ने कहा कि संत रविदास ने मानव जाति को ही सर्वोपरि माना जाति पांति को कभी महत्व नही दिया।
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हमें उनके आदर्शों पर ही चलने की जरूरत है। इस दौरान बांके लाल प्रसाद, रमेश रंजन, चंद्रप्रकाश, अमरजीत प्रसाद, राजेश प्रसाद आदि मौजूद रहे। उधर, बरहज के ऐतिहासिक जहाज घाट पर आयोजित संत रविदास जयंती और सहभोज कार्यक्रम में मुख्य अतिथि हिन्दू युवा वाहिनी के जिला संयोजक नीरज शाही ने कहा कि संत रविदास सामाजिक समरसता के अग्रदूत थे। उन्होंने समाज में फैली बुराइयों को दूर करने के लिए लोगों को जागरूक किया था। उन्होंने कहा कि रविदास का यह मानना था कि मन चंगा तो कठौती में गंगा और उन्होंने इसको सत्य साबित किया था। अध्यक्षता हियुवा जिलाध्यक्ष मुन्ना राय और संचालन जितेंद्र भारत ने किया।
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इससे पूर्व सभी जाति वर्ग के लोगों ने साथ बैठकर सहभोज किया। इस दौरान जयप्रकाश मिश्र, विन्देश्वर गिरी, चिंतामणि साहनी, मुरारी शर्मा, रामकृपाल शुक्ल, प्रभावती और चंद्रावती आदि उपस्थित रहीं। दूसरी तरफ भाटपाररानी क्षेत्र में शुक्रवार को माघी पूर्णिमा के अवसर पर संत रविदास की जयंती भजन और संकीर्तन के साथ मनाई गई। इस दौरान लोग नदी में स्नान कर दान पुण्य किए और भजन गाया। क्षेत्र के अकटही, सोहनपुर, सोहनपार, चनुकी, भिंगारी, भवानी छापर सहित कई जगहों पर मंदिरों तथा हरिजन बस्तियों में उनके चित्र पर माल्यार्पण कर भजन और संकीर्तन का कार्यक्रम आयोजित हुआ।
कई जगहों पर सहभोज का भी आयोजन किया गया। कुछ जगहों पर भक्त शिरोमणि संत रविदास जी के जीवन से संबंधित झांकियां भी निकाली गई। इसमें बड़ी संख्या में महिलाओं और बच्चों ने भाग लिया। उधर, शांति सद्भावना मंच की ओर से एकडंगा टेकुआ चौराहे पर संत रविदास की जयंती मनाई गई। रामकिशोर चौहान ने कहा कि जाति व्यवस्था की व्यवस्था को खत्म करने में अहम भूमिका निभाई। भाईचारा के लिए परिवर्तन जरूरी है। इस दौरान शिवचन चौहान, शत्रुघ्न, राजेश, धर्मेंद्र, विजय चौहान आदि मौजूद रहे।