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Deoria News: अतिक्रमण ने रोकी रामलीला की राह, 12 साल से मंचन बंद
Tue, 13 Oct 2026 12:55 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Tue, 13 Oct 2026 12:55 AM IST
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कपरवार। जिस मैदान में कभी नौ दिनों तक भगवान श्रीराम की लीलाओं से गांव गूंजता था, वहां अब अतिक्रमण के चलते सन्नाटा पसरा है। करीब 100 वर्ष पुरानी रामलीला की परंपरा 12 साल से ठप है।
सरकारी अभिलेखों में रामलीला मैदान के नाम दर्ज 18 कट्ठा जमीन पर कच्चे-पक्के निर्माण हो जाने से मंचन का रास्ता बंद हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत के बावजूद जमीन को कब्जा मुक्त कराने की पहल नहीं हुई। इससे गांव की धार्मिक आस्था से जुड़ी पुरानी परंपरा दम तोड़ती नजर आ रही है।
ग्रामीणों के अनुसार, करीब 100 वर्ष पहले गांव में महामारी फैलने से अफरा-तफरी मच गई थी। लोगों को अध्यात्म से जोड़ने और संकट से उबरने की कामना के साथ रामलीला मंचन की शुरुआत हुई। धीरे-धीरे यह आयोजन गांव की परंपरा बन गई। नौ दिनों तक स्थानीय कलाकार भगवान श्रीराम की लीलाओं का मंचन करते थे।
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बाद में रोजगार के सिलसिले में ग्रामीणों के बाहर जाने पर बाहरी कलाकारों को बुलाया जाने लगा। रामलीला देखने के लिए आसपास के गांवों और गोरखपुर जिले से भी लोग पहुंचते थे।
कुछ वर्ष पहले अनिरुद्ध तिवारी और देवेश चंद्र सिंह सहित अन्य लोगों ने जनसहयोग से दिन में रामलीला मंचन शुरू कराने का प्रयास किया था। ग्रामीण विश्राम तिवारी आदि का कहना है कि मैदान पर कब्जे के कारण अब आयोजन संभव नहीं है।
करीब चार वर्ष पहले कार्रवाई के लिए टीम पहुंची थी मगर बिना कार्रवाई लौट गई।
अब ग्रामीण मैदान को अतिक्रमण मुक्त कराकर पुरानी परंपरा बहाल करने की मांग कर रहे हैं। एसडीएम प्रवीण कुमार ने बताया कि मामला संज्ञान में नहीं है। पता कराता हूं।
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सरकारी अभिलेखों में रामलीला मैदान के नाम दर्ज 18 कट्ठा जमीन पर कच्चे-पक्के निर्माण हो जाने से मंचन का रास्ता बंद हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत के बावजूद जमीन को कब्जा मुक्त कराने की पहल नहीं हुई। इससे गांव की धार्मिक आस्था से जुड़ी पुरानी परंपरा दम तोड़ती नजर आ रही है।
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ग्रामीणों के अनुसार, करीब 100 वर्ष पहले गांव में महामारी फैलने से अफरा-तफरी मच गई थी। लोगों को अध्यात्म से जोड़ने और संकट से उबरने की कामना के साथ रामलीला मंचन की शुरुआत हुई। धीरे-धीरे यह आयोजन गांव की परंपरा बन गई। नौ दिनों तक स्थानीय कलाकार भगवान श्रीराम की लीलाओं का मंचन करते थे।
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बाद में रोजगार के सिलसिले में ग्रामीणों के बाहर जाने पर बाहरी कलाकारों को बुलाया जाने लगा। रामलीला देखने के लिए आसपास के गांवों और गोरखपुर जिले से भी लोग पहुंचते थे।
कुछ वर्ष पहले अनिरुद्ध तिवारी और देवेश चंद्र सिंह सहित अन्य लोगों ने जनसहयोग से दिन में रामलीला मंचन शुरू कराने का प्रयास किया था। ग्रामीण विश्राम तिवारी आदि का कहना है कि मैदान पर कब्जे के कारण अब आयोजन संभव नहीं है।
करीब चार वर्ष पहले कार्रवाई के लिए टीम पहुंची थी मगर बिना कार्रवाई लौट गई।
अब ग्रामीण मैदान को अतिक्रमण मुक्त कराकर पुरानी परंपरा बहाल करने की मांग कर रहे हैं। एसडीएम प्रवीण कुमार ने बताया कि मामला संज्ञान में नहीं है। पता कराता हूं।